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भिंड जिले के गोहद के संतोष कुमार स्व-रोजगार योजना का लाभ लेकर न केवल लखपति बने वरन दूसरे युवकों के लिए मिसाल बने।

तीन साल पहले तक संतोष एक खटारा साइकिल पर अमरूद, अंगूर आदि फल लेकर गाँव-गाँव फेरी लगाते हुए रोजाना लगभग सौ रुपये कमाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। आर्थिक तंगी के चलते परिवार की गुजर-बसर में मुश्किल होती थी।

ऐसे में संतोष कुमार ने अन्त्यावसायी सहकारी विकास निगम की स्व-रोजगार योजना में 30 हजार रुपये का ऋण लेकर गोहद में फल की दुकान खोली। इसमें 10 हजार की अनुदान राशि शामिल है। पहले दिन लगभग 1000 रुपये की कमाई हुई। जैसे-जैसे उनका व्यवसाय बढ़ता गया आमदनी बढ़ने लगी। अब लाखों में कमाई होने लगी है। संतोष ने ग्वालियर में मकान खरीदा है, बच्चे कान्वेन्ट स्कूल में पढ़ते हैं। उन्होंने फल रखने के लिए गोदाम बनवाया है। गोहद में संतोष की फल और जूस की चार दुकान हैं। हर दुकान में ग्यारह-बारह किस्म के फल मिलते हैं। शादियों के सीजन में जूस के स्टाल लगाने से उनकी आमदनी कई गुना बढ़ जाती है।

संतोष का कहना है कि अन्त्यावसायी सहकारी विकास निगम की स्व-रोजगार योजना ने अनुसूचित जाति के अनेक जरूरतमंद व्यक्तियों का जीवन बदल कर उन्हें समृद्ध बनाया है। आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होने से समाज में भी पूछ-परख बढ़ी है। संतोष कुमार के जीवन में यह परिवर्तन सरकार की स्व-रोजगार योजना की बदौलत हुआ है।

स्नेहलता मिश्रा