Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
social media accounts
डयूटी में कोताही पड़ेगी महंगी निष्पक्षता को लेकर न हो पैदा शक दोषी के विरूध्द सीधी कार्रवाई

चुनाव के काम में लगने वाला पूरा प्रशासनिक और पुलिस अमला अब भारत निर्वाचन आयोग के अधीन हो गया है। इसके चलते डयूटी में कोई कोताही तो महंगी पड़ेगी ही, इनमें से किसी की निष्पक्षता को लेकर कोई सवाल उठा तो भी दोषी कर्मचारी आयोग की सीधी कार्रवाई का पात्र हो जाएगा।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत प्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग ने भी कर्मचारियों को बाकायदा चेता दिया है। इस अधिनियम की धारा 28 (क) के मुताबिक चुनाव संचालन में डयूटी पर तैनात किए गए सभी अधिकारी, कर्मचारी और राज्य सरकार द्वारा पदस्थ पुलिस अमला चुनाव नतीजों के ऐलान तक भारत निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्ति पर रहेगा। इसके चलते ये कर्मचारी-अफसर आयोग के नियंत्रण, अधीक्षण और अनुशासन के दायरे में आ गए हैं। अब इनमें से कोई कोताही कर जाए तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई आयोग सीधे कर सकेगा। इस सिलसिले में साफ किया गया है कि चुनाव डयूटी को जिम्मेदाराना तरीके से करना सरकारी कर्मचारी का कानूनी फर्ज है और इसमें कोई अवहेलना उसे सजा का हकदार बना देगी। चुनावी डयूटी में लगे अफसरों और कर्मचारियों को आगाह किया गया है कि वे किसी उम्मीदवार के लिए काम न करने लगें और न ही उसे वोट देने के लिए किसी मतदाता पर अपना प्रभाव जमाएं। उन्हें उम्मीदवारों का चुनाव एजेंट हरगिज नहीं बनना है।
जहाँ तक सारे सरकारी कर्मचारियों की बात है तो उनका चुनाव में पूरी तरह निष्पक्ष रहना जरूरी होगा। उन्हें कोई ऐसा काम नहीं करना है जिससे इस कसौटी पर उनके प्रति जनता का विश्वास टूट जाए या शक के दायरे में आ गए। इस बारे में साफ किया गया है कि कर्मचारी न तो चुनाव प्रचार या अभियान में भाग लें और न ही किसी राजनैतिक दल या उम्मीदवार की कोई मदद करें। उन्हें सचेत रहना है कि सरकार द्वारा उन्हें दिए गए किसी अधिकार और हैसियत का कोई दल या उम्मीदवार फायदा न उठा ले। किसी उम्मीदवार के हक में चुनाव के लिए काम करना मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के प्रावधानों का भी उल्लंघन होगा।
केन्द्र अथवा राज्य के मंत्रियों को लेकर सारे सरकारी कर्मचारियों से कहा गया है कि वे जब कभी जिले में दौरे पर आएं और वहाँ सर्किट हाऊस या रेस्ट हाऊस में ठहरें तो ही सामान्य रूप से हमेशा की तरह उनसे मिलें। यदि वे किसी निजी आवास गृह में ठहरें तो वहाँ उनकी आवाजाही के वक्त किसी अफसर को जाने की जरूरत नहीं है। यदि मंत्री सरकारी काम से किसी अफसर या कर्मचारी को सर्किट हाऊस या रेस्ट हाऊस बुलाएं तो ही जाएं, निजी आवास पर हरगिज नहीं। चुनाव से जुड़े कर्मचारियों पर इस बारे में चुनाव आयोग के निर्देश लागू होंगे।
मंत्री को निजी मकान में गार्ड नहीं
प्रशासन के लिए यह साफ किया गया है कि यदि मंत्री अपने दौरे के मौके पर जिला मुख्यालय पर सर्किट हाऊस में ठहरें तो ही उनके लिए हमेशा की तरह गार्ड लगेगा। पचमढ़ी को भी जिला मुख्यालय माना गया है। यदि मंत्री निजी आवास पर ठहरें या फिर गाँवों के दौरे पर वहाँ रेस्ट हाऊस में ठहरें तो वहाँ गार्ड का इंतजाम नहीं किया जाएगा। इस बारे में साफ किया गया है कि मंत्रियों की खुद की सुरक्षा के लिए उनके साथ बाडीगार्ड रहता ही है। फिर भी, यदि किसी खास वजह से पुलिस अधीक्षक इनकी अतिरिक्त, सुरक्षा जरूरी समझे तो सादे कपड़ों में एक या दो सिपाही लगाए जा सकेंगे। अलबत्ता पुलिस अधीक्षक का यह फैसला भी करना होगा कि इन पुलिस वालों को हथियार के साथ तैनात करना है या नहीं।
निर्देशों में साफ कर दिया गया है कि आयोग के निर्देश के तहत चुनाव की घोषणा की तारीख से इस प्रक्रिया के पूरी होने तक केन्द्र या प्रदेश के कोई भी मंत्री किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में सरकारी दौरा करेंगे ही नहीं।

योगेश शर्मा