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आज के इस दौर में जहाँ चारों ओर से धोखधडी, छल, फरेब, बलात्कार, खबरें आ रहीं हों। जहाँ धन दौलत व जमीन के लिए भाई-बहिन भी एक दूसरे के खून के दुश्मन बन रहें हों। ऐसे दौर में वर्षा जैसी बहन की साहसपुर्ण कार्य जेठ की दुपहरी में ठण्डी हवा के झोंके का अहसास कराते हैं। वर्षा ने जो कार्य किया है अगर उसके सम्मान में सागर जिला का प्रशासन वर्षा का नाम 26 जनवरी को दिल्ली में सम्मानित होने वाले बच्चों के सूची में शामिल कराता है तो समाज में साहस व रिश्तों को जान से भी ज्यादा महत्व देने की भावना को काफी संबल मिलेगा। वर्षा का यह कार्य समाज के लिए निश्चित तौर पर एक अनुकरणीय मिसाल हैं।

यह भले ही अब तक तय न किया जा सका हो कि वह कोई सियार था, लकड़बग्घा था, या जंगली कुत्ता था पर इतना तो कहा ही जा सकता है कि वह जानवर कोई सा भी रहा हो लेकिन उसके इरादे बेहद खतरनाक थे। यह जंगली जानवर 15 जनवरी को सुबह अचानक कालीपठारी (थाना राहतगढ़) में घुस आया। उसने सबसे पहले गांव के ही एक मकान की दालान मे खेल रहे एक 3 वर्षीय बालक गोलू पर जानलेवा हमला कर दिया और बच्चे की गर्दन मुँह में दबा ली। इस अचानक हुए हमले से घबराया बालक चीख उठा। बच्चे की चीख सुनकर पास में ही खेलने में मशगूल उसकी 10 वर्षीय बहिन वर्षा चौंक गई। लेकिन जब उसने अपने छोटे भाई की गर्दन जगली जानवर के मुँह में दबी देखी तो उसने गजब के साहस का परिचय दिया। उसने एक पल की भी देरी किए बिना दौड़कर उस ंहिसक जानवर का मुँह पकड़ लिया। उस जंगली जानवर के लिए भी यह हमला अप्रत्याशित रहा। इससे घबराकर उसने बच्चे की गर्दन छोड़कर उसकी बहन के हाथ को मुँह में दबा लिया। उसने वर्षा के बाएं हाथ की उंगलियां को बुरी तरह चबा कर घायल दिया। इस हमले से घायल हुई वर्षा भी चिल्ला उठी। गोलू और वर्षा की सम्मिलित चीख पुकार सुनकर घर के अंदर से उनकी माँ सुशीला दौडकर बाहर आई। बाहर का दृश्य देखकर उसके होश उड़ गए। वह भी पुरी ताकत से चीखते हुए अपने बच्चों की जान बचाने के लिए उस जंगली जानवर पर झपटी। इस शोर शराबे से घबरा कर वह जानवर वहां से भाग खडा हुआ। कुछ ही पलों में घटी इस घटना से माँ सुशीला, उसके बच्चे व गांव के वो सभी लोग जिन्होने भी इस घटना को होते देखा वे सन्न रह गए। इन बच्चों को घायल करने के बाद भी उस हिंसक जानवर ने भागते हुए भी गांव के आधा दर्जन से भी ज्यादा लागों को घायल कर दिया।

वैसे तो इस घटना से कई सवाल उठते हैं। जैसे जंगलों की अंधाधुंध कटाई , व वन भूमि को खेती योग्य जमीन में बदलने से जंगली जानवरों के रहने का क्षेत्र सिकुड़ता जा रहा हैं। इससे जंगली जानवरों के जंगल से सटे रहवासी इलाकों में घुस आने की घटनाएं आम होती जा रहीं हैं। इसके पहले भी एक से ज्यादा बार सागर शहर के विश्वविद्यालय की पहाड़ियो में तेंदुए के आ जाने की खबर से इस क्षेत्र के लोगों ने न जाने कितनी रातेें व दिन दहशत में गुजारीं हैं।

लेकिन इस घटना की सबसे उल्लेखनीय बात वर्षा का साहस है। इस छोटी सी उम्र में भी जंगली जानवर के रुप में मौत को सामने खडा देखकर वह घबराई जरुर पर उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने अपने नन्हे से भाई को बचाने के लिए अपनी जान की भी परवाह न करते हुए उस खुंखार जानवर पर हमला कर दिया।

राजेश श्रीवास्तव
सागर  द्वारा प्रेषित
(e-mail : rajcony@yahoo.co.in )