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विधानसभा के इस सत्र में आपका स्वागत है। सत्र के दौरान आपको अपने संसदीय कार्य पूरे करना हैं, इन्हें आप सफलतापूर्वक पूरा करें, मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

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1.

हमारी लोकतंत्रीय व्यवस्था को नगरीय संस्थाओं और पंचायत राज संस्थाओं के प्रतिनिधि, अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और स्पंदनशील बनाते हैं। नगरीय संस्थाओं और पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव प्रदेश में इस वर्ष शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए हैं। नगरीय संस्थाओं में चुने गये प्रतिनिधियों ने अपने उत्तरदायित्वों का निर्वाहन शुरू कर दिया है। शीघ्र ही पंचायत राज संस्थाओं के प्रतिनिधि भी ग्रामीण विकास में अपना योगदान देने लगेंगे।

2.

दिसंबर 2003 में जब वर्तमान सरकार ने सत्ता परिवर्तन के पश्चात राज्य की बागडोर संभाली, उस समय प्रदेश की वित्तीय स्थिति और आधारभूत अधोसंरचना की हालत बहुत खराब थी। मेरी सरकार ने एक ओर जहां वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाने के कदम उठाये वहीं अधोसंरचना विकास की भी ठोस पहल की। व्यय में हो रही अनियंत्रित वृद्धि के कारण वर्ष 2003-04 में राजस्व घाटा चार हजार 475 करोड़ रुपये हो गया था। सरकार ने व्यय में हो रही इस अनियंत्रित वृद्धि को नियंत्रित किया जिसके परिणामस्वरुप अब यह घाटा सीमित होने का अनुमान है।

3.

बेहतर वित्तीय प्रबंधन के द्वारा जन सामान्य पर बिना अतिरिक्त भार डाले हुये भी राजस्व आय में वृद्धि की गई है। चालू वर्ष में राजस्व संग्रहण लक्ष्य से अधिक प्राप्त होने की संभावना है।

4.

मेरी सरकार ने विकास कार्यों के लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने के कई कदम उठाये हैं। अल्पबचत संग्रहण के माध्यम से वर्तमान वित्तीय वर्ष के दिसम्बर माह तक पिछली वर्ष की तुलना में 61 प्रतिशत अधिक राशि संग्रहण की गई। ऐसे खर्चे जो आवश्यक नहीं हैं उन्हें कम करने के लिये मितव्ययता के उपाय किये गये। विकास के लिये अधिक धनराशि जुटाने के साथ ही साथ बेहतर वित्तीय प्रबंधन के कारण चालू वित्तीय वर्ष में प्रदेश में एक दिन भी ओवर ड्राफ्ट की स्थिति नहीं आई और न ही कोषालय से आहरण पर रोक लगाई गई।

5.

2005-06 के लिये राज्य की वार्षिक आयोजना सात हजार 471 करोड़ रुपयों की निर्धारित हुई है। पिछले वर्ष की तुलना में योजना का आकार 11.34 प्रतिशत अधिक है। आयोजन के राज्य सरकार के प्रस्ताव को योजना आयोग ने बिना किसी कांट-छांट के मंजूरी दी है। चालू वर्ष के प्रथम छ: माह में राज्य सरकार के प्रयासों से कर राजस्व में वृद्धि और वित्तीय संतुलन के अन्य सूचकांकों को ध्यान में रखते हुए योजना आयोग द्वारा आयोजना प्रस्ताव को यथावत स्वीकार किया गया है। अब तक की सबसे बड़ी यह वार्षिक आयोजना यह दर्शाती है कि मध्यप्रदेश अब आर्थिक विकास की उच्च दर प्राप्ति की दिशा में बढ़ रहा है।

6.

ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए गौण खनिजों से प्राप्त होने वाले राजस्व का लाभ प्रदेश की सभी पंचायतों को प्राप्त हो सके, इस उद्देश्य से गौण खनिजों की नीलामी अब जिला कलेक्टर के माध्यम से की जायेगी। नीलामी से प्राप्त होने वाली आय का उचित ढंग से वितरण करने की व्यवस्था की गई है।

7.

मेरी सरकार प्रदेश को औद्योगिक दृष्टि से विकसित राज्यों के बराबरी पर लाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। अधोसरंचना के विकास, रोजगार के अधिकाधिक अवसरों का निर्माण, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग, बीमार उद्योगों का पुर्नवास और उद्योग मित्र प्रशासन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उद्योग संवर्धन नीति-2004 एवं कार्य योजना घोषित कर अमल में लाई जा रही है।

8.

सिंगल विन्डो क्लियरेंस के लिए साधिकार समितियों और मध्यप्रदेश ट्रेड एवं इन्वेस्टमेंट फेसिलिटेशन कारपोरेशन लिमिटेड का गठन किया गया है। इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड-इंडस्ट्रियल पार्क्स का विकास एवं स्वशासी समितियों द्वारा औद्योगिक क्षेत्र प्रबंधन की कार्रवाई चल रही है। बीमार एवं बंद उद्योगो को प्रारम्भ करने के लिये मध्यप्रदेश लघु उद्योग पुनजीर्वन योजना लागू की गई है।

9.

प्रदेश में एक ऐसा औद्योगिक वातावरण विकसित हो रहा है जिसके परिणामस्वरुप निवेशक प्रदेश में निवेश करने के लिये आगे आ रहे हैं। नई औद्योगिक नीति घोषित होने के बाद प्रदेश में कई हजार करोड़ रुपयों के पूंजी निवेश के नये प्रस्ताव प्राप्त हुये हैं। भारत सरकार द्वारा इंदौर के निकट आटो क्लस्टर के विकास के लिये लगभग 73 करोड़ रुपये की योजना मंजूर की गई है ।

10.

