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छोटे दल भी देते हैं सीधी टक्कर
पिछले चुनाव में 32 उतरे कसौटी पर

चुनाव में किस्मत आजमाने सभी उम्मीदवार पूरे मन और प्रयासों से चुनौती उठाते हैं। उम्मीदवार भले ही बड़े दल के हों या छोटे के या फिर निर्दलीय ही क्यूँ न हों, चुनाव जीतने की कोशिश और ख्वाहिश सभी की रहती है। इसके बावजूद किस्मत आजमाइश का फैसला कभी-कभी हालात की करवटें भी करती हैं। जीत न हासिल होने पर निकटतम प्रतिद्वंदी होना भी उम्मीदवारों के लिए इसलिए अहम होता है कि ऐसा मुकाम यह साबित करता है कि टक्कर सीधी दी गई है। सच्चाई यह भी है कि इस कसौटी पर कई बार छोटे दलों के और निर्दलीय उम्मीदवार भी पूरे उतरते हैं। प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनाव में निकटतम प्रतिद्वंदी होने का दावा करने में ऐसे कुल 32 उम्मीदवार कामयाब हुए थे।
वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में सवर्ण समाज पार्टी और जनता पार्टी के एक-एक उम्मीदवार ने भी कुल दो सीटों पर निकटतम प्रतिद्वंदी का मुकाम हासिल किया था। इनमें से सवर्ण समाज पार्टी के उम्मीदवार ने मऊगंज विधानसभा क्षेत्र में निकटतम प्रतिद्वंदी के रूप में बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार को सीधी टक्कर दी थी। इसी तरह के हालात परसवाड़ा विधानसभा सीट पर बने जबकि जनता पार्टी (जेपी) के उम्मीदवार ने गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के उम्मीदवार को निकटतम प्रतिद्वंदी के रूप में सीधी चुनौती दी थी।
अगले क्रम में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के तीन उम्मीदवारों की निकटतम प्रतिद्वंदी के रूप में बिछिया (अजजा) सीट पर भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार, निवास (अजजा) सीट पर भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार और लखनादौन (अजजा) सीट पर भी भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार से सीधी टक्कर हुई थी। इसी चुनाव में समाजवादी पार्टी के सात उम्मीदवार और चार निर्दलीय उम्मीदवार भी निकटतम प्रतिद्वंदी बने थे। इनके अलावा, बहुजन समाज पार्टी के 16 उम्मीदवारों ने भी निकटतम प्रतिद्वंदी होने का मुकाम हासिल किया। प्रमुख दलों में भारतीय जनता पार्टी के 45 तो इंडियन नेशनल कांग्रेस के 153 उम्मीदवार उस चुनाव में निकटतम प्रतिद्वंदी बने थे।

योगेश शर्मा