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कार्रवाई के निर्देश जारी

मध्यप्रदेश में 27 नवंबर को विधानसभा चुनाव के लिए होने जा रहे मतदान में किसी भी किस्म की कोताही आम लोग हों या सरकारी कर्मचारी दोनों को ही जबरदस्त महंगा पड़ेगी। जहाँ तक बूथ कैप्चरिंग (मतदान केन्द्र पर कब्जा) के अपराध की बात है तो ऐसा करने वाले आम अपराधी को एक से तीन वर्ष और सरकारी कर्मचारी द्वारा यह कृत्य करने पर उसे तीन से पाँच साल तक के कारावास की सजा भुगतनी पड़ जाएगी। इन दोनों को ही जुर्माना तो अलग से ही देना होगा। सारे जिला कलेक्टरों, पुलिस अफसरों और रिटर्निंग अफसरों को इस बारे में चेता कर ऐसी घटना होने की सूरत में तत्काल मामले दर्ज कर कानूनी कार्रवाई अंजाम देने के निर्देश दिए गए हैं।
बूथ पर कब्जे में वो सारे अपराध शामिल होंगे जो कानूनी तौर पर इसके विभिन्न कृत्यों को लेकर उल्लेखित हैं। इसके मुताबिक किसी व्यक्ति या इसके समूह द्वारा मतदान केन्द्र या मतदान के तयशुदा स्थान को कब्जे में लेना, मतदान अधिकारियों से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें अपने सुपुर्द करवाना भी शामिल है। कोई भी व्यक्ति या उनका समूह यदि किसी मतदाता पर यह दवाब बनाते हैं कि वह उनके द्वारा बताए जा रहे उम्मीदवार को ही वोट दे या फिर उन मतदाताओं को अपनी पंसद और स्वतंत्रता से किसी उम्मीदवार को वोट देने से रोके तो इसे भी आपराधिक कृत्य माना जाएगा। इन अफसरों और कर्मचारियों के लिए भी बूथ पर कब्जे का अपराध दर्ज होगा।
इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति सीधे तौर पर या अप्रत्यक्षत: जोर-जुल्म या जबरदस्ती करके, मजबूर करके या धमकी देकर किसी मतदाता को वोट डालने जाने से रोके तो इस कृत्य को भी बूथ कब्जे की श्रेणी में रखकर अपराध माना जाएगा। मतगणना स्थान पर ऐसा कोई कृत्य करने के अपराध भी इसी श्रेणी में आएंगे।
निर्वाचन कानून के तहत यह भी साफ किया गया है कि सरकारी सेवा से जुड़ा कोई कर्मचारी या अधिकारी इनमें से कोई अपराध करेगा या किसी उम्मीदवार विशेष के हक में वोट डालने के लिए किसी मतदाता को प्रेरित करेगा या इस काम में मदद करने के लिए मौन सहमति देगा तो भी अपराधी माना जाएगा।

योगेश शर्मा