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जिम्मेदारियों का विकेन्द्रीकरण 53 क्षेत्रों के पर्चे जिला मुख्यालय के बाहर भरे

मध्यप्रदेश की तेरहवीं विधानसभा का चुनाव कई अर्थों में इस प्रक्रिया के सुधारों को लेकर महत्वपूर्ण बन चुका है। पहली बार इस चुनाव में जिला कलेक्टरों को उनकी वैधानिक डयूटी को कारगर ढंग से निभाने की आजादी मिली है। रिटर्निंग अफसर की उनकी जिम्मेदारी का विकेन्द्रीकरण कर यह काम अन्य अफसरों को सौंपा गया। इस कार्रवाई के चलते एक और सहूलियत उन 53 विधानसभा क्षेत्रों के उम्मीदवारों को यह मिली कि अपनी नामजदगी के पर्चे भरने उन्हें जिला मुख्यालय नहीं जाना पड़ा। इस सबके नतीजे में आयोग द्वारा भविष्य में लिए जाने वाले फैसलों की बुनियाद भी तैयार हो गई है।
चुनाव आयोग का मानना था कि कलेक्टरों को संवैधानिकर् कत्तव्यों के समुचित निर्वाह और निर्वाचन की प्रशासनिक व्यवस्था पर उनकी सतत निगरानी में स्वतंत्रता और आसानी सुनिश्चित होना चाहिए। इस मकसद से इस बार के विधानसभा चुनाव में उन्हें रिटर्निंग अफसर बनने के दायित्व से मुक्त किया गया। आयोग ने कलेक्टरों को यह जिम्मेदारी सौंपी कि जिला निर्वाचन अधिकारी होने के नाते उन्हें प्रभावी ढंग से चुनाव की सारी प्रशासनिक व्यवस्थाओं के संचालन में समन्वय और नियंत्रण करना है तथा इसके कानूनी तौर-तरीकों पर अमल सुनिश्चित करना है। रिटर्निंग अफसर के दायित्व में सिमटने के बाद कहीं न कहीं इस काम के सुचारू संचालन में उन्हें व्यावहारिक दिक्कतें उठाना पड़ती थीं। अब वे इस काम और अन्य कार्यों के संपादन में अपने वैधानिकर् कत्तव्यों के निर्वहन में ज्यादा सक्षम, स्वतंत्र और प्रभावी हो गए हैं। इस काम को अंजाम तक पहुंचाने के लिए आयोग ने बाकायदा राज्य सरकार के साथ पहले मशविरा किया।
आयोग के इस प्रयास के चलते चुनाव की प्रशासनिक व्यवस्थाओं का विकेन्द्रकरण भी हुआ। उसने प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिए न सिर्फ अलग-अलग रिटर्निंग अफसरों को तैनात किया बल्कि इनके रूप में अन्य अधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। इन प्रशासनिक अफसरों को अपने निर्वाचन क्षेत्र में सीमित होकर काम करना था, इसलिए उनके सामने काम का विस्तृत फैलाव नहीं था। दूसरे वे अपने क्षेत्र की स्थिति, परिस्थिति और आवश्यकता का बेहतर आंकलन भी कर सकते हैं।
इस बार रिटर्निंग अफसर बनाए गए अधिकारियों में 132 अनुविभागीय अधिकारी, 94 अपर कलेक्टर और 4 संयुक्त कलेक्टर शामिल थे। यही नहीं, इन रिटर्निंग अफसरों की मदद के लिए सहायक रिटर्निंग अफसर की जिम्मेदारी 213 तहसीलदारों, 7 अपर तहसीलदारों और 10 भू-अभिलेख अधीक्षकों को सौंपी गई। इस विकेन्द्रीकृत व्यवस्था के तहत जिला कलेक्टर के अलावा इन मैदानी अफसरों को भी निर्वाचन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने का मौका मिला।
इस नए प्रयोग का एक फायदा उन 53 निर्वाचन क्षेत्रों के उम्मीदवारों को यह मिला कि उन्हें अपने नामांकन पर्चे दाखिल करने जिला मुख्यालय नहीं जाना पड़ा। इस बार तयशुदा कार्यक्रम के मुताबिक 53 निर्वाचन क्षेत्रों के रिटर्निंग अफसरों ने जिला मुख्यालय के बाहर स्थित अपने दफ्तरों के मुख्यालय पर नामांकन पत्र प्राप्त किए।
चुनाव प्रशासन के इस विकेन्द्रीकृत और समुचित नियंत्रण, निगरानी वाले इस सुधार के नतीजों का आंकलन कर आयोग भावी रणनीति तैयार करेगा।

योगेश शर्मा