Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
 

सिवनी जिले के आदिवासी विकासखंड धनौरा के ग्राम तीतरी के सभी निवासी बेरोजगारी और बदहाली में जीते हुए दो वक्त की रोटी के लिए हलाकान थे। बदहाली के इस कठिन दौर में 11 लोग ने मिलकर जय दुर्गे स्व-सहायता समूह का गठन किया। समूह के सभी सदस्य मजदूरी, कृषि कार्य पर निर्भर होने के साथ बीपीएल परिवार के सदस्य थे। इसलिए जब ग्रेडिंग हुई तब समूह को स्वर्ण जयंती ग्राम स्व-रोजगार योजना में बीस हजार की लिमिट जारी की गई। इसके बाद समूह का कार्य चल पड़ा। समूह ने पहले झूमर निर्माण और बाद में बकरी पालन का भी काम हाथ में लिया।

समूह के अध्यक्ष श्री बलीराम यादव कहते हैं कि हम वर्ष में लगभग 12 झूमर बनाते हैं। झूमर बेचने पर 7500 रुपये से लेकर 10 हजार तक तथा बकरी की बिक्री से 20 हजार की आय हो जाती है।

समूह द्वारा उत्पादित सामान की मार्केंटिंग के लिए सिवनी जिला प्रशासन द्वारा वर्ष 2011 में दीप महोत्सव में स्टाल दिया गया। समूह ने महोत्सव में झूमर के 4 सेट बेचकर 30 हजार रुपये और शेष झूमर गाँव में बेचकर 42 हजार की धनराशि कमाई। समूह के सदस्यों ने अब झूमर और बकरी पालन के अलावा कृषि उत्पाद का विक्रय, आटा चक्की एवं किराना दुकान का काम भी शुरू किया है। इन सबसे समूह के सभी सदस्यों का जीवन खुशहाल हो गया। समूह के सचिव हरीशचंद्र प्रधान कहते हैं कि अब हम अपने परिवार को अच्छी जिंदगी दे पा रहे हैं। समूह परिवार के बच्चे स्कूल में शिक्षित होकर अपना जीवन सँवार रहे हैं। उन्होंने कहा कि तंगहाली अब खुशहाली में बदल गई है।

स्नेहलता मिश्रा