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चुनाव की हर गतिविधि पर रखेंगे नजर हफ्तेवार होगी काम की समीक्षा चुनाव आयोग के ताज़ा निर्देश

निर्वाचन आयोग चुनाव के प्रशासकीय कामकाज को नए आयाम और शक्ल देने का पक्षधर है। अपने इस मजबूत इरादे को कामयाबी और सुव्यवस्थित ढंग से अंजाम तक पहुँचाने के लिए उसने एक रणनीति तैयार कर इस काम से जुड़े अमले को मुस्तैद कर दिया है। मौजूदा विधानसभा चुनाव में मजबूत प्रशासकीय प्रबंधन के इस तयशुदा खाके के मुताबिक प्रदेश के सभी जिले काम शुरू कर चुके हैं।
निर्वाचन आयोग ने प्रशासकीय कार्य की नई तर्ज में सेक्टर अफसरों के रोल को बहुत अहम बना दिया है। इसका मकसद काम को चुस्त, दुरूस्त, पारदर्शी और खरा बनाना है। स्वाभाविक ही इसके चलते उनकी जिम्मेदारियाँ भी बढ़ गई हैं। इसके मुताबिक निर्वाचन क्षेत्र में हर सेक्टर एक जिम्मेदार अफसर को सौंपा गया है। इसके लिए सबसे मुस्तैद और अच्छे अफसरों की पहचान की गई है। इन्हें चाकचौबंद करने के लिए जरूरी संसाधन जुटाए गए हैं। अपने अधीन किए गए सेक्टर के हर कोने से ये वाकिफ होंगे जिसमें मतदान वाली जगह और उसके तहत आने वाला समूचा क्षेत्र होगा।
सेक्टर अफसरों की तयशुदा जिम्मेदारियों में अपने क्षेत्र में मतदान स्थल तक पहुँचने वाले रास्ते, पुल और पुलियाओं तक का ब्यौरा रखना शामिल है। वे मतदान स्थल पर अधोसंरचना के तहत रैम्प, पेयजल, प्रसाधन और दूरभाष के नंबर की जानकारी भी रखेंगे। यही नहीं, मतदान स्थल के कक्ष या बूथ को लेकर उसकी छत और दीवारों, बिजली आदि की मौजूदा स्थिति भी उनकी जानकारी में होगी। इन चीजों पर पकड़ चूंकि क्षेत्र के सघन दौरों से बनेगी इसलिए उन्हें इसके साथ ही आचार संहिता पर अमल का जायजा भी लेते रहना होगा। इस सिलसिले में खासकर वे अनाधिकृत वाहनों के जरिए होने वाले प्रचार, संपत्ति के विरूपण (डिफेंसमेंट ऑफ प्रापर्टी), निर्धारित समय के अलावा होने वाले प्रचार और सरकारी गाड़ियों तथा भवनों के दुरुपयोग पर नज़र रखेंगे।
सेक्टर अफसरों की तयशुदा जिम्मेदारियों के दायरे में प्रत्येक मतदान केन्द्र के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र के मतदाताओं में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के प्रति जागरूकता की पड़ताल करना और उन्हें इसका इस्तेमाल नहीं मालूम होने की स्थिति में उनके समक्ष इसका प्रदर्शन करना भी शामिल है। ये अपने क्षेत्र के मतदाताओं को फोटो परिचय पत्र के तहत किए जाने वाले कार्यक्रम से भी अवगत कराएंगे।
सेक्टर अफसर अपने क्षेत्र में मतदाता संपर्क कार्यक्रम के दौरान यह सुनिश्चित करेंगे कि वल्नरेबल (कमजोर) समझे जाने वाले इलाकों के मतदाताओं में कोई भ्रम, शंका या डर तो नहीं है। यह जायजा खासकर अल्पसंख्यक समुदाय, दलित, जनजाति और पिछड़े तबकों के मतदाआतों में लिया जाएगा। इसी तरह ये उन लोगों के नामों की जानकारी भी रखेंगे जो इन क्षेत्रों के कमजोर तबकों को तकलीफ पहुंचा सकते हैं और इस जानकारी से गोपनीयता के साथ रिटर्निंग अफसर और जिला निर्वाचन अधिकारी को अवगत कराएंगे।
कमजोर समझे जाने वाले क्षेत्रों में इन्हें एक संपर्क सूत्र के बतौर किसी व्यक्ति या परिवार की पहचान करनी होगी। इन दोनों के पास एक-दूसरे के टेलीफोन और मोबाइल नंबर उपलब्ध रहेंगे। ये अफसर ऐसे इलाकों में भ्रमण कर वहाँ के आम मतदाताओं से बात करेंगे ओर उनमें विश्वास पैदा करने के उपाय करेंगे। इन अफसरों को मजिस्ट्रेट ऑन डयूटी भी घोषित किया जाएगा।
मतदान की पूर्व संध्या से लेकर मतदान के दौरान विभिन्न प्रशासनिक व्यवस्थाओं के संचालन में ये अफसर समन्वय करेंगे। इन व्यवस्थाओं में मतदान दल और सामग्री मतदान केन्द्र पहुँचना, आवश्यकता के अनुसार वहाँ पुलिस बल पहुँचना, मतदान प्रारंभ होने की सूचना रिटर्निंग अफसर को देना, ईवीएम के खराब होने पर इसका रिप्लेसमेंट, क्षेत्र में भ्रमण कर उपलब्ध एवं संभव होने पर हर प्रिजाडिंग अफसर से संपर्क करना और यह सुनिश्चित करना शामिल होगा कि मतदान की प्रक्रिया स्वतंत्र एवं निष्पक्षता से चल रही है। वे यह भी देखेंगे कि वल्नरेबल (कमजोर) क्षेत्रों के मतदाताओं को मतदान में कोई रूकावट तो नहीं है। इन्हें अपने क्षेत्र में सब ठीक (ओ.के.) होने की रिपोर्ट देना होगा।
सेक्टर अफसरों को बाकायदा ट्रेनिंग दी जा रही है और गाड़ी तथा ईधन एवं अन्य जरूरी साजोसमान मुहैया कराए जा रहे हैं।

योगेश शर्मा