Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
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आधुनिक संचार साधनों का हुआ बेहतर इस्तेमाल

मध्यप्रदेश की 29 लोकसभा सीटों के लिये निर्वाचन प्रक्रिया में संचार तंत्र की प्रभावी भूमिका परिलक्षित हुई है। चुनाव आयोग की मंशा के अनुरूप मध्यप्रदेश में आधुनिक संचार साधनों का अधिकाधिक और बेहतर इस्तेमाल किया गया। लोकसभा निर्वाचन के लिये नामांकन की अधिसूचना जारी होने के पूर्व ही संचार तंत्र ने अपना काम करना शुरू कर दिया था। नामांकन प्रक्रिया से लेकर मतदान तथा उसके बाद मतदान संबंधी रिपोर्ट भेजने तक संचार तंत्र अत्याधिक सक्रियता से कार्य करता रहा है। इसका परिणाम यह रहा कि जिलों से मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय को पल-पल की जानकारी मिलती रही, बल्कि कुछ ही मिनिटों के भीतर जिलों को मार्गदर्शन भी दिया जाता रहा। नामांकन अथवा मतदान के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति या घटना के उत्पन्न होने पर उसके तुरन्त ही निराकरण में संचार तंत्र ने अपनी उल्लेखनीय भूमिका का निर्वहन किया।
मतदान केन्द्रों से लेकर आयोग तक जुड़े कम्युनिकेशन के तारों ने पूरी मशीनरी को चौकस और मुस्तैद कर रखा था। जिसके फलस्वरूप चुनाव के दौरान होने वाले अपराधों में पिछले चुनावों की तुलना में भारी कमी आई। इस बार वैसे भी चुनाव आयोग ने सूचना तंत्र के मजबूती के साथ प्रयोग करने पर जोर दिया था। लोकसभा चुनाव में संचार सुविधा के जो आधुनिकतम साधन इस्तेमाल किये गये उनमें लैण्डलाइन फोन, मोबाइल फोन, फैक्स, वायरलेस और ऑनलाईन सेवा आदि शामिल है। सूचना तंत्र के विस्तृत दायरे में मतदान केन्द्र, संबंधित थाना, जोनल अधिकारी, सेक्टर मजिस्ट्रेट, आर्ब्जवर, माइक्रो आब्जर्वर, जिला निर्वाचन अधिकारी, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, चुनाव आयोग आपस में जुड़े हुये थे। मैदानी अधिकारियों को लोकसभा निर्वाचन संबंधी विभिन्न सूचनाओं के आदान-प्रदान करने हेतु तैयार किये गये कम्युनिकेशन प्लान के तहत मोबाइल फोन के व्यय हेतु 11 लाख 71 हजार 500 रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी।
भोपाल स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय स्तर पर मतदान के दिन तैनात राज्य प्रशासनिक सेवा के 8 अधिकारियों के अलावा दो-दो व्यक्तियों की 6 टीमें तैनात की गई थी। संचार तंत्र के जानकार तीन व्यक्ति भी रिजर्व में थे। दो चरणों में हुये मतदान के लिये क्रमश: 23 एवं 30 अप्रैल को उक्त कम्युनिकेशन दल ने 5 फैक्स मशीनों, 15 मोबाइल फोन तथा 16 लैण्डलाइन फोन का इस्तेमाल कर न सिर्फ मतदान केन्द्रों पर नजर रखी, बल्कि वहां से एक-एक मिनिट की जानकारी भी एकत्रित की गई। उक्त जानकारी को तत्काल ही चुनाव आयोग को भी भेजने का सिलसिला जारी रखा गया।

 

दिनेश मालवीय#प्रलय श्रीवास्तव