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हालात से निपटने की तैयारी पुख्ता हो नाकामी पड़ सकती है भारी आयोग की अफसरों को ताकीद

चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि बूथ कैप्चरिंग और चुनाव अपराध से जुड़ी दुराचरण की कोई भी घटना पर उसका रूख गंभीर होगा। पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को ताकीद की गई है कि इन घटनाओं के पूर्वानुमान और इनसे निपटने की तैयारी में कोई कसर न रह जाए। किसी भी स्तर पर उनकी नाकामी या चूक गंभीर नतीजों की वजह बन जाएगी।
आयोग ने कहा है कि चुनाव संचालन से जुड़े अफसरों को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव को लेकर हर जरूरी इंतजाम सुनिश्चित कर लेना चाहिए। इन इंतजामों के दायरे में मतदान के दिन संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के साथ ही मतदान केन्द्रों पर कानून और व्यवस्था बनाएं रखना भी शुमार होगा। चूँकि संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्रों और अन्य ऐसे इलाकों की पहचान हो चुकी है लिहाजा इन पर खास ध्यान देने के पुख्ता बंदोबस्त हो जाएं और वहाँ स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव को प्रभावित कर सकने वाली किसी स्थिति से निपटने का उपयुक्त उपाय अभी से कर लिया जाए। आयोग ने साफ किया है कि किसी भी मतदान केन्द्र पर बूथ कैप्चरिंग, अनियमितता या अन्य दुराचरण संबंधी कोई घटना होती है तो इसे आयोग गंभीरता से लेगा।
उसका मानना है कि ये घटनाएं चुनाव की पवित्रता को तो नष्ट करती ही हैं, मतदान कर्मियों के साथ पुलिस अफसरों पर भी बुरा प्रभाव छोड़कर बदनामी का कारण बनती है। आयोग यह भी मानता है कि ऐसी घटनाएं हो जाने का कारण इनके पूर्वानुमान में चूक और इससे निपटने में विफलता हो सकता है।
आयोग ने कहा है कि बूथ कैप्चरिंग अब लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 135 ए के तहत एक खास अपराध और धारा 123(8) के तहत भ्रष्ट आचरण भी है। बूथ कैप्चरिंग के किसी भी मामले में आयोग ने कहा है कि प्रिजाइडिंग अफसर को इसकी तत्काल सीधे रिटर्निंग अफसर को या सेक्टर मजिस्ट्रेट आदि के जरिए रिपोर्ट करना जरूरी होगा। इसी तरह पुलिस अफसर जो मतदान केन्द्रों पर तैनात होकर ऐसी घटनाओं को टालने के लिए जिम्मेदार हैं उन्हें भी ऐसा हो जाने पर अपने वरिष्ठ अफसरों और रिटर्निंग अफसरों को तत्काल इत्तेला करनी होगी। पुलिस अफसरों से यह भी कहा गया है कि वे घटना की तत्काल और चुस्ती से एफआईआर दर्ज करें। आयोग ने साफ कर दिया है कि चुनाव अधिकारी या जाँच अधिकारी की तरफ से इस बारे में होने वाली अकर्मण्यता को वह गंभीरता से लेगा। उसने यह भी याद दिलाया है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत राज्य शासन द्वारा चुनाव डयूटी में लगाए गए अफसर और पुलिस अफसर चुनाव परिणाम आने तक उसके अधीन प्रतिनियुक्ति पर हैं। इसके चलते ये कर्मचारी उसके नियंत्रण, देखरेख और अनुशासन में रहेंगे।
घटनाओं और अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट बुलाई
चुनाव आयोग ने ऐसे सभी आपराधिक मामलों का ब्यौरा मांगा है जो आम चुनावों के दौरान दर्ज हुए हैं। उसने चुनाव से जुड़े अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के मामलों की भी जानकारी चाही है। उसने कहा है कि चुनाव संबंधी अपराधों में अभियोजन और दोषी अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू होने की आखरी तारीख और चुनाव पूर्ण होने की तारीख के एक महीने की अवधि पर इस जानकारी को आधारित करना है। उसने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी दफ्तर से सीधे तौर विभिन्न प्राप्त शिकायतों पर हुई जाँच और उसके द्वारा आयोग को इस सिलसिले में प्रेषित किए गए प्रकरणों के बारे में जानकारी भी इसी तयशुदा अवधि के तहत तैयार करने को कहा है।
कार्ययोजना के तहत काम शुरू
आयोग के इस निर्देश के परिप्रेक्ष्य में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी दफ्तर ने एक उपयुक्त कार्ययोजना के तहत इन मामलों की समीक्षा शुरू कर दी है। आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि राज्य शासन उपरोक्त ऐसे किसी मामले को वापस लेने की कोई कार्रवाई बगैर उसकी पूर्व सहमति के न करे।

योगेश शर्मा