| اردو خبریں | संस्कृत समाचारः मुख्य पृष्ठ | संपर्क करें | साईट मेप
You Tube
डमी उम्मीदवार की आड़ में नहीं छिपेगा खर्च होगी वीडियो ट्रैकिंग चुनाव खातों की गहरी पड़ताल

विधानसभा चुनाव में प्रमुख उम्मीदवार के पक्ष में काम करने वाले डमी निर्दलीय उम्मीदवारों पर इस बार पैनी नज़र रखी जाएगी। इनकी आड़ में वास्तविक उम्मीदवार अपने चुनावी खर्च की सीमा नहीं लांघ सकेंगे। इन उम्मीदवारों के वास्तविक चुनावी खर्च का हिसाब जानने के मकसद से बाकायदा डमी निर्दलीय उम्मीदवार की वीडियो ट्रैकिंग और इनके चुनाव खातों की गहरी पड़ताल की जाएगी। चुनाव आयोग ने इस सिलसिले में सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग अफसरों को गत दिवस निर्देश दिए है।
चुनाव आयोग को यह सूचना मिली है कि कुछ स्थानों पर चुनाव लड़ रहे कुछ निर्दलीय उम्मीदवार चुपचाप प्रचार कर प्रमुख उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटाते हैं। ऐसे निर्दलीय उम्मीदवारों का यह रवैया दूसरे उम्मीदवारों के लिए खर्च की अधिकतम सीमा से बचने की चालाकी माना गया है। इस तथ्य पर गौर कर आयोग ने ऐसे मामलों के लिए विशेष दिशा निर्देश जारी किए हैं।
निर्देश के मुताबिक ऐसी शिकायत मिलने की सूरत में कि कोई निर्दलीय वास्तव में किसी दूसरे उम्मीदवार का डमी बना हुआ है, जिला निर्वाचन अधिकारी और रिटर्निंग अफसर बाकायदा इस बारे में जानकारी इकट्ठा करेंगे। इस बारे में लगाए गए आरोपों को प्रेक्षकों की जानकारी में लाएंगे ताकि वे भी इस पर बारीकी से नज़र रख सकें। प्रथम दृष्टया सबूत मिलने पर जिला निर्वाचन अधिकारी और रिटर्निंग अफसर निर्दलीय उम्मीदवार द्वारा किए जा रहे प्रचार की पड़ताल करेंगे और यह काम वीडियो के जरिए किया जाएगा। इसका आदेश दिये जाने पर संबंधित वीडियो कैमरामेन लगातार पीछा कर इस उम्मीदवार की हर गतिविधि को जहाँ कहीं वह प्रचार के लिए जाए कैमरे में रिकार्ड करेगा।
इसके बाद तात्कालिक समीक्षा कर अफसर इस उम्मीदवार को प्रचार के लिए अनुमति प्रदान की गई गाड़ियों की संख्या जानेंगे। यह स्थापित होने पर कि यह उम्मीदवार प्रतिनिधि (प्रॉक्सी) के रूप में प्रचार कर रहा है, अनुमति दी गई गाड़ियों की पड़ताल की जाएगी और जरूरत पड़ने पर प्रचार करने वाली गाड़ियों की अनुमति वापस लेने के आदेश पारित किए जाएंगे।
जब निर्दलीय उम्मीदवार अपने चुनावी खर्च का हिसाब पेश करेगा तो इसकी प्रेक्षक मुकम्मल जाँच करेंगे। ऐसे उम्मीदवार को पोस्टरों, पर्चों आदि की छपाई के सारे प्रमाण देने को कहा जाएगा। प्रेक्षक मुद्रित सामग्री आदि की स्थानीय अधिकारी के साथ जाँच कर यह पता लगाएंगे कि प्रचार सामग्री जिसके छापे जाने का दावा किया गया है क्या वह वास्तव में छपाई गई है।
आयोग ने यह भी बताया है कि भारतीय दंड विधान की धारा 171 एच के तहत यह कानूनी प्रावधान है कि जो कोई व्यक्ति उम्मीदवार के लिखित में सामान्य या विशेष तौर पर अनुमति दिए बगैर किसी आमसभा के आयोजन, विज्ञापन, परिपत्र के प्रकाशन या फिर उम्मीदवार के चुनाव के लिए प्रोत्साहन आदि पर खर्च करता या कराता है तो उस पर 500 रुपए का जुर्माना किया जा सकेगा। यदि ऐसा कोई व्यक्ति दस रुपए से ज्यादा के ऐसे खर्च उम्मीदवार की अनुमति लिए बगैर कर ले और फिर खर्च की तारीख से 10 दिन के भीतर लिखित में संबंधित उम्मीदवार का अनुमोदन ले ले तो इसे उम्मीदवार द्वारा अधिकृत खर्च माना जाएगा।
ऐसे मामले जिनमें किसी उम्मीदवार द्वारा दूसरे उम्मीदवार के हित में खर्च किया जा रहा है उनमें उचित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
योगेश शर्मा