| اردو خبریں | संस्कृत समाचारः मुख्य पृष्ठ | संपर्क करें | साईट मेप
You Tube
 

लोकसभा चुनाव के लिये प्रकाशित किये जाने वाले पम्पलेट और पोस्टर्स पर प्रकाशक और मुद्रक का नाम और पता छपा होना जरूरी है। चुनाव आयोग ने इस संबंध में जारी निर्देश में कहा है कि कोई भी किसी चुनाव पम्पलेट अथवा पोस्टर का प्रकाशन तब तक नहीं करेगा या करवायेगा जब तक की प्रकाशक की पहचान के संबंध में घोषणा पत्र नहीं दे दिया गया हो और जिस पर स्वयं प्रकाशक के हस्ताक्षर न हों और ऐसे दो व्यक्तियों द्वारा इसे सत्यापित न किया गया हो, जिन्हें वे जानता हो।

दस्तावेज के मुद्रण के युक्तिसंगत समय के भीतर ही घोषणा पत्र की एक कापी इस दस्तावेज की एक प्रति के साथ मुद्रक द्वारा, प्रदेश की राजधानी में मुद्रित होने की स्थिति में, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को तथा अन्य स्थानों पर उस जिले के जिला मजिस्ट्रेट को भेजी जायेगी, जहां इसका मुद्रण हुआ हो। दस्तावेज की प्रतियां निकालने की किसी भी प्रक्रिया को मुद्रण ही माना जायेगा और इसमें सिर्फ हाथ से की गई प्रतियां ही अपवाद होगी।
चुनाव पम्पलेट और पोस्टर्स से तात्पर्य किसी भी मुद्रित पम्पलेट, हैण्डबिल अथवा अन्य दस्तावेज से है, जो किसी उम्मीदवार के प्रचार अथवा उसके पक्ष में जनमत बनाने के लिये वितरित किया जाये। इसमें ऐसे पट्टिकाएं (प्ले कार्ड) अथवा पोस्टर्स भी शामिल हैं, जिसमें चुनाव का संदर्भ हो। लेकिन इसमें ऐसे हैण्डबिल, पट्टिकाएं अथवा पोस्टर शामिल नहीं हैं, जिनमें किसी चुनाव बैठक की तिथि, समय, स्थान तथा अन्य विवरण दिया गया हो अथवा जिसमें चुनाव एजेन्टों और कार्यकर्ताओं को रूटीन निर्देश दिये गये हों।

इन निर्देशों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को छह महीने तक कारावास की सजा या 2 हजार रुपये तक अर्थदण्ड अथवा दोनों सजाएं दी जा सकती हैं। चुनाव आयोग ने यह भी निर्देश दिये है कि प्रिन्ट मीडिया, विशेषकर अखबारों में दिये जाने चुनाव संबंधी छद्म (सरोगेट) विज्ञापन पर होने वाले खर्च को संबंधित उम्मीदवार के चुनाव खर्च में जोड़ा जाये। साथ ही किसी उम्मीदवार के पक्ष में उसके द्वारा प्राधिकृत किये बिना कोई भी विज्ञापन, परिपत्र अथवा प्रकाशन नहीं किया जा सकता। आयोग ने निर्देश दिया है कि किसी राजनैतिक दल अथवा उम्मीदवार के पक्ष अथवा विपक्ष में प्रिन्ट मीडिया में दिये जाने वाले विज्ञापनों#चुनाव सामग्री पर प्रकाशक का नाम और पता दिया जाना जरूरी होगा।

 

दिनेश मालवीय#प्रलय श्रीवास्तव