विदेशों में बाजार खोज के तहत अप्रवासी भारतीयों के माध्यम से प्रथम बार अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर रमादान फेस्टीवल शारजाह में पार्टनर स्टेट के रूप में मध्यप्रदेश ने भागीदारी की है। मेले में प्रदेश के हस्तशिल्पियों और बुनकरों ने अपने उत्पादों और कलाओं का प्रदर्शन किया। भागीदारी के उत्साहजनक परिणाम मिले हैं। निवेशकों ने प्रदेश में निवेश और व्यापार संबंध बनाने की इच्छा व्यक्त की है।

11.

पिछले कई वर्षों से प्रदेश में सड़कों की उपेक्षा रही है। अच्छी सड़कें न होने से व्यापक असंतोष रहा है। मेरी सरकार ने सड़कों के विकास को अपनी उच्च प्राथमिकता में रखा है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 410 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गो का सुधार किया गया। माह मार्च 2005 तक और 200 किलोमीटर मार्गों का सुधार पूरा करने का प्रयास है।

12.

केन्द्रीय सड़क निधि के अन्तर्गत लगभग 337 करोड़ रुपये लागत की 82 सड़कों के निर्माण की स्वीकृति प्राप्त हुई है, जिनकी लम्बाई दो हजार 83 किलोमीटर है। स्वीकृत कार्यों में से एक हजार 123 किलोमीटर लम्बाई के 37 कार्य पूर्ण किये जा चुके हैं।

13.

मण्डी निधि से प्रदेश में 648 करोड़ रुपयों की लागत से 323 सड़कों के निर्माण कार्य स्वीकृत हैं, इन निर्माण कार्यों की कुल लम्बाई पाँच हजार 833 किलोमीटर है। नवम्बर 2004 तक इस योजना के अन्तर्गत चार हजार 219 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है।

14.

नाबार्ड योजना में 414 सड़कें और 217 पुल जिनकी लागत लगभग 628 करोड़ रुपये है, स्वीकृत हैं। बनाई जाने वाली सात हजार 96 किलोमीटर सड़कों में से चार हजार 525 किलोमीटर लम्बाई की सड़कों का कार्य पूर्ण किया जा चुका है और 107 पुलों का निर्माण हो चुका है। शेष कार्यों का निर्माण प्रगति पर है।

15.

फास्ट ट्रेक योजना के अन्तर्गत 380 राज्य और जिला मार्गो का उन्नयन किया जा रहा है । स्वीकृत सड़कों की लम्बाई सात हजार 387 किलोमीटर है, जिसके लिए 307 करोड़ रुपयों की स्वीकृति प्राप्त हुई है। अभी तक चार हजार 151 किलोमीटर सड़कों का उन्नयन हो चुका है।

16.

बाण्ड - बी.ओ.टी. योजना के अन्तर्गत 950 करोड़ रुपयों की लागत से दो हजार 17 किलोमीटर लम्बाई की 15 सड़कों का निर्माण कार्य जारी है। नवम्बर माह तक एक हजार 205 किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूरा हो चुका है और छ: नवनिर्मित मार्गो पर परिवहन प्रारम्भ हो गया है।

17.

प्रदेश में एशियन विकास बैंक से प्राप्त के माध्यम से एक हजार 536 करोड़ रुपयों की राशि से 16 सौ किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाना है। योजना के प्रथम चरण में 333 किलोमीटर सड़क निर्माण के कार्यादेश हो चुके हैं। द्वितीय चरण में निर्मित होने वाली सड़को की निविदा प्रक्रिया जारी है।

18.

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत चालू वित्त वर्ष में नवम्बर माह तक 740 किलोमीटर सड़कें निर्मित हो गई हैं। वर्ष 2005-06 में तीन हजार किलोमीटर सड़कों के निर्माण का लक्ष्य है, जिससे एक हजार गांव पक्की सड़कों से जुड़ेंगे।

19.

मध्यप्रदेश में बिजली से संबंधित सभी क्षेत्रों में पिछले कई वर्षो से स्थिति चिन्ताजनक रही है। मेरी सरकार ने वर्ष 2007 तक प्रदेश को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की एक सुविचारित योजना पर अमल प्रारम्भ किया है। योजना के अन्तर्गत उत्पादन क्षमता में वृद्धि, वितरण एवं पारेषण हानि न्यूनतम स्तर पर लाना, पारेषण एवं वितरण प्रणाली का सुदृढ़ीकरण कर गुणवत्ता पूर्ण बिजली का प्रदाय करना और शत प्रतिशत मीटरीकरण जैसे कदम शामिल हैं।

20.

पिछले एक वर्ष के दौरान विद्युत उत्पादन कार्यक्रम को गति दी गई है, जिसके परिणामस्वरुप इंदिरा सागर परियोजना की 125-125 मेगावाट की छ: इकाईयां क्रियाशील की गई हैं। विद्युत प्रदाय की स्थिति संतोषजनक रही एवं पूर्व निर्धारित शेडयूल के अनुसार विद्युत प्रदाय सुनिश्चित किया जा रहा है। इसी वर्ष दीवाली पर मांग के अनुरुप पाँच हजार 241 मेगावाट विद्युत आपूर्ति की गई जो कि अब तक की सर्वोच्च मांग है। इसी अवधि में राजस्व प्राप्ति में लगभग नौ प्रतिशत की वृद्धि अर्जित की गई है।

21.

