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खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा संचालित योजनाएं

कारीगरों को प्रशिक्षण-स्वरोजगार हेतु रेडियो, टी.व्ही., विद्युत उपकरण, मोबाईल, साईकल मरम्मत, मोटर बाईडिंग, सिलाई, कताई, बुनाई, कम्प्यूटर, कृत्रिम आभूषण, पत्थर कटाई, डिटरजेंट केक, पावडर, पापड़, बड़ी, मसाला, आचार, मुरब्बा, अगरबत्ती, रेशा, जूट, सामग्री, दोना पत्तल, लेदर गुड्स, फुटवेयर, मोमबत्ती, टाटपट्टी एवं जड़ी-बूटी संग्रहण आदि का 1 से 6 माह का प्रशिक्षण खादी बोर्ड के प्रशिक्षण संस्थान इन्दौर व जिलों में दिया जाता है। प्रशिक्षणर्थियों को आवासीय प्रशिक्षण में रु. 800/- प्रतिमाह तथा गैर आवासीय प्रशिक्षण में रु. 600/- प्रतिमाह छात्रवृत्ति दी जाती है।

संपर्क- जिला पंचायत में पदस्थ उप संचालक/प्रबंधक खादी ग्रामोद्योग बोर्ड।

परिवार मूलक इकाई की स्थापना- स्वरोजगार हेतु ग्राम तथा नगर पंचायत क्षेत्र में निवास करने वाले गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले हितग्राहियों को ग्रामोद्योग स्थापना हेतु परियोजना लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 25,000/- रुपये जो भी कम हो अनुदान दिया जाता है। शेष राशि बैंकों से ऋण के रूप मंे स्वीकृत कराई जाती है। हितग्राही द्वारा प्रस्तुत आवेदन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत द्वारा बैंकों को अनुशंसित किये जाते है। बैंक की स्वीकृति उपरांत मुख्य कार्यपालन अधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा अनुदान स्वीकृत किया जाता है।

संपर्क- जिला पंचायत में पदस्थ उप संचालक/प्रबंधक खादी बोर्ड

मार्जिन मनी योजना- स्वरोजगार हेतु 20000 तक जनसंख्या वाले ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामोद्योग स्थापित करने हेतु वित्त पोषण उपलब्ध कराया जाता है। सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को दस लाख रुपये तक की परियोजना लागत की 25 प्रतिशत राशि मार्जिन मनी/अनुदान के रूप में दी जाती है। दस लाख से अधिक एवं 25 लाख तक की परियोजनाओं के लिये मार्जिन मनी राशि दस लाख तक 25 प्रतिशत एवं शेष लागत का दस प्रतिशत होती है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिला, विकलांग, भूतपूर्व सैनिक एवं अल्पसंख्यक समुदाय के हितग्राहियों के लिये मार्जिन मनी राशि दस लाख तक की परियोजना में 30 प्रतिशत दी जाती है। सामान्य वर्ग को योजना लागत 10।़ तथा अन्य हितग्राहियों को योजना लागत का 5।़ स्वयं निवेश करना अनिवार्य है। योजना में शेष राशि बैंकों के ऋण के रूप में लेना होती है। योजना संपूर्ण मध्यप्रदेश में लागू है।

संपर्क- जिला पंचायत में पदस्थ उप संचालक/प्रबंधक खादी ग्रामोद्योग बोर्ड।

रेशम संचालनालय द्वारा संचालित योजनाएं

मलबरी रेशम विकास एवं विस्तार योजना-रेशम उत्पादन के माध्यम से रोजगार के इच्छुक हितग्राहियों को अपनी निजी स्वामित्व की आधा/एक एकड़ अधिकतम 5 एकड़ तक सिंचित भूमि पर शहतूती पौध रोपण हेतु नि:शुल्क मलबरी पौधे एवं तकनीकी मार्गदर्शन दिया जाता है। एक एकड़ पौधरोपण पर रु. 1750/- के टूल किट अनुदान पर दिये जाते है। कृमि पालन भवन निर्माण हेतु लागत रु. 1.00 लाख, रुपये 50 हजार, रुपये 20 हजार का 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। ड्रिप सिंचाई उपकरण हेतु प्रति हैक्टेयर लागत रु. 48,000/- का 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। योजना मुख्यत: होशंगाबाद, मण्डला, बालाघाट, नरसिंहपुर, विदिशा एवं राजगढ़ में लागू है।

संपर्क- सहायक संचालक जिला रेशम कार्यालय।

इरी रेशम विकास एवं विस्तार कार्यक्रम- अरण्डी के पौधे पर रेशम कीटपालन के माध्यम से रोजगार सृजन हेतु इच्छुक हितग्राहियों को न्यूनतम 5 वर्ष तक निरन्तर अरण्डी पौध रोपण के अनुबंध के आधार पर एक एकड़ अरण्डी बीज रोपण एवं संधारण हेतु रु. 3000/- कृमिपालन उपकरणों हेतु रु. 4000/- तथा कृमिपालन गृह निर्माण हेतु रुपये 10000/- की सहायता विशेष परियोजना के तहत दी जाती है। उत्प्रेरण विकास कार्यक्रम में आधा एकड़ पौध रोपण हेतु रुपये 23750/- की सहायता दी जाती है।

