Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh

मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित राष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय सम्मानों का विवरण

राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान

मधयप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग ने उत्कृष्टता और सृजन को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने की अपनी सुप्रतिष्ठित परम्परा का अनुसरण करते हुए सिनेमा के क्षेत्र में निर्देशन, अभिनय, पटकथा तथा गीत लेखन के लिए वार्षिक राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान की स्थापना की है। यह सम्मान उत्कृष्टता, दीर्घ साधाना, श्रेष्ठ उपलब्धि के मानदण्डों के आधार पर देय है। सम्मान के लिये चुने जाने के समय निर्देशक, कलाकार, पटकथाकार तथा गीतलेखक का सृजन-सक्रिय होना अनिवार्य है। प्रख्यात पार्श्व गायक एवं हरफनमौला कलाकार स्वर्गीय किशोर कुमार खण्डवा, मधयप्रदेश के रहने वाले थे। उन्होंने सिनेमा के क्षेत्र में अपनी बहुआयामी प्रतिभा का परिचय देते हुए न सिर्फ हिन्दुस्तान, बल्कि विश्व के अनेक देशों में जो जगह बनायी उससे न सिर्फ यश स्थापित हुआ, बल्कि मधयप्रदेश के गौरव में श्रीवृद्धि हुई। उन्हीं की स्मृति में राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान स्थापित किया गया है। इस सम्मान के अंतर्गत दो लाख रुपये की राशि और सम्मान पट्टिका भेंट की जाती है।

राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान

1.

श्री हृषिकेश मुखर्जी

1997-98

2.

श्री नसीरुद्दीन शाह

1998-99

3.

श्री गुलज़ार

1999-00

4.

श्री कैफी आज़मी

2000-01

5.

श्री बी.आर. चोपड़ा

2001-02

6.

श्री अमिताभ बच्चन

2002-03

7.

श्री गोविन्द निहलानी

2003-04

8.

श्री जावेद अख़्तर

2004-05

9.

श्री श्याम बेनेगल

2005-06

10.

श्री शत्रुघ्न सिन्हा

2006-07

11.

श्री मनोज कुमार

2007-08

12.

श्री गुलशन बावरा

2008-09

13.

श्री यश चोपड़ा

2009-10

14.

स्व.श्री देव आनंद मुम्बई - अभिनय

2010-11

15.

श्री सलीम खाँन, मुम्बई - पटकथा लेखन

2011-12

16.

श्री समीर, मुम्बई - गीतलेखन

2012-13

17.

सुश्री सई परांजपे, मुम्बई - निर्देशन

2013-14

18.

श्री दिलीप कुमार, मुम्बई - अभिनय

2014-15

प्रक्रिया के अनुसार संस्कृति विभाग सिनेमा के क्षेत्र के निर्घारित माधयमों में सक्रिय कलाकारों के नामांकन का अनुरोधा करता है। ये नामांकन संकलित करके विशेषज्ञों की चयन समिति के सामने अंतिम निर्णय के लिए रखे जाते हैं। इस समिति में सिनेमा के क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल होते हैं। चयन समिति को यह स्वतंत्रता है कि अगर कोई नाम छूट गया हो तो अपनी तरफ से उसे जोड़ ले। राज्य शासन ने चयन समिति की अनुशंसा को अपने लिए बंधानकारी माना है।