Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
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जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग अफसर भी ज़द में
6 महीनों की कैद और जुर्माना
अपराध संज्ञेय होगा

चुनाव डयूटी में तैनात सरकारी अफसर या कर्मचारियों से कहा गया है कि वे किसी भी सूरत में किसी उम्मीदवार के हित में कोई काम न कर बैठें। उनका कोई भी ऐसा कदम उन्हें छह महीनों तक की कैद और जुर्माने की सजा का पात्र बना देगा। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत होने वाली इस कार्रवाई की ज़द में सारे जिला निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग अफसरों और सहायक रिटर्निंग अफसरों के साथ ही पीठासीन अधिकारी, पुलिस अफसर, मतदान अधिकारी और वह लिपिक या अन्य कर्मचारी जो इस काम के लिए तैनात किए गए हैं, शामिल रहेंगे।
चुनाव आयोग निर्वाचन कानूनों और आदर्श आचरण संहिता पर अमल को लेकर पूरी तरह सख्त और चौकस है। चुनाव डयूटी के अफसरों से कहा गया है कि वे चुनावी प्रक्रिया में मतदाता के बतौर सिर्फ अपने मताधिकार के प्रयोग तक ही खुद को सीमित रखें। जहाँ तक इस प्रक्रिया के संचालन और प्रबंध में उनकी डयूटी का सवाल है उन्हें पूरी दृढ़ता से अपनी निष्पक्षता सिध्द करनी होगी। किसी उम्मीदवार के हित में उन्हें कोई काम नहीं करना है और न ही किसी मतदाता पर मतदान करने में अपना असर दिखाना है। उन्हें ऐसा कोई कदम नहीं उठाना है जो किसी उम्मीदवार के पक्ष में संभावना को बढ़ाने वाला हो।
इन अफसर और कर्मचारियों को चुनाव में वोट डालने या न डालने के लिए किसी को मनाना नहीं है। ये किसी भी तरह का ऐसा काम नहीं करेंगे जिससे किसी मतदाता के मतदान करने में असर डल रहा हो। यदि वे ऐसा कर बैठते हैं तो उन्हें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के उल्लंघन को लेकर 6 महीनों तक की कैद और जुर्माने की सजा भुगतना पड़ेगी। एक और बड़ी बात यह है कि यह दंडनीय अपराध संज्ञेय होगा।

योगेश शर्मा