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 डॉ. भाई महावीर राज्यपाल मध्यप्रदेश का अभिभाषण

माननीय सदस्यगण,
 

1.

इक्कीसवीं शताब्दी के पहले विधानसभा सत्र में आपका हार्दिक स्वागत है।

2.

मेरी सरकार का मानना है कि बदलते समय में हमें यदि जन आकांक्षाओं पर खरा उतरना है तो हमें शासन शैली की नयी पध्दति विकसित करना होगी। इसी विचार से पिछले छ: वर्षों से हम निरंतर एक ऐसा शासन तंत्र विकसित कर रहे हैं जो उत्तरदायी, पारदर्शी और सहभागी है। यह पूरी प्रक्रिया शीर्ष से आरोपित नहीं है बल्कि लोगों के बीच से और उनकी भागीदारी से ही उभर रही है। यही लोकतंत्र का वह रूप है जिसमें निर्माण की अवधारणा नीचे से ऊपर की ओर होती है।

3.

मेरी सरकार ने राजनीति से लोकनीति का जो वैचारिक आधार स्वीकार किया था उस पर सक्रियता से अमल शुरू हो गया है। आधुनिक प्रौद्योगिकी, सहभागिता और सत्ता के विकेन्द्रीकरण जैसी कोशिशों ने प्रदेश के नागरिकों को वह अवसर दिया है जहां उन्हें अपनी आकांक्षाओं को प्रकट करने की जगह मिली है। एक ऐसा तंत्र और व्यवस्था आकार ले रही है जिसमें खुलापन है और जो लोगों के प्रति जवाबदेह है। यह इसलिये संभव हो सका है क्योंकि नेतृत्व और नीतियों में एक निरंतरता है जिसे प्रदेश की जनता लगतार अनुमोदित कर रही है।

4.

आज के दौर में देश के सभी राज्य कठिन आर्थिक परिस्थितियों से गुजर रहे हैं, मध्यप्रदेश इसका अपवाद नहीं है। सरकार ने प्रदेश की माली हालत पर श्वेत पत्र प्रकाशित कर जनता के सामने तथ्यों को रखा। इन तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना इस दृष्टि से जरूरी था कि जनता को यह जानकारी रहे कि राज कोष की क्या स्थिति है, वह किस प्रकार किन कामों पर खर्च हो रहा है। इस लेखे-जोखे के विश्लेषण से वित्तीय अनुशासन कायम करने के लिए कदम उठाये गये हैं और भविष्य के वित्तीय प्रबंधन की नींव भी रखी गयी है। वित्तीय स्थिति में सुधार लाने के लिए अल्पकालीन और दीर्घकालीन कदम उठाये गये हैं। वित्तीय नियंत्रण, प्रबंधन और मितव्ययिता से जो राशि उपलब्ध हो रही है, उसका उपयोग प्रदेश में सामाजिक प्राथमिकताओं के क्षेत्र में हो रहा है।

5.

वित्तीय प्रबंधन की दिशा में कठोर निर्णय लिये गये हैं जिनके दूरगामी परिणाम होंगे। इनमें नियुक्तियों पर रोक, पदोन्नति के लिए पद निर्माण पर रोक, तबादलों पर प्रतिबंध, वाहन और टेलीफोन सुविधा सीमित करना, अक्षम शासकीय कर्मचारियों-अधिकारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति जैसे निर्णय शामिल है। आयोजनेत्तर व्यय में भी कटौती की गई है। इसके अलावा प्रदेश में चल रही सभी योजनाओं और विभागीय संरचना का पुनरीक्षण किया जा रहा है। इसके आधार पर यह निर्णय किया जाएगा कि किन योजनाओं को जारी रखा जाए। जो पद अनावश्यक होंगे उन्हें क्रमश: समाप्त किया जाएगा।

6.

एक ओर जहां सरकारी अमले का आकार कम किया जा रहा है, वहीं सरकार की कार्यशैली में एक बुनियादी बदलाव आया है। हमारी योजनाओं, नीतियों और कार्यक्रमों का केन्द्र बिन्दु जनसामान्य हैं। इस दिशा में जो पहल की जा रही है वह भी समुदाय से ही उपजी है। इसके लिये जरूरी था कि ऐसी व्यवस्था हो जिसमें यह सब करने की जगह बने। सत्ता के विकेन्द्रीकरण और जनभागीदारी द्वारा हमने पहली बार यह जगह बनाई है।

7.

मेरी सरकार ने राज्य चलाने की एक नई पध्दति विकसित की है। जैसा महात्मा गांधी चाहते थे उसके अनरूप एक ताना-बाना बुना गया है। सबसे पहले पंचायत राज संस्थाओं और नगरीय निकायों को मजबूत कर अधिकार सम्पन्न बनाया गया और फिर दूसरे चरण में प्रशासकीय अधिकारों का विकेन्द्रीकरण कर जिला सरकार की अवधारणा को साकार किया है। जिला योजना समितियों को व्यापक अधिकार दिये गये हैं। अब जन प्रतिनिधि और लोक सेवक एक दूसरे के निकट आकर विकास के महत्वपूर्ण और बड़े निर्णय स्थानीय जरूरतों को देखते हुए लेते हैं। जिला सरकार के बनने से विकास कार्यों को गति मिली है।

8.

