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हितग्राही को यदि सही समय पर मार्गदर्शन, प्रेरणा मिलने के साथ ही स्वयं के अंदर कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो आर्थिक हालात बदलने में कामयाबी जरूर मिलती है। ऐसा ही कुछ हुआ विदिशा जिले के ग्राम नौलास निवासी श्री हरिसिंह रैकवार और उनके सजातीय साथियों के साथ। यह सभी कल तक नजदीकी नदियों और नालों से मछली पकड़कर अपनी जरूरतों को पूरा करते थे, पर अब मत्स्य विभाग एवं जनपद पंचायत से मिली सहायता से उनकी आर्थिक स्थिति बदल गई है।

श्री रैकवार ने वर्ष 2006 में गौरव मत्स्योद्योग सहकारी समिति बनाकर बाकायदा पंजीयन करवाया। इन्हें जनपद पंचायत ग्यारसपुर एवं मत्स्य विभाग की मदद से पुराघटेरा सिंचाई जलाशय का सालाना पट्टा 20 हजार 550 रुपये के मान से 7 साल के लिये मिला। श्री रैकवार ने अपने साथियों के साथ मत्स्य-पालन का कार्य शुरू किया। वर्ष 2011-12 में समिति को एम.पी.डब्ल्यू.एस.आर.पी. योजना से अनुदान स्वरूप 232 किलोग्राम नायलोन जाल, इन्सूलेटेड बाक्स उपलब्ध करवाने के साथ ही कतला मिश्रित 100 एम.एम. का 55 हजार मत्स्य-बीज का संचयन करवाया गया। इससे 500 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ, जिससे ढाई लाख रुपये का लाभ मिला।

मत्स्य-पालन से हुए लाभ से अब श्री हरीसिंह रैकवार का पक्का मकान बन गया है। वे अपने चार बच्चों को अच्छी तालीम भी दिला रहे हैं। इस साल समिति की आय दोगुना होने की आशा है।

ऋषभ जैन