Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
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भारत निर्वाचन आयोग ने मध्यप्रदेश में इमारती काष्ठ, जलाऊ लकड़ी तथा औद्योगिक बांस की नीलामी की अनुमति दे दी है। लोकसभा चुनाव आचार संहिता के चलते प्रदेश के वन विभाग ने म.प्र. निर्वाचन कार्यालय के माध्यम से प्रस्ताव भेजकर इस संबंध में भारत निर्वाचन आयोग से अनुमति चाही थी।

आयोग ने इस तथ्य को विचार में लिया कि वन विभाग द्वारा जून 2009 के अंत तक के लिए काष्ठागारों में नीलामी के लिए तिथियां 22 दिसम्बर 2008 को अधिसूचित की जा चुकी हैं। विभाग में कूपों से प्राप्त वनोपज का काष्ठागारों में खुली नीलामी द्वारा निर्वर्तन किया जाता हैं, जिसमें प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों के क्रेता और विक्रेता भी भाग लेते हैं। समय पर निर्वर्तन न होने पर वनोपज की गुणवत्ता कम हो जाती है।

आयोग ने यह अनुमति इस बात को ध्यान में रखकर दी है कि प्रदेश में जलाऊ लकड़ी वन विभाग ही उपलब्ध कराता है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रदाय निस्तार नीति के माध्यम से कूप से ग्रामीणों को सीधे किया जाता है। शहरी क्षेत्रों में जलाऊ लकड़ी सरकारी डिपों से नीलाम द्वारा बेची जाती है। क्रेता इसे कस्बों में पहुँचा कर आम जनता को फुटकर उपलब्ध कराते है। नीलामी निर्धारित अवधि में न होने पर जलाऊ लकड़ी की जरूरत को पूरा करने के लिए लोग जंगल से अवैध कटाई की ओर प्रोत्साहित हो सकते हैं।

इसी तरह, औद्योगिक बांस की नीलामी के संबंध में आयोग ने इस तथ्य पर ध्यान दिया कि इस बांस का बरसात के मौसम से पहले देहातों में छप्पर तैयार करने, कुटीर उद्योगों द्वारा बांस की विभिन्न सामग्री बनाने तथा अंगूर, टमाटर और पान बरेजा की खेती में उपयोग होता हैं। आमतौर पर हरे बांस की ही माँग बाजार में रहती है, जो कटाई के तत्काल बाद बेंचा जाता है। ऐसा न होने पर स्थानीय बांस की मांग पूर्ति में बाधा आएगी। इस अनुमति से राज्य शासन को 130 करोड़ रुपये का राजस्व तत्काल प्राप्त होगा।

 

प्रलय श्रीवास्तव#दिनेश मालवीय