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पिछले चुनाव से 999 ज्यादा
बड़े दलों के भी नहीं बचे
सर्वाधिक 1386 निर्दलीय

मध्यप्रदेश की 13वीं विधानसभा के चुनाव में ऐसे उम्मीदवारों की कुल तादाद दो हजार 654 निकली है जो अपनी जमानत भी नहीं बचा सके। वर्ष 2003 के चुनाव से ही इनकी तुलना करें तो इस तादाद में 999 का इजाफा हुआ है। बड़े दल के कई उम्मीदवार भी जमानत खोने से खुद को मेहफूज नहीं रख सके हैं।
विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारी का हक हासिल करने वाले हर एक व्यक्ति को नामजदगी के वक्त ही ज़मानत राशि भी जमा करनी होती है। अनुसूचित जाति और जनजाति के उम्मीदवारों के लिए 2500 रुपए और सामान्य तबकों के उम्मीदवारों के लिए यह रकम 5000 रुपए मुकर्रर है। अगर कोई उम्मीदवार चुनाव हार जाने के बाद भी अपने निर्वाचन क्षेत्र में पड़े कुल वैध मतों के 16.66 प्रतिशत मत भी हासिल कर ले तो ज़मानत की यह रकम तो उसे वापस मिल ही जाती है।
इस बार के विधानसभा चुनाव में 1400 उम्मीदवारों की सबसे बड़ी तादाद निर्दलियों की ही थी, लेकिन इनमें से 1386 उम्मीदवार आखिरकार ज़मानत भी नहीं बचा सके। हालांकि 3 निर्दलियों ने चुनाव भी जीता और 11 ने हार के बावजूद ज़मानत बचाई। जहाँ तक बड़े दलों की बात है तो समाजवादी पार्टी के कुल 187 उम्मीदवारों में से 183 ने ज़मानत खोई लेकिन 3 ने बचाई भी और उसका सिर्फ एक उम्मीदवार ही चुनाव जीत सका।
बहुजन समाज पार्टी की स्थिति इससे बेहतर थी जबकि उसके कुल 228 उम्मीदवारों में से 182 की ज़मानत जरूर जप्त हुई लेकिन 39 उम्मीदवार इसे बचाने में सफल रहे। यही नहीं, उसकी झोली में जीत की 7 सीटें भी आईं। भारतीय जनशक्ति पार्टी भी इस बात को लेकर बसपा के लगभग समकक्ष ही रही जबकि उसके कुल 201 उम्मीदवारों में से अलबत्ता 184 की ज़मानत जप्त हुई लेकिन 12 उम्मीदवार इसे बचा जाने में कामयाब हुए। इस दल के 5 उम्मीदवारों ने फतह हासिल भी की।
प्रमुख दलों के बतौर भारतीय जनता पार्टी और इंडियन नेशनल कांग्रेस के भी कई उम्मीदवार ज़मानत नहीं बचा सके। भाजपा के कुल 228 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था और जीत को लेकर अव्वल रहे इस दल के 143 उम्मीदवार विधायक भी चुन लिए गए। लेकिन इसके बाद भी 7 उम्मीदवारों की ज़मानत जप्त हो गई। अलबत्ता, 79 उम्मीदवार हार जाने के बावजूद ज़मानत बचा गए। इनेकां का जहाँ तक सवाल है तो उसके भी कुल 228 उम्मीदवारों में से 20 ने ज़मानत से हाथ धोए लेकिन 136 उम्मीदवार हार कर भी ज़मानत खोने से बच गए। इस दल के 71 उम्मीदवार मोर्चा जीतने में कामयाब रहे।
अन्य दलों की हालत अमूमन निर्दलीयों जैसी थी जबकि ऐसे कुल 707 उम्मीदवारों में से 692 ने ज़मानत खोई और सिर्फ 15 इसे बचा पाए। जीत तो इनके खाते में दर्ज हुई ही नहीं।

योगेश शर्मा