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खर्च उम्मीदवार के खाते में बगैर अधिकृत छपाई पर मुकदमा

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी उम्मीदवार की सहमति या जानकारी से अखबारों में छापे जाने वाले विज्ञापन के खर्च को उसके खाते में जोड़ा जाएगा। इसी तरह उम्मीदवार के अधिकृत किए बगैर इन्हें छापने तो प्रकाशक पर मुकदमा किया जाएगा। यह कार्रवाई पैम्फलेट, पोस्टरों की छपाई के लिए भी लागू होगी।
आयोग के ध्यान में यह लाया गया है कि प्रिंट मीडिया में प्रकाशित करवाए जाने वाले कुछ विज्ञापन या तो किसी अधिकृत व्यक्ति या कोई संगठन के नाम से दिए जाते हैं। इस सिलसिले में आयोग ने प्रिंट मीडिया और खासकर अखबारों में किसी राजनैतिक दलों विशेष या उम्मीदवार के पक्ष में अथवा इनके खिलाफ चुनाव के दौरान विज्ञापन प्रकाशन को लेकर जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं।
निर्देश के मुताबिक ऐसे विज्ञापनों के मामले में जिनके स्रोत मालूम हैं उनमें यह देखना होगा कि विज्ञापन यदि उम्मीदवार की सहमति या जानकारी से छापा गया है तो इसका खर्च अधिकृत मानकर उसके चुनाव खाते में जोड़ा जाएगा। इसी तरह यदि विज्ञापन किसी उम्मीदवार द्वारा अधिकृत रूप से नहीं दिया गया है तो फिर इसके छापे जाने पर संबंधित प्रकाशक के विरूध्द भारतीय दंड संहिता की धारा 171 एच के उल्लंघन को लेकर मुकदमा चलाया जाएगा। इसी तरह यदि प्रकाशक की पहचान का विज्ञापन में उल्लेख नहीं है तो संबंधित अफसर उस अखबार से संपर्क कर इसकी जानकारी हासिल करेंगे। उन्हें इसके लिए उपयुक्त कार्रवाई करने का हक होगा।
सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग अफसरों और चुनाव संचालन से जुड़े अन्य अधिकारियों को आयोग के इस निर्देश पर अमल की हिदायत दी गई है। इस बारे में की जाने वाली कार्रवाई से आयोग को अवगत कराने के लिए कहा गया है।

योगेश शर्मा