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मत्स्य-कृषक विकास अभिकरण
(केन्द्र प्रवर्तित)

उद्देश्य-मत्स्य पालकों को उन्नत तकनीक के आधार पर मत्स्य पालन करने के लिए तालाब निर्माण व सुधार जाली लगाने मत्स्य बीज आहार, उर्वरक, खाद व दवाइयों आदि के लिये अनुदान व प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है।

पात्र हितग्राही- मत्स्य-पालन से संबंद्ध कोई भी व्यक्ति।

1. गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले सभी वर्ग के मछुआरे, जो ग्रामीण तालाबों को पट्टे पर लेकर अभिकरण के अंतर्गत मत्स्य-पालन करते हैं, हितग्राही बनाये जाते हैं।

2. स्वयं की भूमि में तालाब निर्माण कर अभिकरण योजना में मत्स्य-पालन करने वाले व्यक्ति भी हितग्राही हो सकते है।

योजना के अंतर्गत तालाब मरम्मत, जाली लगाने, मत्स्य बीज, आहार उर्वरक आदि के लिये सामान्य वर्ग के मत्स्यपालकों को 20 प्रतिशत तक तथा अनुसूचित जाति जनजाति के मत्स्यपालकों को 25 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है।

प्रशिक्षण एवं विस्तार- प्रगतिशील मत्स्य पालकों को नवीन विकसित तकनीक के प्रशिक्षण हेतु राज्य के बाहर अध्ययन भ्रमण पर जाने की व्यवस्था है। भ्रमण पर प्रति व्यक्ति रु. 2700/- तक का व्यय किया जा सकता है। इसके साथ ही तालाब पट्टा धारकों को 15 दिवसीय विभागीय प्रशिक्षण का प्रावधान भी है। प्रति प्रशिक्षणार्थी रु. 1250/- तक का व्यय स्वीकृत है।

योजना सभी वर्गों के लिये लागू हैं। आवेदन के लिये जिले के मत्स्योद्योग अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

मत्स्य- पालन प्रसार (राज्य आयोजना)

उद्देश्य-अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मछुआरों को मत्स्य-पालन के लिये अनुदान प्रदान करना।

योजना का स्वरूप और कार्यक्षेत्र- योजना में ऐसे अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के मत्स्य पालक, जो ग्राम पंचायतों अथवा अन्य शासकीय तालाब पट्टे पर लेकर मत्स्य-पालन करते है, उनको तालाब की पट्टा राशि भुगतान, मछली बीज संचयन, मत्स्य आहार, उर्वरक,
दवा, जाल आदि के लिये पट्टा अवधि में अधिकतम रुपये 15000/- तक की सहायता वस्तु के रूप में दी जाती है। योजना संपूर्ण मध्यप्रदेश में लागू है।

सम्पर्क- जिला अधिकारी, मत्स्योद्योग।

मछुआ सहकारिता

  • अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग की तालाब पट्टा धारक मछुआ सहकारी समितियों को रुपये 150000/- की अधिकतम सीमा तक पट्टा अवधि में पट्टा राशि, मत्स्य बीज, नाव जाल, हिस्सा पूंजी अंशदान आदि के लिये अनुदान।

  • सामान्य मछुआ वर्ग की सहकारी समितियों को
    तालाब की पट्टा राशि, मत्स्य बीज, नाव जाल, हिस्सा पूंजी अंशदान आदि के लिये अनुदान। इससे अधिक राशि के प्रस्ताव शासन को प्रस्तुत कर स्वीकृति प्राप्त की जाती है।

  • योजना का क्रियान्वयन पंचायतीराज संस्थाओं द्वारा तथा जिला अधिकारी मत्स्योद्योग।

मत्स्य- बीज़ उत्पादन

उद्देश्य-राज्य में मत्स्य-बीज़ के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिये निजी मत्स्य बीज उत्पादकों को बढावा देना। योजना प्रदेश के सभी जिलों में संचालित है।

पात्र हितग्राही- मत्स्य-पालन से सम्बद्ध कोई भी व्यक्ति। मत्स्य-बीज उत्पादन इकाई स्थापना के लिये स्वयं की भूमि तथा वर्ष भर समुचित जल आपूर्ति की व्यवस्था होना चाहिये।

योजना क्रियान्वयन की प्रक्रिया - इकाई लागत का 25 प्रतिशत (अधिकतम एक लाख) तक शासकीय अनुदान दिया जाता है।

संपर्क- जिला अधिकारी, मत्स्योद्योग

मत्स्य जीवियों का दुर्घटना बीमा
(केन्द्र प्रवर्तित कार्यक्रम)

उद्देश्य-मत्स्य पालन कार्य के समय दुर्घटना की स्थिति में मृतक परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना।

योजना का स्वरूप और कार्यक्षेत्र- प्रदेश में इस व्यवसाय से जुड़े हितग्राहियों को स्थाई अपंगता पर 25,000 रु. तक की सहायता तथा मृत्यु होने पर 50,000 रु. तक बीमाकृत व्यक्तियों के परिवार को आर्थिक सहायता दी जाती है। कार्यक्षेत्र समस्त जिले।

पात्र हितग्राही- मछली पालन/मछली पकड़ने के कार्य में सक्रिय रूप से संलग्न पंजीकृत मछुआ अनुसूचित जनजाति/जाति की समितियां समूह के सदस्य तथा मत्स्य कृषक विकास अभिकरण के हितग्राही जो 18 से 65 वर्ष की आयु वर्ग में है।

संपर्क- जिला अधिकारी मत्स्योद्योग

बचत-सह-राहत योजना
(केन्द्र प्रवर्तित कार्यक्रम)

उद्देश्य-राज्य के विभागीय जलाशयों एवं मत्स्य पालन हेतु पट्टे पर दिया गया ग्रामीण/सिंचाई तालाबों के मत्स्याखेट कार्य में संलग्न मछुआ सहकारी समिति के ऐसे सदस्य जिनके जीविकोपार्जन का मुख्य स्रोत मत्स्यखेट है उन मछुओं की पहचान कर उन्हें बन्द ऋतु की अवधि में योजनान्तर्गत आर्थिक सहायता उपलब्ध करना। कार्य क्षेत्र समस्त जिले।

योजना का क्रियान्वयन- योजनानुसार 50 रु. प्रति हितग्राही प्रतिमाह के मान से जिला मुख्यालय के डाकघर/राष्ट्रीयकृत बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक में संयुक्त खाता खुलवाकर चालू वर्ष के माह सितम्बर से नियमित रूप से नौ माह तक राशि जमा की जाती है। प्रत्येक हितग्राही को जमा राशि 450 रु.
एवं उसके समतुल्य राशि रु. 450 इस प्रकार कुल रु. 900/- भुगतान मय ब्याज के वर्षा ऋतु की अवधि में किया जाता है।

संपर्क- जिला अधिकारी-मत्स्योद्योग

मछुआ आवास योजना
(केन्द्र प्रवर्तित कार्यक्रम)

उद्देश्य-मछुआरों को आवास, पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना।

योजना का स्वरूप और कार्यक्षेत्र- इस योजना में मछुआरों के लिए- (1) रुपये 40,000/- प्रति आवास। 35000 रु. प्रति नलकूप उत्खनन तथा सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 1,75,000 रु. की सहायता दी जाती है। योजना संपूर्ण मध्यप्रदेश में लागू है। बड़े-बड़े सिंचाई जलाशयों के निकट मछुआरों की सर्व सुविधायुक्त आवास व्यवस्था की जाती है।

संपर्क-जिला अधिकारी मत्स्योद्योग।