चालू वित्तीय वर्ष में दिसंबर 2004 तक 31हजार 439 खराब ट्रांसफारमर बदले गये। ताकि किसानों को सिंचाई के लिये बिजली मिलती रहे। किसानों को सिंचाई की तात्कालिक आवश्यकता पूरी करने के लिये दिसंबर 2004 तक चार लाख 32 हजार 742 अस्थाई पम्प कनेक्शन दिये गये हैं।

22.

बिजली की बढ़ती हुई मांग को देखते हुये विद्युत उत्पादन की क्षमता बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। बाणसागर टोंस जल विद्युत परियोजना की 10-10 मेगावाट क्षमता की दो इकाईयों और 60 मेगावाट क्षमता की मड़ीखेड़ा जल विद्युत परियोजना की 20-20 मेगावाट क्षमता की दो इकाईयों से आगामी मानसून में विद्युत उत्पादन प्रारंभ हो जायेगा। बिरसिंहपुर ताप विद्युतगृह में 500 मेगावाट क्षमता की एक इकाई का कार्य प्रगति पर है, जिसे सितंबर 2006 में क्रियाशील करने की योजना है। सरदार सरोवर परियोजना से वर्ष 2006 में प्रदेश के हिस्से की 826 मेगावाट बिजली मिलना भी प्रारंभ हो जायेगी। अमरकंटक ताप विद्युतगृह में 210 मेगावाट क्षमता की एक नई इकाई की स्थापना का कार्य अक्टूबर 2004 से प्रारम्भ किया गया है, यह इकाई फरवरी 2007 में उत्पादन प्रारंभ करेगी। वर्ष 2007 तक ओंकारेश्वर परियोजना से 520 मेगावाट विद्युत उत्पादन होना संभावित है।

23.

एशियाई विकास बैंक द्वारा पारेषण एवं वितरण प्रणाली के सुदृढ़ीकरण के लिये लगभग 920 करोड़ रुपये का ऋ़ण और नाबार्ड द्वारा पारेषण परियोजना के लिये 81 करोड़ रुपये का ऋ़ण स्वीकृत किया गया है। इस वित्तीय वर्ष के अन्त तक दो हजार 905 एम.व्ही.ए. क्षमता के अति उच्चदाब उपकेन्द्र तथा एक हजार 541 सर्किट किलोमीटर पारेषण लाइन और आगामी वित्तीय वर्ष में एक हजार 139 एम.व्ही.ए. क्षमता के अति उच्चदाब उपकेन्द्र तथा छ: सौ सर्किट किलोमीटर पारेषण लाइन के कार्य पूरा करने का कार्यक्रम है।

24.

मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम गौ संवर्धन से स्वावलम्बन परियोजना के तहत प्रदेश की विभिन्न गौ शालाओं में बायोगैस संयंत्रों की स्थापना का कार्य कर रहा है। प्रथम चरण में 32 गौ-शालाओं में संयंत्रों की स्थापना की जा रही है। इस परियोजना के अन्तर्गत बायोगैस से विद्युत उत्पादन होगा और उच्च गुणवत्ता की जैविक खाद भी प्राप्त होगी। अपनी आवश्यकता से अधिक विद्युत एवं जैविक खाद का विक्रय कर गौ-शालायें स्वावलंबी हो सकेंगी।

25.

ऊर्जा के जो नए स्रोत खोजे जा रहे हैं उनमें गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों का दोहन भी शामिल है। प्रदेश में गैर परम्परागत ऊर्जा के नए स्रोत कोल बेड मिथेन की उपलब्धता के आकलन के लिए चार क्षेत्रों में पेट्रोलियम एक्सप्लोरेशन लाइसेंस मंजूर किए गए हैं।

26.

मेरी सरकार ने वनोपज की मांग और आपूर्ति के अंतर को कम करने के लिए वन संसाधनों के संवर्धन के प्रयास किए हैं। बिगड़े वनों के वनीकरण को प्राथमिकता दी जा रही है। वनविहीन क्षेत्रों को वनाच्छादित करने की कार्य योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष में 21 हजार 278 हैक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण किया गया है।

27.

सुनिश्चित वृक्षारोपण योजना के तहत वर्ष 2008-09 तक 25 हजार 500 हैक्टेयर क्षेत्र में वृक्ष लगायें जायेंगे। गैर वन भूमि में वर्ष 2008-09 तक सात करोड़ वृक्ष लगाये जायेंगे।

28.

औषधीय पौधों एवं सुगन्धित पौध विकास के लिए रणनीति तैयार कर उनका उत्पादन व्यापक रुप से बढ़ाने की योजना पर काम शुरु कर दिया गया है। वर्तमान उत्पादन स्तर 10 हजार टन को बढ़ाकर वर्ष 2008-09 तक 20 हजार टन किये जाने का लक्ष्य है। आगामी चार वर्षो में औषधि एवं सुगन्धित पौधों के लिए मंडिया स्थापित की जायेंगी।

29.

मेरी सरकार ने कृषि क्षेत्र में अगले चार वर्षों में उत्पादन से आय को दो गुना करने, उत्पादकता बढ़ाने और फसलों में विविधता लाने की दिशा में ठोस उपायों के साथ किसानों को समय पर उच्च गुणवत्ता के खाद, बीज और सिंचाई की उपलब्धता सुनिश्चित करने को वरीयता दी है। गत वर्ष के सात लाख क्विंटल बीज की तुलना में इस वर्ष नौ लाख 60 हजार क्विंटल प्रमाणित बीज किसानों को उपलब्ध कराया गया है ।

30.

