Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
सूखाग्रस्त तहसीलों के लिए प्रस्ताव भेजने को कहा
ओलावृष्टि पीड़ितों को राहत दिलाने के लिए आचार संहिता के प्रावधान के तहत कार्रवाई के निर्देश

चुनाव आयोग द्वारा प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने स्थापित हेडपम्पों, टयूबवेल व नलजल योजनाओं की मरम्मत, गहरीकरण, पेयजल परिवहन इत्यादि की अनुमति पूर्व में ही दे दी गई है। शहरी क्षेत्रों की नलजल योजनाओं की मरम्मत व गहरीकरण की अनुमति भी आयोग द्वारा पूर्व में दे दी गई है।

आयोग के निर्देशानुसार ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के लिये नये हेंडपम्पों, टयूबवेल व अन्य जल स्रोतों के लिए जिला कलेक्टरों की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। यह समिति पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जल स्रोतों के स्थल चयन कर कार्य सम्पन्न करायेगी। ग्रामीण क्षेत्र के लिए इस समिति में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) व लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन अधिकारी भी रहेंगे। शहरी क्षेत्र में आयुक्त नगर निगम#सी.एम.ओ., नगर पालिका, एस.डी.ओ. राजस्व और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री भी शामिल रहेंगे। उक्त जानकारी निर्वाचन आयुक्त श्री नवीन चावला ने मंगलवार को यहां पत्रकारवार्ता में पूछे गये प्रश्नों के जबाव में दी।

मध्यप्रदेश की 152 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की अनुमति देने के संबंध में भारत निर्वाचन आयोग ने मुख्य सचिव को संबोधित पत्र दिनांक 6 अप्रैल 2009 के द्वारा लेख किया है कि इस अनुमति के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के माध्यम से आगामी कार्यवाई हेतु भेजा जाए।

चुनाव आयोग ने समस्त राज्य सरकारों को संबोधित अपने पत्र दिनांक 5 मार्च, 2009 में यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में यद्यपि आयोग के द्वारा कोई अग्रिम स्वीकृति देने का कोई प्रावधान नहीं है परन्तु तात्कालिक स्थिति उत्पन्न होने पर पीड़ितों को प्रचलित दरों पर और आपदा की व्यापकता के मुताबिक सीधे राहत दी जा सकती है। इस पर कोई रोक नहीं है। इसकी सूचना मात्र आयोग को अवश्य दी जानी चाहिए।

 

कमर अली शाह#महेश दुबे