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नहीं होगी काम में लगे कर्मचारियों की बदली
पर्याप्त स्टॉफ का इंतजाम होगा
गलत लोग भी नहीं हों तैनात
चुनाव आयोग के निर्देश

भारत निर्वाचन आयोग ने आगामी लोकसभा आम चुनाव के मद्देनज़र किए जा रहे फोटो वोटर लिस्टों के पुनरीक्षण संबंधी काम को पूरी तवज्जो और अहमियत दी है। उसने इस काम से जुड़े कर्मचारियों के तबादले और पोस्ंटिग पर रोक लगा दी है तथा यह साफ कर दिया है कि इसके लिए पर्याप्त स्टॉफ का इंतजाम सुनिश्चित हो जाए। संबंधित कर्मचारियों के खाली पदों को भरने के लिए कहा गया है। इसी तरह आयोग ने चुनाव और मतदाता सूची संशोधन के काम में गलत लोग तैनात नहीं किये जाने की हिदायत भी दी है। मुख्य सचिव को इस सिलसिले में बाकायदा निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में एक जनवरी 2009 को अर्हता तिथि मान कर फोटो मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का काम शुरू हो चुका है। चुनाव आयोग इन मतदाता सूचियों में अब किसी खामी का पक्षधर नहीं है और इस काम को तयशुदा तारीखों में पूरा किए जाने पर अडिग है। आयोग सिध्दांत: हर साल मतदाता सूचियों में संशोधन का आदेश देता है। हर आम चुनाव और उप चुनाव के पहले तो इस काम की खासी अहमियत हो जाती है। इसीलिए आयोग का प्रमुख उद्देश्य यह है कि संशोधन के जरिए एक सही और त्रुटि रहित मतदाता सूची तैयार हो जाए। इस काम को उसने मतदाताओं, राजनैतिक दलों, ग्रामीण और शहरी निकायों, स्वयंसेवी संगठनों की मदद और इस काम में इन्हें बाकायदा जोड़कर अंजाम देने पर जोर दिया है। अयोग ने अपने ये इरादे ताजा निर्देशों में साफ कर दिए हैं।
चुनाव आयोग ने इन तथ्यों की रोशनी में मतदाता सूची संशोधन और तैयारी की इस कार्रवाई के चलते इस काम से जुड़े किसी भी अफसर और कर्मचारी के तबादले पर रोक लगा दी है। उसने साफ किया है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के तहत यह अमला उसके पास प्रतिनियुक्ति पर तैनात माना जाएगा और उसके नियंत्रण, पर्यवेक्षण और अनुशासन में काम करेगा। तबादलों और पदस्थापनाओं पर यह प्रतिबंध मतदाता सूचियों में किए जा रहे संशोधन और तैयारी पूरी होने तक जारी रहेगा। आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि चुनाव कार्य और मतदाता सूची संशोधन के काम में ऐसे अफसर और कर्मचारी हरगिज तैनात नहीं किए जाएं जिनके खिलाफ खुद उसने किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है या फिर और वो भी जिनके खिलाफ किसी अदालत में आपराधिक मामला लंबित हो।
आयोग का साफ मानना है कि मतदाता सूचियों में संशोधन के काम से जुड़े कर्मचारियों का तबादला इस प्रक्रिया और इसकी गुणवत्ता पर बुरा असर डालता है। इस पूरी प्रक्रिया का बहुत कसा हुआ कार्यक्रम है और उसमें अत्यधिक काम पूरा किया जाना है। लिहाजा इसमें बहुत सूक्ष्म और सतर्कतापूर्ण योजना, व्यावसायिक प्रबंधन, पैनी नजर और समीक्षा की जरूरत होती है। आयोग ने कानूनी प्रावधानों के तहत यह दोहराया है कि तबादलों और पदस्थापना पर उसके प्रतिबंध की ज़द में अन्य संबंधित कर्मचारियों के साथ ही जिला निर्वाचन अधिकारी, मतदान पंजीयन अधिकारी और सहायक मतदाता पंजीयन अधिकारी भी शामिल रहेंगे। इनका मौजूदा पदस्थापना स्थल से तबादला आयोग की बगैर पूर्व सहमति के नहीं होगा। अलबत्ता, यह भी कहा गया है कि अगर इनमें से किसी महत्वपूर्ण अफसर का तबादला बिल्कुल जरूरी हो जाए या उनकी पदोन्नति के चलते बदली जरूरी हो तो ऐसे प्रत्येक मामले में उसकी पूर्व सहमति आयोग से लेनी होगी। आयोग ऐसे प्रत्येक प्रकरण में गुण-दोष के आधार पर विचार करेगा। इसके प्रस्ताव उसे पूरे औचित्य के साथ भेजे जा सकेंगे। लेकिन बूथ लेवल अफसरों (बीएलओ) के ऐसे मामलों में उसकी ओर से मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा फैसला किया जाएगा।

 
योगेश शर्मा