राज्य शासन ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने की एक सुविचारित रणनीति तैयार की है। जिसके तहत प्रतिवर्ष 15 हजार ग्रामों में कृषि विकास के कार्यक्रम संचालित किये जायेंगे। कृषि विभाग के मैदानी कार्यकर्ताओं को अपने कार्यक्षेत्र के दो-दो गांव चुनकर वहां सभी प्रकार की कृषि तकनीकी के प्रयोग कर उत्पादन के लक्ष्य हासिल करने के निर्देश दिये गये हैं। प्रदेश के लगभग सात हजार 500 कृषि विस्तार अधिकारी यह कार्य प्रतिवर्ष दो नये गांवों में करेंगे और इस प्रकार लगभग चार वर्षों में प्रदेश के लगभग सभी 52 हजार आबाद गांवों में कृषि उत्पादन से आय दो गुना करने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकेगा।

31.

प्रदेश के प्रत्येक विकासखण्ड में इस वर्ष जैविक ग्रामों की संख्या बढ़ाकर पाँच कर दी गई है। इस प्रकार एक हजार 565 गांवों में जैविक कृषि पद्धति के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने के प्रयोग किये जा रहे हैं। जैविक खेती और गौ संवर्धन में सीधा संबंध है। शासन द्वारा पशुधन एवं गौवंश नस्ल सुधार कार्यक्रम को अपनाया गया है। सभी कृषि प्रक्षेत्रों पर गौ पालन की व्यवस्था की गई है।

32.

प्रदेश में इस वर्ष दाल एवं संतरे के निर्यात के लिए दो नये कृषि निर्यात जोन स्वीकृत हुए हैं, जिन्हें मिलाकर प्रदेश में कुल पाँच कृषि निर्यात जोन स्वीकृत हो चुके हैं। इससे दाल एवं संतरे के उत्पादकों को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध हो सकेगा। प्रदेश की मंडियों में सही तौल व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिये इलेक्ट्रानिक तौल कांटे स्थापित किये जा रहे हैं।

33.

उद्यानिकी को प्रदेश में एक अभियान के रूप में लिया जा रहा है। आगामी पाँच वर्षों में उद्यानिकी क्षेत्र का रकबा और उत्पादन दो गुना करने का लक्ष्य तय किया गया है। हमारा प्रयास है कि शीघ्र ही प्रदेश में उद्यानिकी को व्यवसायिक स्वरुप मिल सके।

34.

मेरी सरकार ने अपने सीमित वित्तीय संसाधनों से वर्ष 2004 में इल्ली के प्रकोप से प्रभावित खरीफ फसलों के लिए किसानों को अनुदान सहायता उपलब्ध कराई है। किसानों को इस प्रकार की अनुदान सहायता पहली बार दी गई है। भारत सरकार से भी सहायता की अपेक्षा की गई थी। प्रदेश के छ: जिले के किसानों को 45 करोड़ रुपये से ज्यादा की अनुदान राशि मंजूर की गई है।

35.

मेरी सरकार ने सहकारिता के माध्यम से साख व्यवस्था और विपणन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के प्रयास किये हैं। कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों की ब्याज दरें जो 13 से 17 प्रतिशत तक थीं, उन्हें कम कर 9 से 11 प्रतिशत किया गया है। ब्याज दरों में की गई इस कमी से एक लाख चौंतीस हजार 726 किसानों को 10 करोड़ 40 लाख रुपये राशि की ब्याज राहत मिली है। सहकारी बैंकों द्वारा किसानों को ऋ़ण सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 23 लाख से ज्यादा किसानों को क्रेडिट कार्ड प्रदाय किये गये हैं।

36.

सहकारिता के क्षेत्र को अधिक प्रभावी और जनोन्मुखी बनाने एवं अनावश्यक हस्तक्षेप से मुक्त रखने के लिए नंबवर 2004 में सहकारी अधिनियम संशोधित कर सांसद, विधायक, जिला पंचायत, जनपद पंचायत, मंडी समिति और नगरीय संस्थाओं के निर्वाचित पदाधिकारियों के सहकारी संस्थाओं में पदाधिकारी बनने पर रोक लगाई गई है। दो लगातार कार्यकाल पूर्ण करने वाले व्यक्ति भी अब पुन: पदाधिकारी नहीं बन सकेंगे। संशोधित अधिनियम में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों को पर्याप्त आरक्षण का प्रावधान किया गया है। वर्षो से बंद सहकारी न्यायाधिकरण पुन: प्रारम्भ हो गया है।

37.

राज्य शासन ने प्रदेश के समस्त 55 हजार 897 गांवों के एक करोड़ 10 लाख भू-स्वामियों के पाँच करोड़ 73 लाख खसरों का भू-अभिलेख से संबंधित एक विशाल इलेक्ट्रानिक डाटाबेस तैयार किया है। भू-अभिलेखों का अत्याधुनिक प्रणाली द्वारा संधारण के परिणामस्वरूप नामांतरण और पंजीयन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाई गई है। अभी तक प्रदेश के 21 जिलों के भू-अभिलेख वेब साईट पर उपलबध कराये जा चुके हैं, शेष जिलों के अभिलेख भी शीघ्र वेब साईट पर उपलब्ध होंगे। प्रदेश में सभी तहसील मुख्यालयों पर कम्प्यूटरीकृत अभिलेख प्रतियां प्रदाय करने की व्यवस्था को ग्राम स्तर तक पहुंचाने का प्रयास विभिन्न जिलों में किया गया है। इस व्यवस्था के अन्तर्गत किसान गांवों में ही पटवारी के माध्यम से प्रमाणित कम्प्यूटरीकृत नकल प्राप्त कर सकते हैं।

38.

