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अधिकतम सीमा 10 लाख रुपए हर तीन दिन के अंतराल में पड़ताल

विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे उम्मीदवारों द्वारा अब नाम निर्देशन की तारीख से होने वाले खर्च का हिसाब रखना शुरू हो जाएगा। उम्मीदवार या उसके अधिकृत चुनावी एजेंट को एक तयशुदा पंजी में खर्च के ब्यौरे दर्ज करने होंगे। खर्च की अधिकतम सीमा 10 लाख रुपए होगी। हर तीन दिन के अंतराल पर संबंधित क्षेत्र के अफसर इन खर्चों की पड़ताल करेंगे।
उम्मीदवारों को अपना नाम निर्देशित होने की तारीख से चुनाव नतीजों की घोषणा की तारीख तक के हरदिन सारे चुनावी खर्च का हिसाब-किताब करना है। इन्हें नामजदगी के पर्चे दाखिल करते वक्त बाकायदा पत्र सौंपकर इसकी सूचना दे दी गई है। उम्मीदवारों को तयशुदा प्रारूप में इसके लिए पंजी भी उपलब्ध कराई गई है। यह भी साफ कर दिया गया है कि इस पंजी के अलावा किसी अन्य कागज में यह हिसाब तैयार नहीं होना है। पंजी प्राप्त करने की इनसे रसीद प्राप्त कर ली गई है। चुनावी खर्च के लेखों की निर्धारित समय पर जाँच होगी। खर्च पर नजर रखने का जिम्मा रिटर्निंग अफसर, सहायक रिटर्निंग अफसर, जिला निर्वाचन अधिकारी और चुनाव प्रेक्षक को सौंपा गया है।
लेखों की जाँच के बाद इस पंजी के उपयुक्त हिस्से की दो प्रतियाँ तैयार की जाएंगी। एक प्रति रिटर्निंग अफसर के सूचना पटल पर और एक प्रति मतदान प्रक्रिया खत्म होने पर जिला निर्वाचन अधिकारी को उपलब्ध कराई जाएगी। आखिर में लेखों की एक सत्य प्रतिलिपि नतीजे घोषणा की तारीख से 30 दिन के भीतर पुन: जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल करना होगी। खर्च को लेकर उम्मीदवारों को एक निर्धारित प्रपत्र में शपथ पत्र भी प्रस्तुत करना है।

योगेश शर्मा