महात्मा गाँधी ने ग्राम स्वराज की परिकल्पना को मूर्त रूप देने के लिए 'ग्राम सरकार' के माध्यम से विकेन्द्रीकरण के सिलसिले को और आगे बढ़ाकर गाँवों तक ले जाने का निश्चय मेरी सरकार का है। हमारा विशास है कि विकेन्द्रीकरण की यह प्रक्रिया गाँवों में आपसी सहयोग और भाईचारे के परम्परागत मूल्यों को मजबूत करेगी। इसके फलस्वरूप जो सामुदायिक पूँजी बनेगी वह स्थानीय संसाधनों से गाँवों को आत्मनिर्भर बनायेगी। 'ग्राम सरकार' की योजना को कार्यरूप देने के लिए एक कार्यदल गठित किया गया है।

9.

विकास को गति देने के लिए प्रशासकीय जटिलताएं दूर की गईं हैं । बहुस्तरीय प्रशासन में स्तर कम कर प्रशासकीय शैली का सरलीकरण किया गया है। विभिन्न विभागों के सचिव, संचालक ओर वरिष्ठ अधिकारियों में निहित प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार अब जिला योजना समितियों को दिये गये हैं। जिला सरकार को अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए बजट व्यवस्था में बदलाव किया गया है। पहली बार सदन के समक्ष प्रत्येक जिले के अलग से बजट प्रस्तुत किया जाएगा।

10.

हमने प्रदेश भर में नगरीय निकायों ओर पंचायतों के चुनाव कराएं हैं। नगरीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों ने अपना काम आरंभ कर दिया है और शीघ्र ही पंचायतों के लिए चुने गए प्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारियां संभाल लेंगे। पिछले पांच वर्षों का इन स्वायत्त संस्थाओं में हमारा अनुभव अच्छा रहा है। पंचायतों के लिए चुने गये ज्यादातर प्रतिनिधियों ने अपना दायित्व गंभीरता से पूरा कर पंचायतों की भूमिका को विकास कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण बनाया है।

11.

सरकार ने इस विधानसभा के प्रथम सत्र में यह वादा किया था कि मध्यप्रदेश में प्रतिनिधि लोकतंत्र के स्थान पर लोक सत्तात्मक व्यवस्था कायम की जाएगी। इस ध्येय से ग्राम पंचायत और नगर निकायों में जनता अगर चाहे तो पूरे कार्यकाल में एक बार अपने प्रतिनिधि को वापस बुला सकेगी। मुझे यह बताने में खुशी है कि मध्यप्रदेश देश में ऐसा पहला प्रदेश है जहां जनता को यह अधिकार मिल चुका है । मुझे विश्वास है कि जनता को इस महत्वपूर्ण अधिकार के मिलने से निर्वाचित प्रतिनिधि जनता और लोकतंत्रीय संस्थाओं के प्रति अब अधिक समर्पित और निष्ठावान होंगे।

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हमारा प्रदेश विकसित प्रदेशों की श्रेणी में आए, इसके लिये जरूरी है कि मानव संसाधन सूचकांक में सुधार हो। शासन स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में कामगर कदम उठाकर इस दिशा में बदलाव लाने के लिए निरन्तर सक्रिय है। प्रदेश के नागरिकों को अच्छी चिकित्सा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की हमारी प्रतिबध्दता रही है। मध्यप्रदेश ने सघन पल्स पोलियो अभियान, कुष्ठ नियंत्रण, एड्स नियंत्रण और अंधत्व निवारण जैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई है। माताओं व शिशुओं के लिए चलाए जाने वाले 'प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम' का प्रदेश में भावी क्रियान्वयन चल रहा है। भोपाल के गैस प्रभावित लोगों को आधुनिकतम चिकित्सा सुविधायें मुहैया कराने के प्रयासों का विस्तार करते हुए इस वर्ष कमला नेहरू चिकित्सालय प्रारंभ किया गया है।

13.

हमने स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्षेत्र में जनभागीदारी सुनिश्चित की है और समय के साथ यह सहभगिता बढ़ी है। जनभागीदारी के प्रयासों से चिकित्सा महाविद्यालयों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक संस्थाओं में प्रबंधन और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय संसाधन विकसित किये गये हैं। परिणामस्वरूप, अब प्रदेश में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्रदेश भर में रोगी कल्याण समितियां चिकित्सा संस्थाओं के प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर ग्रामीण क्षेत्रों के सभी नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने के लिए ''सामुदायिक स्वास्थ्य राजीव गाँधी मिशन'' स्थापित किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए 'स्वास्थ्य जीवन सेवा गारंटी योजना' तैयार की जा रही है।

14.