राज्य शासन द्वारा प्रदेश में अपूर्ण सिंचाई योजनाओं को पूरा कर सिंचाई सुविधाएं बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। लम्बे समय से निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं को शीघ्रता से पूर्ण करने के लिये केन्द्र सरकार,नाबार्ड और अन्य वित्तीय संस्थाओं से बड़े पैमाने पर संसाधन जुटाये जा रहे हैं। चालू वित्तीय वर्ष के अंत तक 77 हजार हैक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता निर्मित किये जाने का लक्ष्य है।

39.

राज्य में निर्मित सिंचाई क्षमता में से केवल पचास प्रतिशत क्षेत्र में वास्तविक सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो पा रही है। इस अंतर को कम करने की दृष्टि से प्रदेश के 30 जिलों में निर्मित 654 चुनी हुई सिंचाई परियोजनाओं का पुनरुद्वार और कमांड क्षेत्र के समग्र विकास के लिये मध्यप्रदेश वाटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिंग परियोजनाओं के लिये एक हजार 919 करोड़ रुपयों की सहायता विश्व बैंक से प्राप्त करने का अनुबंध किया जा चुका है । यह महत्वाकांक्षी परियोजना छ: वर्षो में पूरी होगी और इसके माध्यम से पूर्व से निर्मित सिंचाई क्षमता पाँच लाख हैक्टेयर में पूर्ण सिंचाई सुविधा का लाभ प्राप्त होगा।

40.

वर्ष 2005-06 में धार जिले की मान परियोजना पूरी किये जाने का कार्यक्रम है । इस योजना के पूरा हो जाने पर अधिकांश अनुसूचित जनजाति के किसानों को पन्द्रह हजार हेैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी । योजना का कार्य अंतिम चरण में है और अब तक पांच हजार हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता निर्मित हो गई है। झाबुआ जिले में जोबट परियोजना भी वर्ष 2006 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है, इस परियोजना से नौ हजार 848 हैक्टर भूमि में सिंचाई हो सकेगी। रानी अवंतीबाई सागर परियोजना के वर्ष 2007 तक पूरा करने का लक्ष्य है, इस योजना के पूरा होने पर एक लाख 57 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता निर्मित होगी।

41.

बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार की और प्रेरित करने के लिये एक अगस्त 2004 से दीनदयाल रोजगार योजना प्रारम्भ की गई है। रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में रोजगार निर्माण बोर्ड का गठन किया गया है।

42.

गांवों के समग्र विकास के लिए प्रदेश में गोकुल ग्राम योजना प्रारंभ की गई है। प्रथम चरण में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में इस वर्ष पाँच गांवों का चयन कर उन्हें गोकुल ग्राम के रूप में विकसित किया जा रहा है। जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इन गांवों में कृषि, शिक्षा, पशुपालन, स्वास्थ्य, जल, स्वच्छता, ऊर्जा और पर्यावरण की गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन गांवों में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए तीन-तीन गायें प्रदान करने का भी प्रावघान है।

43.

मेरी सरकार की नीतियों और कल्याणकारी कार्यक्रमों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्गो, महिलाओं और बच्चों का महत्वपूर्ण स्थान है। हमारी मान्यता है कि जब तक इन वर्गों का जीवन स्तर ऊंचा नहीं उठता,समाज में समरसता नहीं आ सकती।

44.

नए शिक्षा सत्र से अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए 56 उत्कृष्टता शिक्षा केन्द्र प्रारम्भ किए जाएंगे। छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दृष्टि से छात्रावासों का उन्नयन किया जायेगा।

45.

मेरी सरकार ने अनुसूचित जाति की कन्याओं के विवाह में सहयोग देने के लिए सौभाग्यवती योजना इस वर्ष लागू की है। योजना के तहत गरीब परिवारों की कन्याओं के विवाह के लिए पाँच हजार रुपये की सहायता प्रदान की जा रही है, पहले यह राशि एक हजार रुपये थी।

46.

मेरी सरकार ने प्रदेश के उन 11 जिलों के लिए दो करोड़ रुपये की एक योजना स्वीकृत की है जिनमें विमुक्त घुमक्कड़ और अर्ध घुमक्कड़ जाति के लोगों का बाहुल्य हैं। इन जातियों के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास के लिए यह योजना इनके लिए गठित विकास अभिकरण के माध्यम से क्रियान्वित की जा रही है।

47.

सहरिया, बैगा और भारिया जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों के शैक्षणिक उत्थान के लिए उनके क्षेत्रों में संचालित सौ प्राथमिक शालाओं को 50 सीट की क्षमता वाली आश्रम शालाओं में बदलने की योजना क्रियान्वित की जायेगी। इन विशेष पिछड़ी जनजातियों की छात्राओं के अलावा छात्रों को भी गणवेश देने की योजना है, जिसका लाभ पचपन हजार 920 छात्रों को मिलेगा।

48.

उक्त विशेष पिछड़ी तीनों जनजातियों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने की दृष्टि से उद्यानिकी,पशुपालन,ग्राम उद्योग और मछली पालन से संबंधित रोजगार योजनाएं संचालित की जा रही हैं जिन्हें जारी रखा जायेगा। हमारी कोशिश है कि शीघ्र ही इन विशेष पिछड़ी जनजातियों के परिवार भी सामान्य जनों के मानव सूचकांक के बराबर आ सकें ।

49.

