Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
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मंत्री सरकारी दौरों पर नहीं करें चुनाव प्रचार अनुदान और भुगतानों की मंजूरी भी न दें आयोग के निर्देश

भारत निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के मद्देनजर सत्तारूढ़ दल की गतिविधियों के लिए सीमाएं तय कर दी हैं। वर्ष 2008 में होने जा रहे विधानसभा चुनाव की आचार संहिता में इस सिलसिले में कई हिदायतें देकर सख्ती से अमल करने को कहा गया है। आयोग द्वारा मुकर्रर किए गए कायदे केन्द्र और प्रदेश दोनों के सत्तारूढ़ दलों पर एक समान लागू होंगे।
मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा जारी निर्देशों में सत्तारूढ़ दलों से साफ कहा गया है कि वे पक्का कर लें कि अपने दल के चुनावी मकसद को पूरा करने में उन्हें अपने सरकारी ओहदे और तंत्र का इस्तेमाल हरगिज नहीं करना है। इस बारे में किसी को शिकायत का मौका देना ही उचित नहीं होगा। तयशुदा कायदे के मुताबिक केन्द्र और प्रदेश के मंत्री अपने सरकारी दौरों को चुनावी प्रचार से नहीं जोड़ेंगे। जब वे प्रचार करेंगे तब भी सरकारी तंत्र या कर्मचारियों का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करेंगे। यह साफ किया गया है कि चुनाव प्रचार के लिए सरकारी विमान, गाड़ियों, मशीनरी और अमले का सत्तारूढ़ दल के हितों को साधने में कतई इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
निर्देश के मुताबिक सत्तारूढ़ दल चुनावी आमसभा करने के लिए किसी सार्वजनिक स्थान और चुनाव यात्रा के लिए हवाई उड़ानों में हेलिपेड के इस्तेमाल में अपना एकाधिकार नहीं जमाएंगे। अलबत्ता, इनका इस्तेमाल अन्य सभी राजनैतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए भी उन्हीं शर्तों पर हो सकेगा जो सत्तारूढ़ दलों के लिए तय हैं। यही कायदा सरकारी रेस्ट हाउस, सर्किट हाउस के इस्तेमाल में भी लागू होगा। इनके इस्तेमाल की इजाज़त अन्य दलों और उम्मीदवारों को भी होगी। हालांकि यह भी साफ कर दिया गया है कि कोई भी दल या उम्मीदवार इन जगहों और इनसे जुड़े परिसरों का चुनाव दफ्तर के बतौर या अपने प्रचार के लिए किसी भी शक्ल में इस्तेमाल हरगिज नहीं करेगा।
चुनाव के दौरान राजनैतिक खबरों और प्रचार-प्रसार के लिए सरकारी खर्चें से किसी भी अखबार या अन्य माध्यम को विज्ञापन दिए जाने पर रोक रहेगी। इसी तरह सरकारी प्रचार माध्यमों का भी बेजा इस्तेमाल इसके लिए हरगिज नहीं किया जा सकेगा। ऐसा कोई प्रचार ये माध्यम नहीं करेंगे जिसमें सत्तारूढ़ दल के हितों को साधने के लिए उसकी उपलब्धियाँ बतायी जाएं। मंत्री और सार्वजनिक उपक्रमों के प्राधिकारी अपनी विवेकाधीन निधि से किसी अनुदान या भुगतान की मंजूरी नहीं दे सकेंगे। यह भी साफ कर दिया गया है कि केन्द्र और राज्य सरकार के कोई भी मंत्री अपनी उम्मीदवार, मतदाता या अधिकृत एजेंट की हैसियत को छोड़कर अन्य किसी भी रूप में मतदान या मतगणना स्थल पर प्रवेश नहीं कर सकेंगे।

योगेश शर्मा