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तीन महीनों की कैद और जुर्माना सेवा नियमों के तहत कार्रवाई अलग

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए 27 नवंबर को होने जा रहे मतदान में बड़ी तादाद में सरकारी अफसर और कर्मचारियों का अमला तैनात हो रहा है। यह इन कर्मचारियों कीर् कत्तव्य निष्ठा और निष्पक्षता को लेकर चुनौतीपूर्ण तथा निर्णायक घड़ी होगी। मतदान की जरूरी गोपनीयता को भंग करना इनके लिए खतरनाक हो सकता है। इस अपराध के लिए तीन महीने जेल में बिताने पड़ सकते हैं और जुर्माना भी अदा करना होगा। बात यहीं तक नहीं रहेगी, सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत उन पर कार्रवाई अलग से होगी जो नौकरी से जुड़ा मामला है।
चुनाव आयोग का रूख बेहद सख्त है और उसे इन कर्मचारियों के खिलाफ सीधी कार्रवाई का हक लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत इसलिए मिला हुआ है कि चुनाव से जुड़े कर्मचारी-अधिकारी इस अवधि में उसके नियंत्रण और निगरानी में हैं। आयोग ने प्रदेश में चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद से अब तक लगभग 400 अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की है। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि इस कार्रवाई के घेरे में 24 आएएएस और आएपीएस जैसे आला अफसर भी आ चुके हैं।
मतदान की डयूटी में हर अफसर, लिपिक, एजेंट या अन्य व्यक्ति जो चुनाव में मतों को अभिलिखित करने या उनकी गणना के काम से जुड़ा हुआ है, उसे मतदान की गोपनीयता बनाये रखनी होगी। यही नहीं, उसे इस गोपनीयता को कायम रखने में सहायता भी करना है और किसी भी सूरत में उसे इसके बारे में किसी भी व्यक्ति को सूचना नहीं देनी है। इसमें सूचना का संप्रेषण सिर्फ उन्हीं लोगों को हो जो कानूनी तौर पर किसी मकसद से इसे जानने के लिए अधिकृत हैं। अब फिर भी इनमें से कोई कर्मचारी यह कृत्य कर बैठता है तो उसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 128 के तहत तीन महीनों तक के कारावास और जुर्माने की सजा के लिए भी तैयार रहना होगा।

 

योगेश शर्मा