Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
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मॉक पोल और प्रमाण पत्र अनिवार्य आयोग की पारदर्शी कार्रवाई

चुनाव आयोग ने निर्वाचन प्रक्रिया की पवित्रता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के मकसद से इस काम को उच्चतम महत्व दिया है। इस सिलसिले में मॉक पोल कराए जाने और उस दौरान उम्मीदवारों के चुनाव एजेंटों की मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा ।गया है। मॉक पोल का प्रमाण पत्र भी देना जरूरी होगा।
चुनाव आयोग का मानना है कि चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों द्वारा नियुक्त उनके एजेंट की चुनाव के दौरान मौजूदगी पारदर्शिता का बेहतर उपाय है। उसका यह भी कहना है कि उम्मीदवारों में से किसी एक के एजेंट की मौजूदगी और दूसरे उम्मीदवारों के एजेंटों की इस मौके पर गैर मौजूदगी से शिकायत का मौका मिलता है।
आयोग इस सिलसिले में खास हिदायतें चुनाव से जुड़े अफसरों को दी हैं। इसके मुताबिक उम्मीदवारों द्वारा नियुक्त चुनाव एजेंटों का उनकी तैनाती के पोलिंग स्टेशन का मतदाता होना जरूरी होगा, इस पर सख्ती से अमल होना है। उम्मीदवारों को रिटर्निंग अफसरों द्वारा यह सलाह दी जाना है कि उनके एजेंट मतदान शुरू होने के पर्याप्त समय पूर्व मतदान केन्द्र पहुँच जाएं ताकि मतदान के पूर्व की औपचारिकताएं जैसे उन्हें प्रवेश पत्र का जारी होना, मॉक पोल (कृत्रिम मतदान) का संचालन आदि काम समय पर हो जाएं।
मॉक पोल का संचालन मौजूदा निर्देशों के तहत प्रिजाइडिंग अफसर करेंगे। यह काम सारे उम्मीदवारों के चुनाव एजेंटों की मौजूदगी में होगा और अफसरों को एक तयशुदा प्रारूप में मॉक पोल सर्टिफिकेट तैयार कर उस पर दस्तखत करना होंगे। उन्हें इस सर्टिफिकेट में चुनाव एजेंटों के नाम और उन उम्मीदवारों के नाम भी दर्शाना होंगे जिनका वे प्रतिनिधित्व कर रहे हैं तथा इनके दस्तखत भी लेना होंगे।
मॉक पोल सामान्यत: वास्तविक मतदान शुरू होने के 30 मिनट पहले किया जाएगा। लेकिन उस सूरत में जबकि वहाँ भिन्न उम्मीदवारों के दो एजेंट भी मौजूद न हों तो प्रिजाइडिंग अफसर और 10 मिनट का इंतजार कर सकेंगे। यदि इसके बाद भी एजेंट वहाँ नहीं पहुँचें तो फिर प्रिजाइडिंग अफसर मॉक पोल करेंगे। मॉक पोल इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन की काम करने की स्थिति की जाँच के लिए किया जाएगा और इसका उल्लेख अफसरों को उपयुक्त तौर पर सर्टिफिकेट में करना होगा।
रिटर्निंग अफसर सेक्टर अफसरों के जरिए संचार साधनों का इस्तेमाल कर पोलिंग स्टेशन और मोबाइल टीमों से संपर्क में रह कर मॉक पोल और इसके होने का पता लगाएंगे। यह कार्रवाई 30 मिनट में उन्हें करना होगा। मॉक पोल की पुष्टि नहीं की जाना प्रिजाइडिंग अफसर या ईवीएम की किसी समस्या को इंगित करेगा, इसलिए रिटर्निंग अफसर तत्काल वहाँ हस्तक्षेप कर उस समस्या का पता लगाएंगे।
ऐसे पोलिंग स्टेशन जहाँ मान्यता प्राप्त दलों के प्रतिस्पर्धी उम्मीदवारों की मौजूदगी नहीं है और जहाँ मॉक पोल की कार्रवाई चुनाव एजेंटों की गैर मौजूदगी में कराना पड़ा वहाँ प्रशासकीय चुनाव तंत्र को ध्यान केन्द्रित करना होगा। ऐसे मौके पर हस्तक्षेप कर वहाँ सुरक्षित माईक्रो आब्जर्वरों, वीडियो कैमरे की तैनाती जरूरी होगी। इसी तरह वहाँ पर सेक्टर अफसरों और अन्य वरिष्ठ अफसरों को बार-बार दौरा करना होगा।
प्रिजाइंडिंग अफसरों से ऐसे पोलिंग स्टेशनों जहाँ मॉक पोल के आधार पर मतदान पूरा हुआ है उनके बारे में सर्टिफिकेट मिलने पर रिटर्निंग अफसर ऐसे पोलिंग स्टेशनों की सूची तैयार करेंगे जहाँ मॉक पोल एजेंटों की गैर मौजूदगी में हुआ है या जहाँ मॉक पोल के वक्त एक से ज्यादा मान्यता प्राप्त दलों के प्रतिस्पर्धी उम्मीदवारों के एजेंट मौजूद न हों। उन्हें समुचित परीक्षण के लिए दस्तावेजों पर भी खास ध्यान देना होगा जो इन पोलिंग स्टेशनों से प्राप्त किए जाएं। प्रेक्षकों को भी इस पहलू पर ध्यान देना है।
योगेश शर्मा