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उद्देश्य- प्रदेश के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग को गौण खनिज के पट्टों के आवंटन के क्षेत्र में आगे लाना।

उत्खनिपट्टा हेतु खनिज- मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम 1996 की अनुसूची- I में विर्निदिष्ट खनिज जैसे ग्रेनाइट, मार्बल, भट्टी में जलाकर चूने के निर्माण हेतु चूना पत्थर, फर्शी पत्थर, क्रेशर द्वारा गिट्टी निर्माण के उत्खनिपट्टा स्वीकृति में प्राथमिकता देना।

पात्र व्यक्ति

1. अनुसूचित जनजाति#अनुसूचित जाति#पिछड़ा वर्ग#शिक्षित बेरोजगार की सहकारी सोसायटियां या इन वर्गों के व्यक्ति।
2. गरीबी रेखा के नीचे के परिवार के शिक्षित बेरोजगार।
3. महिला या महिलाओं की सहकारी समिति।
4. अन्य कोई भी आवेदक।

उपरोक्तानुसार क्रम में उत्खनिपट्टा स्वीकृति के अधिमानी अधिकार है।

आवंटन प्रक्रिया- अनुसूची- I में वर्णित खनिजों को उत्खनिपट्टा स्वीकृति हेतु निर्धारित प्रपत्र एवं निर्धारित शुल्क के साथ जिस क्षेत्र में उत्खनिपट्टा वांछित हो उसका विवरण के साथ संबंधित क्षेत्र के जिला कलेक्टर के कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत करना होता है। आवेदन पर विचार उपरांत अन्य विभागों से आवश्यक अनापत्ति प्राप्त होने के पश्चात कलेक्टर अपने अधिकार क्षेत्र की खदान स्वीकृत करने के अधिकार संचालक, भौमिकी तथा खनिकर्म या खनिज साधन विभाग राज्य शासन को अनुशंसित कर सकते है।

आवंटन उपरांत लाभ- खदान के आवंटन उपरांत हितग्राही शासन को देय राजस्व के भुगतान उपरांत खनिज का विक्रय कर सकता है।

आवंटन में बाधायें- खदान के आवंटन में वन भूमि होने पर संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत वांछित अनुमोदन केन्द्र शासन के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से प्राप्त किया जाना आवश्यक होता है। इसमें काफी समय लगता है।

बाधा निवारण की व्यवस्था- वन विभाग से मार्गदर्शन प्राप्त कर उक्त कार्यवाही किया जाना संभव हो सकता है।

संपर्क- खनि शाखा कलेक्टर कार्यालय संबंधित जिला

आवंटन की सीमा- अनुसूचित जाति#अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग शिक्षित बेरोजगार महिला वर्ग हेतु गौण खनिजों के उत्खनिपट्टा प्राप्त करने में प्राथमिकता है। जबकि मुख्य खनिजों यथा चूनापत्थर, डोलोमाइट, बाक्साइट, मैंगनीज एवं अन्य खनिज के खनिपट्टा को प्राप्त करने में इन वर्गों को प्राथमिकता नहीं है, जिनमें पहले आयें-पहले पायें का नियमों में प्रावधान है।