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वल्नरेबिलिटी मैपिंग जल्द शुरू
कम्यूनिकेशन प्लान अभी से होगा मजबूत
मतदान केन्द्रों का लेंगे जायजा
कार्रवाई हुई तेज

भारत की लोकसभा के लिए होने वाले आगामी आम चुनाव की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। पहले पड़ाव पर वोटर लिस्टों में संशोधन का कामकाज आगे बढ़ रहा है। चुनाव आयोग के ताज़ा निर्देशों पर गौर करें तो वल्नरेबिलिटी मैपिंग का काम जल्द शुरू कर देने पर जोर दिया गया है और कम्यूनिकेशन प्लान को और मजबूत तथा सघन करने की मंशा जता दी गई है। इसी कड़ी में मौजूदा मतदान केन्द्रों का नये सिरे से जायजा लेने को कहा गया है। इस सबके मद्देनज़र कार्रवाई अब तेज होने जा रही है।
देश की लोकसभा के आम चुनाव की अहमियत के मद्देनज़र चुनाव आयोग इस काम में पूरी मुस्तैदी और चुस्ती के साथ पर्याप्त समय पहले सारी चीजें पुख्ता कर लेने का पक्षधर है। 18 दिसंबर को दिल्ली में संपन्न हुई विभिन्न राज्यों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ तीन दिनी बैठक के केन्द्र में उन सारे बिन्दुओं पर तफसील से चर्चा हुई जो इस मकसद को कामयाबी का जामा पहनाने के लिए जरूरी थे। मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री जे.एस. माथुर ने इस बैठक में भाग लिया और बल्कि वहाँ कम्यूनिकेशन प्लान पर अपना प्रेजेंटेशन भी पेश किया।
आयोग ने वल्नरेबिलिटी मैपिंग पर अभी से कवायद जरूरी बताई है, उसका मानना है कि इसके जरिए क्रिटिकल मतदान केन्द्रों और समूहों की सूची तैयार करने में भी मदद मिल जाएगी। जहाँ तक पहले से वजूद में रही वल्नरेबिलिटी का सवाल है तो इसकी पड़ताल के केन्द्र में ज़ात, समुदाय, आर्थिक और सामाजिक आधार पर मतदाताओं को धमकाने या उन पर दबाव बनाने की नापाक कोशिश करने वाले शामिल रहेंगे। इसलिए गाँव, मज़रे, टोलों वाले ऐसे मतदाताओं के क्षेत्रों की पहले से छानबीन करने को कहा गया है जिन पर जातिगत या राजनैतिक प्रभुत्व के जरिए दबाव बनाया जा सकता है। इस दिशा में अग्रिम कार्रवाई से पहचान की प्रक्रिया में इसे बुनियादी प्रतिमान के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। आयोग का कहना है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के मकसद से यह बेहतर होगा कि वल्नरेबल गाँवों और ऐसे अन्य क्षेत्रों में ही मतदान केन्द्र कायम किए जाएं।
कम्यूनिकेशन प्लान का तो सीईओ श्री माथुर ने बैठक में प्रेजेंटेशन ही दिया। असल में चुनाव प्रबंधन को लेकर कई रूप में इस प्लान से मदद मिली है। अब आयोग इसे और प्रभावी और सघन बनाने के लिए अपने कम्प्यूटर डिवीजन पर इसका प्रारूप तैयार करा रहा है जो जल्द सभी राज्यों के मिल जाएगा। आयोग ने साफ किया है कि हालाँकि प्रिजाइडिंग अफसरों और माइक्रो आब्जर्वरों के नाम का खुलासा आखिरी लम्हों में ही होगा लेकिन उस सूरत में भी कम्यूनिकेशन प्लान की अग्रिम तैयारी जरूरी है। इसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक मतदान केन्द्र संचार सुविधा के किसी भी माध्यम से यानि सेलफोन या लेंडलाईन फोन से जुड़ जाए। इस प्लान को सुरक्षा उपायों में भी प्रमुखत: शुमार किया गया है।
आयोग ने बैठक में यह भी जता दिया है कि सारे मतदान केन्द्रों का भौतिक रूप से जायजा लिया जाना अत्यंत जरूरी है। संबंधित जगहों के परिसरों या मोहल्लों में यदि अच्छे भवन उपलब्ध हों तो जिला निर्वाचन अधिकारियों से इनके प्रस्ताव लेने के अग्रिम उपाय किए जाएं। फिर मतदान के दिन चुनाव के बेहतर प्रबंधन के लिए आयोग से इन केन्द्रों का अनुमोदन भी ले लिया जाए। यह कार्रवाई 20 जनवरी तक पूरी करने को कहा गया है।

योगेश शर्मा