कक्षा नौ में पढ़ने वाली अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाली अन्य वर्गो की ऐसी बालिकाओं को, जो अपने गांव से बाहर के स्कूल में पढ़ने जाती हैं, साईकल प्रदान करने की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी गई हैं। राज्य शासन के इस कदम से महिला शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और छात्राओं द्वारा शाला त्याग की प्रवृत्ति पर नियंत्रण हो सकेगा।

50.

राज्य शासन प्रदेश की जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के प्रति सचेत है। प्रदेश में परम्परागत मौखिक जनजातीय साहित्य की समृद्ध विरासत है। पारम्परिक कलाओं के साथ ही साथ लोक साहित्य के अभिलेखीकरण और उसके प्रकाशन तथा प्रसारण की एक योजना तैयार कर उसका क्रियान्वयन किया जा रहा है।

51.

प्राथमिक स्तर पर सकल नामांकन अनुपात वर्तमान के 103 प्रतिशत से वर्ष 2006-07 में 120 प्रतिशत तक लाया जायेगा और प्रारम्भिक स्तर के वर्तमान के 96.8 प्रतिशत से इसे 2008-09 तक 120 प्रतिशत तक लाया जायेगा। ठहराव दर 85.3 प्रतिशत से वर्ष 2010 तक शत-प्रतिशत की जायेगी। शिक्षा पूर्णता दर वर्ष 2010 तक 51.2 प्रतिशत से शत-प्रतिशत की जायेगी।

52.

मेरी सरकार प्रदेश में मध्याह्र भोजन कार्यक्रम दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ संचालित कर रही है, इस कार्यक्रम ने स्कूलों को एक नया चेहरा दिया है। बच्चे अब स्कूल जाने के लिए तत्पर हैं और छुआछूत की दीवारें टूट रही हैं। शिक्षक अब स्कूलों में नियमित रूप से पहुंच रहे हैं। एक लाख से भी अधिक लोगों को इस कार्यक्रम के अन्तर्गत रोजगार मिला है। इस योजना को व्यापक जन सहयोग भी मिला है। पूरे प्रदेश में योजना का लाभ लगभग 80 लाख बच्चों को प्रतिदिन मिल रहा है।

53.

मेरी सरकार ने एक विशेष अभियान के तहत सामान्य विद्यालयों में एक लाख दस हजार निशक्त बच्चों को प्रवेश दिया है। इनमें से 73 हजार बच्चों का चिकित्सकीय मूल्यांकन कराया जा चुका है। निशक्त बच्चों को पुस्तकें, स्टेशनरी और गणवेश की भी व्यवस्था की गई है।

54.

प्रदेश भर के स्कूलों में 42 लाख से ज्यादा बालिकाओं को पालक शिक्षक संघ के माध्यम से नि:शुल्क गणवेश वितरण किया जा रहा है। प्राथमिक शालाओं के 80 लाख 66 हजार और माध्यमिक शालाओं के 27 लाख 76 हजार बच्चों को पाठ्य पुस्तकें वितरित की जा चुकी हैं।

55.

सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस शिक्षा सत्र में 11 तहसील मुख्यालयों पर मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के अध्ययन केन्द्रों की स्थापना की गई है। अगले चार सालों में उन तहसील मुख्यालयों पर जहां शासकीय या अशासकीय महाविद्यालय अथवा भोजमुक्त विश्वविद्यालय के अध्ययन केन्द्र नहीं हैं, वहां 47 अध्ययन केन्द्र और खोले जायेंगे।

56.

प्रदेश में एड्यूसेट के उपयोग के लिए इसरो के सहयोग से एक हब स्थापित किये जाने की योजना है। प्रथम चरण में 50 महाविद्यालयों में इन्टरएक्टिव टर्मिनल लगाये जायेंगे, जिसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में महाविद्यालयों के छात्रों को स्तरीय व्याख्यान उपलब्ध होंगे।

57.

मेरी सरकार की पहल और सक्रिय सहयोग से अगले शिक्षण सत्र से जबलपुर में भारत सरकार के द्वारा इंडियन इन्स्टीट्यूट ऑफ इन्फार्मेशन टेक्नॉलॉजी, डिजाइन एण्ड मेनुफेक्चरिंग प्रारंभ की जा रही है। राज्य सरकार ने संस्था के लिए जरूरी भूमि चिह्रांकित कर ली है। संस्था के लिए अस्थाई रूप से आवश्यक भवनों की व्यवस्था भी कर दी गई है।

58.

प्रदेश में आंगनवाड़ियों के माध्यम से छ: वर्ष तक के 43 लाख बच्चे एवं 10 लाख गर्भवती एवं धात्री माताओं को पूरक पोषण आहार से लाभान्वित किया जा रहा है। प्रदेश के बच्चों में कुपोषण की दर में कमी लाने और सम्पूर्ण शारीरिक एवं मानसिक विकास सुनिश्चित करने के लिये छ: माह से तीन वर्ष तक के बच्चों को शीघ्र ही घुलनशील फोर्टीफाईड फूड आंगनवाड़ी केन्द्रों में प्रदान किया जायेगा। इस योजना से प्रतिदिन लगभग दस लाख बच्चे लाभान्वित होंगे। चालू वित्तीय वर्ष में इस योजना के लिये 60 करोड़ रुपयों का प्रावधान है ।

59.

