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रखा जाएगा नेताओं की हर 'लैंडिंग' का हिसाब चुनाव अफसरों को ताकीद

उम्मीदवारों के चुनावी खर्च को लेकर आयोग का रूख साफ है कि इसका पूरा हिसाब सामने आना जरूरी है। उम्मीदवार और उसके दल के खर्च में गफलत की स्थिति न बने इसके लिए इस काम से जुड़े जिला निर्वाचन अधिकारियों से कहा गया है कि वे अपने क्षेत्र में चुनाव प्रचार के लिए हेलीकॉप्टर या अन्य किसी भी वायुयान से होने वाली नेताओं की हर लैंडिंग (उतरने) का पूरा लेखाजोखा करें।
गुजरे वक्त में आयोग ने यह गौर किया है कि उम्मीदवारों का झुकाव उनके हक में दल के स्टॉर प्रचारकों द्वारा किए गए चुनाव प्रचार दौरों पर हुए खर्च से बचने का रहता है। इसी तरह कुछ मामलों में इन प्रचारकों को धारा 77(1) के तहत छूट का लाभ नहीं मिलता है। कुछ अवसरों पर यह भी देखा गया है कि राजनैतिक दल इस संबंध में वाजिब सूचना समय पर नहीं दे पाते हैं और अधिकारियों के पास यह देरी से पहुँचती है।
इसी तथ्य की रोशनी में आयोग ने यह तय किया है कि हर जिला निर्वाचन अधिकारी अब से निर्वाचन क्षेत्रवार अपने अधीन सभी निर्वाचन क्षेत्रों के बारे में ये सूचनाएं और आंकड़े तैयार करेंगे कि वहाँ विभिन्न स्थानों पर चुनाव प्रचार के लिए राजनैतिक नेता ओर उम्मीदवार हेलीकॉप्टर या अन्य वायुयान से कब-कब उतरे। यही लेखाजोखा रिटर्निंग अफसर भी अपने क्षेत्र में करेंगे। इस जानकारी को बाकायदा तय किए गए प्रारूप में इकट्ठा कर संबंधित चुनाव प्रेक्षकों को दिन प्रतिदिन जुटाया जाएगा।
चुनाव आयोग ने साफ किया है कि इस सिलसिले में उसके द्वारा स्थापित शर्तें और उच्चतम न्यायालय के निर्णय में दिए गए कथन का आशय चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के उनके हक में प्रचार को लेकर सारे खर्चों का हिसाब-किताब रखा जाना है। उच्चतम न्यायालय द्वारा पूर्व में एक लिखित याचिका के संबंध में दिए गए फैसले में यह उल्लेख है कि उम्मीदवार का चुनाव संबंधी खर्च जो कि स्वयं उम्मीदवार या उसके अधिकृत चुनाव एजेंट की जानकारी में हो उसे इन दोनों में से किसी के द्वारा अधिकृत किया गया खर्च माना जाएगा। इसें वह खर्च भी शामिल रहेगा जिसके लिए उम्मीदवार लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 77 की व्याख्या एक के तहत संरक्षण चाहे। हालांकि उम्मीदवार को कानूनन यह स्वतंत्रता होगी कि वे विपरीत तर्क पेश कर यह दिखा सके कि खर्च का कोई हिस्सा या वह पूरा वास्तव में उम्मीदवार और उसके एजेंट के अथवा उनसे संबंधित दल या अन्य संस्था, व्यक्तियों के समूह या व्यक्ति द्वारा किया गया था।
इसी स्थिति में उसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के उक्त प्रावधान का लाभ लेने की पात्रता होगी। इसमें उम्मीदवार द्वारा और यहाँ तक कि प्रचारकों द्वारा भी चुनावी खर्च का उपयुक्त हिसाब-किताब रखा जाना जरूरी है।

योगेश शर्मा