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तीन वर्ष के लिए उम्मीदवार अयोग्य घोषित होंगे आयोग की हिदायत

चुनावी खर्च का हिसाब रखने और इसे जाँच के लिए संबंधित अफसर के समक्ष पेश करने में कोताही उम्मीदवार को महंगी पड़ सकती है। इस काम को तयशुदा कानूनी तौर-तरीकों के मुताबिक नहीं करने की सूरत में आयोग उम्मीदवार को तीन वर्षों के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर सकेगा। इस बारे में जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
जहाँ तक कानूनी प्रावधान का सवाल है तो कोई उम्मीदवार यदि गंभीरता से चुनाव न लड़कर प्रतिभूति राशि करने के बाद सिर्फ नाम मात्र का चुनावी खर्च तो भी उसे कानूनन इसका लेखा प्रस्तुत करना होगा। एक से ज्यादा क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की सूरत में उम्मीदवार को प्रत्येक क्षेत्र का अलग चुनाव खर्च लेखों में दिखाना होगा।
एक और प्रावधान यह स्पष्ट किया गया है कि उम्मीदवार के खाते में वो सभी खर्च भी जुड़ेंगे जो उसके स्वयं, प्राधिकृत, उससे संबंधित राजनैतिक दल, अन्य कोई संघ, निकाय या अन्य किसी व्यक्ति द्वारा उसके लिए किए गए हैं। एक बात और साफ की गई है कि यदि कोई व्यक्ति उम्मीदवार के लिए बगैर उसके प्राधिकृत किए दस रुपए से कम खर्च करे तो उसके द्वारा संबंधित उम्मीदवार से दस दिन के भीतर लिखित अनुमोदन लेने पर यह माना जाएगा कि उसने ये खर्च संबंधित उम्मीदवार के प्राधिकार से किए हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग अफसर या प्रेक्षक जिस समय निरीक्षण के उद्देश्य से खर्च के हिसाब के लिए रजिस्टर या दस्तावेज देखना चाहें तो उन्हें ये उपलब्ध कराना जरूरी होगा। ऐसा नहीं करने के चलते प्रतिदिन का हिसाब संधारण नहीं करने का उस उम्मीदवार को दोषी पाया जाएगा। उसे भारतीय दंड विधान संहिता की धारा 171-1 के तहत सजा मिल सकेगी।
उम्मीदवारों से कहा गया है कि वे खर्चों संबंधी सभी व्हाउचर, बिल, रसीद, अभिस्वीकृतियाँ आदि हर वक्त कालानुक्रम में रजिस्टर में व्यवस्थित रखें। उम्मीदवार को अपने द्वारा इस सिलसिले में पेश किए जाने वाले शपथ पत्र में यह उल्लेख भी करना है कि सूचीबध्द मदों पर सारे खर्च का पूरा ब्यौरा बगैर किसी अपवाद के लेखे में शामिल किया गया है और इसमें कुछ भी छिपाया नहीं गया है।
खर्च का हिसाब रखने की कानूनी अपेक्षा में असफल होने पर उम्मीदवार को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 10-क के तहत चुनाव आयोग द्वारा तीन वर्ष के लिए चुनाव लड़ने अयोग्य कर दिया जाएगा।

योगेश शर्मा