प्रदेश में कुपोषण पर नियंत्रण करने के लिये बाल संजीवनी अभियान चलाया जा रहा है। 15 फरवरी 2005 से शुरू होने वाले 6वें चरण में 60 लाख से अधिक बच्चों को इस अभियान के अंतर्गत शामिल किया जायेगा।

60.

प्रदेश में महिलाओं को उनके सामाजिक और आर्थिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उन्हें सशक्त बनाने के लिये स्व-सहायता समूहों के गठन पर जोर दिया जा रहा है। आंगनवाड़ी केन्द्रों में महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से पोषण आहार का प्रदाय किया जा रहा है। लगभग 90 हजार स्व-सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है। महिला स्व-सहायता समूहों के लिए स्व-शक्ति एवं स्वयंसिद्धा योजना के अन्तर्गत भी महिलाओं के छ: हजार समूह बनाये गये हैं एवं छ: सौ से अधिक सामुदायिक परिसंपत्तियों का सृजन किया गया है। महिला स्व-सहायता समूहों को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से उनका एक फेडरेशन गठित करने की कार्रवाई की जा रही है। समूहों का फेडरेशन बन जाने से इन समूहों को वित्तदायी संस्थाओं से जोड़ा जा सकेगा।

61.

सरकार ने सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक अक्टूबर 2004 से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बीमा योजना लागू की है। इस योजना से प्रदेश की लगभग एक लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं लाभान्वित होंगी। योजना के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की सामान्य मृत्यु होने पर 20 हजार रुपये, दुर्घटना में मृत्यु होने पर 50 हजार रुपये और स्थाई अपंगता होने पर 50 हजार की राशि उपलब्ध कराई जायेगी। इसके अतिरिक्त किसी भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अथवा सहायिका के नवमी कक्षा से बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को सौ रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति देने का प्रावधान भी किया गया है।

62.

भेरी सरकार की प्राथमिकता वाले जो कार्य हैं उनमें स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। सामाजिक और आथिर्क रूप से कमजोर वर्गों को सस्ती, सुलभ और अच्छी गुणवत्ता की स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

63.

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के गरीब परिवार बीमार होने पर इलाज कराने में असमर्थ रहते हैं। मेरी सरकार ने ऐसे परिवारों के लिए 25 सितम्बर 2004 से दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय उपचार योजना प्रारंभ की गई है। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को सरकारी अस्पताल में भर्ती होने पर जाँच एवं उपचार के लिए एक वित्तीय वर्ष में 20 हजार रुपये प्रति परिवार की सीमा तक नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। पात्र परिवारों को सरकार द्वारा परिवार स्वास्थ्य कार्ड भी जारी किए जा रहे हैं।

64.

समाज के कमजोर वर्गों में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर सबसे अधिक है। इस दर में कमी लाने के लिए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना जरूरी है। इसी उद्देश्य से प्रसव हेतु परिवहन एवं उपचार योजना भी 25 सितम्बर 2004 से पूरे प्रदेश में आरम्भ की गई है। योजना के अन्तर्गत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों की सभी और अन्य वर्गों की गरीबी रेखा के नीचे के परिवारों की गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए सुविधायुक्त अस्पताल तक नि:शुल्क परिवहन का साधन और प्रसव के दौरान पूर्णत: नि:शुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।

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प्रदेश में मातृ मृत्यु दर की स्थिति चिन्तनीय है। इसमें सुधार लाने के लिए फरवरी-मार्च 2005 से जननी सेवा योजना प्रारम्भ की जा रही है। प्रदेश में औसतन 19 लाख गर्भवती महिलाएं रहती हंै जिनकी प्रसव पूर्व तीन बार जाँच की जाना चाहिए, परन्तु प्रदेश में केवल 30 प्रतिशत ऐसी महिलाओं की ही प्रसव पूर्व जाँच हो पा रही है। सभी गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ कराने, प्रजनन संबंधी रोगों की पहचान और उपचार तथा जटिल प्रसव वाली संभावित महिलाओं की पहचान कर संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने के लिए यह योजना शुरू की जा रही है। यह योजना सघन रूप में संपूर्ण प्रदेश में वर्ष में चार बार क्रियान्वित की जायेगी।

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मेरी सरकार ने शहरी इलाकों में अयोध्या बस्ती योजना प्रारंभ की है। इसमें शहरों की गंदी बस्तियों में स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक पर्यावरण देने के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं विकसित की जायेंगी। इस वित्तीय वर्ष में 359 झुग्गीबस्तियों का विकास किया जा रहा है। आने वाले चार वर्षों में दो हजार गंदी बस्तियों के विकास का लक्ष्य रखा गया है।

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राज्य शासन प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों के व्यवस्थित विकास के लिए प्रयासरत है । सात शहरी क्षेत्रों के मास्टर प्लानों के पुनर्विलोकन मूल्यांकन एवं उपांतरण का कार्य किया गया है। भोपाल विकास योजना 2005 के पुनर्विलोकन एवं उपांतरण के लिये इसरो अहमदाबाद से अनुबंध किया गया है। आगामी वर्ष में दस नगरों की विकास योजनाएं प्रकाशित करने का भी लक्ष्य रखा गया है।

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मेरी सरकार ने शहरी इलाकों में अयोध्या बस्ती योजना प्रारंभ की है। इसमें शहरों की गंदी बस्तियों में स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक पर्यावरण देने के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं विकसित की जायेंगी। इस वित्तीय वर्ष में 359 झुग्गीबस्तियों का विकास किया जा रहा है। आने वाले चार वर्षों में दो हजार गंदी बस्तियों के विकास का लक्ष्य रखा गया है।

69.