जनसंख्या में वृध्दि हमारे समय की सबसे बड़ी चुनौती है। बढ़ती हुई जनसंख्या विकास की अवधारणा को ही नकारती है। मध्यप्रदेश में यह समस्या गंभीर रूप में है जिसके कारण जीवन स्तर बेहतर बनाने के प्रयासों के वांछित परिणाम नहीं मिलते हैं । हमने बढ़ती जनसंख्या की गंभीर समस्या को समझा और राज्य के लिए जनसंख्या नीति बनायी है। इस नीति का उद्देश्य शीघ्र ही प्रदेश की जनसंख्या में स्थायित्व प्राप्त करना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रजनन दर 4 से घटाकर वर्ष 2001 तक 2.1 की जाएगी। महिलाओं और बच्चों को स्वास्थ्य का बुनियादी अधिकार मिले, यह प्रावधान भी इस नीति में हैं। 26 जनवरी 2001 के बाद न्यूनतम आयु से कम आयु में विवाह करने वाले व्यक्ति सरकारी नौकरी के पात्र नहीं होंगे। इसी तिथि के बाद जिन व्यक्तियों की दो से ज्यादा संताने होंगी वे न तो शासकीय नौकरी ओर शासकीय योजनाओं के लाभ के पात्र होंगे और न ही वे मण्डी समितियों, सहकारी संस्थाओं, पंचायतों और नगरीय निकायों के चुनाव लड़ सकेंगे। इस नीति को लागू करने में सामुदायिक समर्थन प्राप्त किया जाएगा और कार्यक्रम क्रियान्वयन में पंचायत राज संस्थाओं, निजी क्षेत्र और गैर सरकारी क्षेत्र के साथ सहयोग बढ़ाया जायेगा। जनसंख्या नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य जनसंख्या एवं विकास परिषद कार्य करेगी।

15.

शिक्षा का बुनियादी हक प्रदेश के हर नागरिक को मिले, यह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है । प्रदेश में पिछले पाँच वर्षों में व्यवस्थित और योजनाबध्द स्वरूप में शिक्षित समाज को आकार देने की लगातार कोशिशें की गईं हैं । शिक्षा गारंटी योजना द्वारा प्राथमिक शिक्षा के लोकव्यापीकरण के बाद अब माध्यमिक शिक्षा के लोकव्यापीकरण को सफल बनाने की मुहिम चल रही है, यह कार्यक्रम मिशन प्रणाली के अन्तर्गत संचालित होगा। अब प्रदेश भर में एक समयबध्द कार्यक्रम के तहत हर तीन किलामीटर के दायरे में मिडिल स्कूल खोलने की स्वीकृति दी जा रही है जिसका सर्वाधिक लाभ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों को मिलेगा।

16.

आगामी जनगणना के पहले प्रदेश में साक्षरता का स्तर 70 प्रतिशत प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समुदाय आधारित सरक्षरता की मुहिम 'पढ़ना-बढ़ना' शुरू की गई है। साक्षरता के इस आन्दोलन में 2.42 लाख 'पढ़ना-बढ़ना' समितियों के माध्यम से लगभग 64 लाख लोगों को साक्षर बनाया जा रहा है। गुरूजी को प्रशिक्षण और पठन-पाठन सामग्री शासन उपलब्ध कराता है। वर्ष के अंत में सभी पढ़ना सीखने वालों का मूल्यांकन किया जायेगा। प्रत्येक सफल साक्षर व्यक्ति पर गुरूजी को 100 रूपये गुरू दक्षिणा शासन द्वारा दी जायेगी।'पढ़ना-बढ़ना' समितियों को स्व-सहायता समूहों के रूप में मान्य किया गया है। इससे शासन के विभिन्न आर्थिक विकास के कार्यक्रमों से पात्र व्यक्ति लाभान्वित होंगे।

17.

प्रदेश में खेलों के स्तर सुधार लाने के लिए आगामी शैक्षणिक सत्र से खेल केलेण्डर लागू किया जायेगा। इस पहल से प्रदेश की सभी शिक्षण संस्थाओं में एकीकृत रूप से खेल गतिविधियाँ संचालित होंगी।

18.

किसी भी समाज की प्रगति का एक प्रमुख संकेतक उसमें महिलाओं और बच्चों की स्थिति है। सरकार ने इस प्राथमिकता को रेखांकित किया है। एक सुविचारित महिला नीति पर अमल कर हम लगातार महिला सशक्तीकरण की दिशा में काम कर रहे हैं। नीति के क्रियान्वयन की सतत् समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया गया है कि महिलाओं और बच्चों को उनके लिए संचालित योजनाओं का लाभ मिले। उनके लिए चलाये जा रहे स्वास्थ्य और पोषणाहार कर्यक्रमों मे नतीजे अब स्पष्ट दिखने लगे हैं।

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