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पिछले चुनाव में 1655 ने धोऐ थे हाथ
बड़े दलों के 523 उम्मीदवार शामिल

चुनावी समर में उतरने वाले हर उम्मीदवार की जीत कभी मुमकिन नहीं होती। बावजूद इसके, बड़ी तादाद चुनाव में भागीदारी और किस्मत आजमाइश के लिए लोग सामने आते हैं। लेकिन हार के साथ ही अपनी जमानत खोना और महंगा पड़ता है जबकि उम्मीदवार इसे बचाने के लिए तयशुदा जरूरी वोट भी हासिल नहीं कर पाए। ऐसा भी नहीं है कि जमानत खोने वालों में कोई निर्दलीय या छोटे राजनैतिक दलों के उम्मीदवार ही शामिल होते हैं, कई बड़े दलीय उम्मीदवार भी इस दायरे में शरीक हो जाते हैं। पिछले यानि वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव की ही बात करें तो इसमें जमानत से हाथ धोने वाले कुल 1655 उम्मीदवारों में बड़े दलों के 523 उम्मीदवार शामिल थे।
विधानसभा चुनाव लड़ने के ख्वाहिशमंद सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 5000 रुपए और अनुसूचित वर्ग के प्रत्याशियों को 2500 रुपए की सुरक्षा निधि नामजदगी का पर्चा दाखिल करते वक्त जमा करानी होती है। व्यवस्था यह है कि उम्मीदवार यदि अपने विधानसभा क्षेत्र में पड़े कुल वैध मतों का 16.66 प्रतिशत हिस्सा भी हासिल न कर सके तो फिर उसके लिए अपनी यह जमानत राशि बचाना मुमकिन नहीं रह जाता। ऐसा नहीं है कि सिर्फ निर्दलीय या छोटे दलों के उम्मीदवारों के सामने ही अक्सर ऐसी स्थिति आती है, कई मौकों पर परिस्थितियाँ बड़े दलों के उम्मीदवारों के आड़े भी आ जाती हैं।
वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में भी ये हालात बने जबकि कई प्रमुख और बड़े दलों के उम्मीदवारों ने भी जमानत से हाथ धोए। उस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी जिसके 173 उम्मीदवारों ने फतह हासिल कर पहला नंबर पाया था इसके भी 8 उम्मीदवार जमानत जप्त होने से नहीं बचे थे। दूसरे नंबर पर इंडियन नेशनल कांग्रेस थी जिसके 38 उम्मीदवार जीते लेकिन 19 उम्मीदवारों ने जमानत भी खोई। तीसरे क्रम पर समाजवादी पार्टी थी जिसके 7 उम्मीदवार विजयी हुए लेकिन जमानत से हाथ धोने वालों की तादाद 146 थी।
विजेता उम्मीदवारों को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का नंबर चौथा था जबकि वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में उसके 3 उम्मीदवारों ने चुनाव जरूर जीता लेकिन 51 ने जमानत भी खोई। पाँचवें क्रम पर बहुजन समाज पार्टी थी जिसके 2 उम्मीदवारों ने चुनाव जीता पर 122 ने अपनी जमानत खोई। इनके अलावा भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी और जनता दल (यूनाईटेड) के सिर्फ एक-एक प्रत्याशी जीते पर इनमें से क्रमश: 8,103 और 33 उम्मीदवारों ने जमानत खोई। जहाँ तक अन्य दलों की बात है तो उनके कुल 2 उम्मीदवार चुनाव जीते थे लेकिन 263 ने जमानत खोई। निर्दलीय उम्मीदवारों का भी यही हाल था जबकि उनमें से चुनाव सिर्फ 2 ने जीता लेकिन 869 ने जमानत खोई।

 
योगेश शर्मा