प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में समस्त शुष्क शौचालयों को जलवाहित शौचालयों में परिवर्तित कर नगरीय क्षेत्रों में मैला ढोने की प्रथा अक्टूबर 2004 में पूरी तरह से समाप्त हो गई है।

70..

राज्य शासन शहरों की स्वच्छता और पर्यावरण सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। शहरी क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे निपटारे की गम्भीर समस्या को देखते हुये शासन द्वारा मध्यप्रदेश जैव अनाश्य अपशिष्ट नियंत्रण अधिनियम, 2004 लागू किया जा रहा है। इस अधिनियम के अन्तर्गत प्लास्टिक कचरे के निपटान के लिये जन सामान्य के साथ-साथ नगरीय निकायों की भी जिम्मेदारी तय की गई है।

71.

निशक्तजनों को आत्मनिर्भर बनाना मेरी सरकार की प्राथमिकताओं में है। प्रदेश में 14 लाख से अधिक निशक्तजन हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार निशक्तता निवारण और अन्य विभागों की गतिविधियों की एकीकरण कर 25 सितम्बर 2004 से निशक्तजनों के पुनर्वास और कल्याण के लिए दीनदयाल समर्थ योजना प्रारम्भ की गई है।

72.

मेरी सरकार ने प्रशासनिक सुधार की महत्वपूर्ण पहल की है। शासकीय अमले की कार्यक्षमता बढ़ाने और भ्रष्टाचार कम करने के उद्देश्य से प्रचलित शासकीय नियमों का सख्ती से पालन करने पर जोर दिया जा रहा है । लापरवाह शासकीय सेवकों पर अनुशासन की कार्रवाई की जा रही है । ग्रामीण क्षेत्रों में सभी अधिकारी-कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति को अनिवार्य किया गया है । ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में निरन्तर अनुपस्थित रहने वाले डॉक्टरों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है।

73.

मेरी सरकार ने प्रदेश के न्यायालयों में छोटे-छोटे अपराधों से संबंधित बड़ी संख्या में लम्बित मुकदमों को वापस लेने का निर्णय लिया है। ऐसे प्रकरणों के कारण गंभीर प्रकृति के मुकदमों की सुनवाई प्रभावित होती है। दिसम्बर माह के अंत तक लगभग 29 हजार ऐसे प्रकरण वापस लेने के लिए चिह्रांकित किये गए हैं।

74.

मेरी सरकार ने प्रदेश में भयमुक्त समाज और कानून का राज स्थापित करने को प्राथमिकता दी है। प्रदेश में कानून और न्याय व्यवस्था की स्थिति अच्छी रही है। पुलिस बल को अनुशासित, संवेदनशील और मानवाधिकारों के प्रति सजग बनाये रखने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। पुलिस के आधुनिकीकरण की योजना पर सक्रियता से काम चल रहा है। प्रदेश के 300 थानों का उन्नयन किया जा रहा है और वहां उपनिरीक्षक के स्थान पर निरीक्षक के पद स्वीकृत किये गये हैं। इस वर्ष 180 थानों का, आगामी वित्तीय वर्ष में 60 थानों का और 2006-07 में 60 थानों के उन्नयन किये जाने के आदेश जारी किए जा चुके हैं। उन्नयन की इस कार्रवाई से मैदानी इलाकों में पुलिस की दक्षता और कार्यकुशलता में वृद्धि होगी।

75.

प्रदेश में सार्वजनिक स्थलों और शासकीय जमीनों पर अतिक्रमण के विरूद्ध कड़ा रुख अपनाया गया है। अतिक्रमण समाप्त करने की एक मुहिम चलायी जा रही है। नये अतिक्रमण न हों, इसके लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की गई है।

76.

नागरिक सेवाएं प्रदान करने के लिए एक पोर्टल विकसित किया जायेगा जिसके माध्यम से प्रदेश के नागरिक कहीं भी शासन द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे। पोर्टल के माध्यम से सिटीजन इन लाईन से सिटीजन ऑनलाईन की परिकल्पना साकार हो सकेगी।

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प्रत्येक 12वें वर्ष आयोजित होने वाले महापर्व सिंहस्थ के आयोजन को मेरी सरकार ने सफलतापूर्वक सम्पन्न कराया। करोड़ों श्रद्धालु तीर्थ यात्री पाँच अप्रैल से चार मई, 2004 तक उज्जैन में इस पर्व के अवसर पर आये। इतने विराट आयोजन में किसी भी तरह की कोई अप्रिय घटना नहीं घटी। इसी दौरान लाखों लोगों ने पंचक्रोषी यात्रा भी पूरी की। सारे कार्यक्रम शांति और श्रद्धा के वातावरण में पूरे हुए। व्यवस्थित प्रबंधन के परिणामस्वरूप न कोई बीमारी फैली और न ही भीड़ के कारण कोई रास्ता बंद हुआ। श्रद्धालुओं को स्नान के लिए क्षिप्रा में सदैव स्वच्छ जल मिलता रहा। सिंहस्थ की सफलता के लिए सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और स्तरीय प्रबंधन के साथ ही साथ जन सामान्य के सहयोग की देश व विदेश में सभी लोगों, प्रमुख साधु-संतों और प्रबंधन गुरुओं ने सराहना की है।

78.

माननीय सदस्यगण मेरे अभिभाषण को आपने ध्यानपूर्वक सुना, इसके लिए मैं आभारी हूं।