Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
 

उज्जैन नगरी में सिंहस्थ महापर्व में हिस्सा ले रहे देश-दुनिया के साधु-संत की सेवा में प्रदेश सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही है। ऐसा ही एक उदाहरण गत दिवस देखने को मिला, जहाँ आस्था को सरकार की सेवाओं ने संबल दिया।

श्रद्धेय संत रामदासजी महराज सिंहस्थ में पूरे उत्साह के साथ आये। मेला क्षेत्र में प्लाट नं. 407/2 में ठहरे। मई में विचार था कि पूरी मेला अवधि के दौरान महाकाल की नगरी में रूककर प्रतिदिन क्षिप्रा मैया में डुबकी लगाने का सौभाग्य और पुण्य प्राप्त करेंगे। अचानक उनकी आँख में कुछ संक्रमण हुआ। आँखों में लगातार तकलीफ रहने लगी। तेज धूप ने तकलीफ और भी बढ़ा दी। अब रामदासजी को लगा कि शायद उन्हें वापस जाना होगा। आगामी शाही स्नान से वे वंचित रह जायेगे। आँखों की तकलीफ आस्था पर भारी पड़ने लगी थी।

ऐसे में जो भी संत रामदासजी से मिला, उसने उन्हें मेला क्षेत्र के अस्पताल में दिखाने तथा दवा लेने की सलाह दी। रामदासजी के मन में कुछ संकोच बना रहा। दरअसल रामदासजी एलोपैथिक पद्धति की चिकित्सा से परहेज करते हैं। वे यही मानकर चल रहे थे कि मेला क्षेत्र में शासन द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही स्वास्थ्य सुविधाएँ एलोपैथी आधारित ही होगी। जब किसी श्रद्धालु ने उन्हें बतलाया कि मेला क्षेत्र में आयुष चिकित्सालय भी है। रामदासजी ने आयुष चिकित्सालय जाकर औषधियाँ एवं परामर्श प्राप्त किया। दो खुराक दवा के बाद आँखों का संक्रमण कम होने लगा। तकलीफ कम हो गई और अब वे पूरी मेला अवधि में उज्जैन में रुककर प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में क्षिप्रा मैया में डुबकी लगाने के लिये तत्पर है। दूसरे शाही स्नान का भी उत्सुकता पूर्वक इंतजार कर रहे हैं।

सुनीता दुबे