Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
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57.56 करोड़ रुपए खर्च करने की स्वीकृति

मध्यप्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था से संबंधित कतिपय कार्यों को भारत निर्वाचन आयोग ने आदर्श चुनाव आचार संहिता के दायरे से मुक्त किया है।
जिन ग्रामीण क्षेत्रों में भू-जल स्तर नीचे चला गया है और जहाँ वर्तमान टयूबवेल्स को मजबूत किया जाना है, इन टयूबवेल्स से अधिक जल प्राप्त करने के लिए हाइड्रोफ्रेक्चरिंग की जानी है, वर्तमान टयूबवेल्स की सफाई या गहरीकरण किया जाना है और जहां उन पर हेण्डपंप या पावर पंप लगाये जाने है, वहाँ इन कार्यों को कराने की अनुमति रहेगी।


ग्रामीण नलजल आपूर्ति योजनाओं में, जहाँ अतिरिक्त स्रोतों का निर्माण किया जाकर उन्हें पाइप लाइनों की वितरण व्यवस्था के साथ उन्हें जोड़ा जाना है और पंप लगाये जाने हैं, वहाँ इन कार्यों को आदर्श आचार संहिता के दायरे से मुक्त किया गया है।


शहरी क्षेत्रों में टेंकरों के माध्यम से पेयजल परिवहन का कार्य भी संहिता से मुक्त किया गया है। जिन निमार्णाधीन जल आपूर्ति योजनाओं का कार्य 25 प्रतिशत या उससे कम शेष रह गया है, उन्हें भी आचार संहिता के दायरे से मुक्त किया गया है।


आयोग ने ग्रामीण क्षेत्रों में वर्तमान टयूबवेल को मजबूत करने, हाइड्रोफ्रेक्चरिंग, टयूबवेल्स की सफाई, हेण्डपंप आदि के उपरोक्त कार्यों तथा नलजल योजनाओं और अतिरिक्त स्रोत निर्मित करने के लिए 50 करोड़ रुपए खर्च करने की अनुमति प्रदान की है।


कुल 27 नगरीय निकायों के अंतर्गत क्षेत्रों में टेंकरों के जरिये पेयजल परिवहन के लिए 6 करोड़ 41 लाख रुपए खर्च करने की स्वीकृति दी गयी है।


इसी प्रकार, जिन नगरीय जलप्रदाय योजनाओं का 25 प्रतिशत या इससे कम कार्य शेष रह गया है, उन्हें पूरा करने के लिए एक करोड़ 15 लाख रुपए खर्च करने की अनुमति दी गयी है।
जिन ग्रामीण क्षेत्रों में नये टयूबवेल खोदे जाने हैं, वहां की सर्वे सूची लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से चाही गई है।

दिनेश मालवीय#प्रलय श्रीवास्तव