Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
social media accounts
 

पुरातन काल से आज तक पुरुष प्रधान समाज पुरुष को ही प्रधानता देता आया है। यही वजह है कि कन्या को दूसरे स्थान पर रखा जाता है और उसे हमेशा बेटी, असहाय, अबला के रूप में ही स्वीकार किया जाता है। यही वजह है कि गर्भ में ही कन्या भ्रूण की हत्या कर दी जाती है, मगर इसी पुरुष प्रधान समाज में कुछ पालक ऐसे भी है जो बेटे और बेटियों में कोई फर्क नहीं करते है और ऐसे ही पालकों में से एक मेरे पापा भी थे, जिन्होंने मुझे बेटी नहीं बेटा बनाकर रखा और वैसे ही संस्कार दिए।

उक्त विचार विनिता सतवानी के है जिसने आज जवाहर नगर मुक्तिधाम में अपने पिता को मुखाग्नि देते एवं एक पुत्र का फर्ज पूरा करते वक्त व्यक्त किए। जानकारी के अनुसार इन्द्रलोक नगर निवासी एनके सतवानी का अल्पबीमारी के पश्चात निधन हो गया। मप्रविमं में कार्यरत स्व. सतवानी अपने पीछे पत्नी व दो पुत्री विनिता 22 व प्रीति 19 वर्ष को छोड़ गए। वे अंगुलियों के सुन्न होने पर जिला अस्पताल फिर इंदौर रेफर किए गए थे। एनके सतवानी ने अपनी उम्र के मात्र 46 वसंत ही देखे थे कि यह हादसा हो गया। चूंकि परंपरा यह है कि पुत्र ही मुखाग्नि देता है, परन्तु परिवार में पुत्र न हो तो क्या किया जाए, ऐसे में समाज के वरिष्ठ एवं पदाधिकारियों में चर्चा हुई और चाचा राधन सतवानी ने कहा कि विनिता ही मुखाग्नि देगी। बेटी है तो क्या हुआ? और विनिता ने भी इसे स्वीकार किया और पिता की अर्थी को कांधा देकर परंपरानुसार वे सारे कार्य संपन्न किए जो अंतिम यात्रा में एक पुत्र करता है। विनिता एवं प्रीति का मानना है कि चूंकि पिता ने कभी उन्हें किसी चीज की कमी नहीं होने दी। अत: अब हम अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे और पापा के सपनों को यथासंभव पूरा करने की कोशिस करेंगे। ऐसे में कहा जा सकता है कि चूंकि परिवार में अब कोई कमाई का अन्य स्त्रोत नहीं है अत: मप्रविमं में यदि परिवार के किसी भी सदस्य को नौकरी मिल जाती है तो शायद परिवार को जहां आर्थिक संबल मिलेगा वहीं किसी भी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। जवाहर नगर मुक्तिधाम में अंतिम यात्रा में सिंधी समाज के अध्यक्ष श्री गुरनानी, समाज के गणमान्य नागरि, मप्रविमं के कर्मचारी साथी, परिचित मित्र एवं रिश्तेदार शामिल थे।

नोट - लेख में प्रकाशित विचार लेखक के अपने हैं जरूरी नहीं कि जनसम्पर्क विभाग का भी यही दृष्टिकोण हो।

सं.सं.स.

मनीष पराले, रतलाम