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भिण्ड जिले के गोहद में रहने वाले नारायण ने दसवीं परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद नौकरी की बहुत कोशिश की किन्तु असफल रहे।

नारायण के पास चार हेक्टेयर पुश्तैनी जमीन बेकार पड़ी थी। खेती के सही तरीके का ज्ञान न होने से वे उसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। मन में कुछ नया करने की इच्छाशक्ति के चलते उन्होंने खेती की ओर ध्यान केन्द्रित किया।

नारायण ने उद्यानिकी विभाग से मार्गदर्शन प्राप्त कर, खरबूजे का हाइब्रीड बीज मधुरस प्राप्त कर, एक हेक्टेयर में खरबूजे की फसल और ककड़ी का हाइब्रीड बीज अर्ली लेकर दो हेक्टेयर में ककड़ी की फसल उगाई। भरपूर उत्पादन हुआ। नारायण से प्रेरणा पाकर क्षेत्र के अन्य किसानों ने भी इन फसलों को लेना शुरू किया। आज नारायण के खरबूजे एवं ककड़ी गोहद, गोरमी, भिण्ड, ग्वालियर, मुरैना जिले के बाजारों में मिल रहे हैं।

नारायण ककड़ी एवं खरबूजे की फसलों का ग्रामीणों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। वे ग्रामीणों को स्थायी और पर्यावरण के अनुकूल वैज्ञानिक तरीके से खेती-बाड़ी करने, नई-नई तकनीक अपनाने और अधिक उत्पादन तथा अधिक आय प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं।

नारायण जिले के तमाम किसानों के लिए प्रेरणा-स्रोत बने हुए हैं। उनसे प्रेरणा पाकर आसपास गाँव के लगभग 500 किसान उन्हीं की तर्ज पर खरबूजा एवं ककड़ी की भरपूर फसल लेकर कमाई कर रहे हैं। विशेष बात यह है कि जो स्वयं कल तक रोजगार के लिए भटका करते थे, आज उन्हीं के द्वारा करीब 2000 लोगों को रोजगार मिल रहा है। नारायण को अब तक 35 पुरस्कार भी मिल चुके हैं। उनके पास दो-मंजिला मकान, ट्रेक्टर-ट्राली, दो मोटर साइकिल, दो डीजल पंप एवं खेतों में दो नलकूप भी हैं। सिंचाई के लिए बाँध से पानी लाने के लिए उन्होंने भूमिगत पाइप लाइन भी बिछवा ली है।

आज नारायण खेती किसानी व्यवसाय में लगे लोगों के लिए एक मिसाल बन चुके हैं।

सुनीता शर्मा