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प्रदेश के सुदूर गाँवों में बैंकिंग सुविधा की पहुँच नहीं होने से ग्रामवासियों को आसपास के कस्बों और शहरों तक 25 से 30 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। आज राज्य के ऐसे हजारों गाँव में अल्ट्रा-स्मॉल बैंक खुल जाने से यहाँ विकास के नये द्वार खुले हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया और भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने मध्यप्रदेश के इस सफल मॉडल की व्यापक सराहना की है।

सुदूरवर्ती गाँव में बैंकिंग सुविधा की उपलब्धता और वित्तीय समावेशन का लाभ पहुँचाने के लिये पिछले वर्ष मध्यप्रदेश में मॉडल ऑफ फायनेंशियल इन्क्लूजन तैयार किया गया। राज्य के 52 हजार गाँव में से 14 हजार 767 ऐसे गाँव को चुना गया, जहाँ 5 किलोमीटर के दायरे में कोई वित्तीय संस्थान की सुविधा नहीं है। इन गाँव तक वित्तीय समावेशन के माध्यम से बैंकिंग सुविधा मुहैया करवाने के लिये उन्हें जिले और बैंकवार वर्गीकृत किया गया। प्रत्येक बैंक ने अपने शेडो एरिया के ऐसे गाँव में अल्ट्रा-स्मॉल बैंक खोलने की नीति बनाई। अब विभिन्न बैंक के माध्यम से करीब 3500 ऐसे अल्ट्रा-स्मॉल बैंक खोलने का काम तेजी से चल रहा है। अब तक 1275 अल्ट्रा-स्मॉल बैंक खोले जा चुके हैं। अल्ट्रा-स्मॉल बैंक इसके लिये ग्राम-पंचायत भवन में एक कमरा दिया जा रहा है।

मध्यप्रदेश में खरगोन के मण्डलेश्वर के ग्राम पथराड में यूनियन बैंक द्वारा गत वर्ष एक युवा दिनेश को बिजनेस कारस्पोंडेंट नियुक्त कर अल्ट्रा-स्मॉल बैंक की जिम्मेदारी सौंपी गई। दिनेश के प्रयासों से पथराड और आसपास के कई गाँव के लोग ने बैंक में खाते खुलवाये। अब गाँव के लोगों को बैंक से मिलने वाली सभी सुविधा का लाभ आसानी से मिल रहा है। वृद्धावस्था, विधवा और निराश्रित पेंशन के साथ ही जननी सुरक्षा सहायता और छात्रवृत्ति अब सीधे बैंक में जमा होने लगी है।

दुर्गेश रायकवार