संपर्क- सहायक संचालक जिला रेशम कार्यालय।

एकीकृत टसर रेशम विकास एवं विस्तार- प्रदेश के बालाघाट, सिवनी, मंडला, नरसिंहपुर, सीधी एवं झाबुआ के वन क्षेत्रों में साझा -अर्जुन के पौधों पर टसर कृमि पालन हेतु बैसिक सीड निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। हितग्राहियों द्वारा संग्रहित टसर ककून निर्धारित दरों पर क्रय किया जाता है।

संपर्क- सहायक संचालक जिला रेशम कार्यालय।

हाथकरघा संचालनालय द्वारा संचालित योजनाएं

वेलफेयर पैकेज (स्वास्थ्य बीमा योजना)-हाथकरघा बुनाई से अपनी आय का कम से कम 50 प्रतिशत भाग अर्जित करने वाले बुनकर 80 वर्ष की आयु तक स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ प्राप्त कर सकते है। इस योजना में वार्षिक बीमा प्रीमियम रुपये 1000/- है। जिसमें रुपये 800/- प्रतिवर्ष भारत सरकार द्वारा, रुपये 100/- प्रतिवर्ष राज्य शासन द्वारा और सौ रुपये प्रतिवर्ष बुनकर को देना होता है। बीमा बुनकर परिवार के चार सदस्य (पति, पत्नी एवं दो बच्चों) को रुपये 15000/- का लाभ प्रतिवर्ष प्राप्त होता है, जिसमें मातृत्व लाभ 2500/- (दो बच्चों तक) मिलता है। दांत के ईलाज हेतु रुपये 250/- आंख की जांच हेतु रुपये 75/- चश्मा हेतु रुपये 250/- अस्पताल में
इलाज हेतु रुपये 4000/- आयुर्वेदिक, यूनानी, हैम्योपैथी इलाज हेतु रुपये 4000/- शिशु कवरेज रुपये 500/- ओपीडी रु. 7500/- एवं प्रति बीमारी रु. 7500/- का लाभ शामिल है।

संपर्क- सहायक संचालक जिला हाथकरघा कार्यालय अथवा जिला ग्रामोद्योग अधिकारी जिला पंचायत कार्यालय।

संरचना उत्पादन एवं प्रक्रिया- सहकारी समितियों एवं स्वसहायता समूहों को चर्म शोधन/चर्म सामग्री, मिट्टी के बर्तन, धान एवं अनाज, कुटाई चावल मिल, आटा मिल, बेकरी, तेल पराई, ताड़, गन्ने का गुड़, खाण्डसारी, फल/सब्जियों को डिब्बा बंद करना, कृषि/वन उत्पादों का प्रसंस्करण, लोहारी, बढ़ाईगिरी, मधुमक्खी पालन, हस्तशिल्प, रेशम, रेशा कताई,
बुनाई, वस्त्रोद्योग, जिल्दसाजी, मुद्रण लकड़ी का समान
एवं अन्य उद्योगों के लिये भवन, संयंत्र, मशीनरी लागत का 50 प्रतिशत अधिकतम रुपये 1.00 लाख अनुदान दिया जाता है। शेष राशि स्वयं बैंक से ऋण के रूप में प्राप्त करना होता है।

संपर्क- सहायक संचालक जिला हाथकरघा कार्यालय अथवा जिला ग्रामोद्योग अधिकारी जिला पंचायत कार्यालय।

हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम द्वारा संचालित योजनाएं

प्रशिक्षण योजना-हाथकरघा वस्त्र बुनाई एवं शिल्प उत्पादन के माध्यम से जीविका उपार्जन के इच्छुक हितग्राहियों को निगम द्वारा 6 माह तक का बुनियादी प्रशिक्षण एवं परंपरागत तथा पूर्व प्रशिक्षित बुनकरों एवं शिल्पियों को 6 माह तक का उन्नत प्रशिक्षण दिया जाता है। बुनियादी प्रशिक्षण में रु. 350/- प्रतिमाह तथा उन्नत प्रशिक्षण में रु. 500/- प्रतिमाह छात्रवृत्ति दी जाती है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सामान्यता परंपरागत शिल्प एवं हाथकरघा क्लस्टरों में आयोजित किये जाते है।

संपर्क- हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम का स्थानीय विकास केन्द्र या जिला ग्रामोद्योग अधिकारी जिला पंचायत।

उन्नत औजार उपकरण का प्रदाय- परंपरागत एवं प्रशिक्षित बुनकर एवं शिल्पियों को अनुदान पर उन्नत औजार एवं उपकरण उपलब्ध कराये जाते है। बुनकरों हेतु उपकरणों की अधिकतम सीमा रु. 10,000/- एवं शिल्पियों हेतु अधिकतम सीमा 5,000/- है। सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को औजार उपकरण 75 प्रतिशत अनुदान पर तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के हितग्राहियों को 100 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराये जाते है।

संपर्क- हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम का स्थानीय विकास केन्द्र या जिला ग्रामोद्योग अधिकारी जिला पंचायत।

विपणन सहायता- शिल्पियों और बुनकरों को बाजार मांग व प्रचलित डिजाईनों से अवगत कराने हेतु निगम द्वारा प्रदेश के बाहर महानगरों में तथा विदेशों में आयोजित क्राफ्ट बाजार एवं प्रदर्शनियों में भागीदारी हेतु ले जाया जाता है। इन प्रदर्शिनियों में वे अपना माल सीधे ग्राहक को बेचते है और व्यापारी/निर्यातकों से सीधे संपर्क हो जाने पर उन्हें अपने उत्पाद की बिक्री कर सकते है।

संपर्क- हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम का स्थानीय विकास केन्द्र या जिला ग्रामोद्योग अधिकारी जिला पंचायत।