| اردو خبریں | संस्कृत समाचारः मुख्य पृष्ठ | संपर्क करें | साईट मेप
You Tube
सार्वजनिक जल स्रोतों के लिए नवीन जल नीति बनाई जायेगी
गांवों के लिये मुख्यमंत्री सड़क योजना शुरू की जायेगी

राज्यपाल डा. बलराम जाखड़ ने आज यहां 13वीं विधान सभा के प्रथम सत्र में नव-निर्वाचित सदस्यों का हार्दिक स्वागत करते हुए विधान सभा चुनाव शांतिमय वातावरण में सम्पन्न होने पर देशवासियों,राजनीतिक दलों, प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को जागरूकता, परिपक्वता और कार्यकुशलता के लिए बधाई दी। राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में बताया कि प्रदेश के अनेक हिस्सों में अवर्षा के कारण पानी की उपलब्धता में कमी को देखते हुए सार्वजनिक जल स्रोतों के लिए नवीन जल नीति बनाई जायेगी ताकि प्रदेश के सभी नदी,तालाब, कुएं, बावड़ी और अन्य जलस्रोतों का संरक्षण तथा संवर्धन प्रभावी तरीके से किया जा सके। उन्होंने बताया कि सतही और जमीनी जल संवर्धन के लिए सार्थक उपाय किये जायेंगे और पुराने जल स्रोतों को पुनर्जिवित किया जायेगा। अधूरी सिंचाई योजनाओं को पूरा किया जायेगा और नई सिंचाई योजनाओं को आरंभ किया जायेगा।

राज्यपाल डा. जाखड़ ने राज्य सरकार की उपलब्धियों, लक्ष्यों, निर्णयों तथा भविष्य की योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि शासकीय कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा योजनाओं का लाभ लक्षित हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए सुशासन बुनियादी आवश्यकता है। इसलिए मानव संसाधन में निवेश कर प्रदेश के सरकारी अमले को सामयिक परिवर्तन एवं सुशासन का वाहक बनाया जायेगा। सूचना के अधिकार के उपयोग में देश में मध्यप्रदेश सबसे आगे है। इस बात को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक दक्षता एवं पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी को सरकारी विभागों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का अंग बनाया जायेगा। पंचायत राज को भी सूचना प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने में सक्षम बनाने के लिए कदम उठाये जायेंगे। नई सरकार के गठन को विकास कार्यों पर जनता की स्वीकृति का उद्घोष निरूपित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह प्रदेश के नव-निर्माण के लिए सरकार के संकल्प की तस्दीक है, निरंतरता का सकारात्मक जनादेश है, विकास और सृजन के लिए आरंभ की गई यात्रा में जनता की आस्था है। उन्होंने कहा कि अधोसंरचना के विकास के अभाव में आर्थिक प्रगति की संभावनाएं स्वत: समाप्त हो जाती हैं। प्रदेश में निजी क्षेत्र के साथ भागीदारी की नींव रखी जा चुकी है तथा सड़क सुधार और निर्माण के बड़े कार्य आरंभ किये गये हैं। डा. जाखड़ ने बताया कि अब प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से शेष बचे गांवों के लिए मुख्यमंत्री सड़क योजना शुरू की जायेगी। इसके अंतर्गत प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालयों को 4 लेन सड़क मार्ग से तथा जिलों को 2 लेन सड़क मार्ग से जोड़ा जायेगा।

राज्यपाल डा. जाखड़ ने अभिभाषण में बताया कि किसानों का हित संरक्षण सरकार की निरंतर प्राथमिकता रहेगी। विदेशी लाल गेहूं का सार्वजनिक वितरण प्रणाली में वितरण बंद करा दिया गया है । देशी गेहूं की खरीद के लिए अतिरिक्त बोनस दिया गया है। किसान को मिलने वाले ब्याज की दरों में भी कीर्तिमान कमी की गई है। डा. जाखड़ ने बताया कि सरकार का लक्ष्य किसान की उत्पादन लागत में कमी लाना तथा उसके उत्पाद का मूल्य संवर्धन करना है। इसके लिए ब्याज की दरों में और भी कमी की जाएगी। कृषि जोखिम कोष स्थापित किया जायेगा। प्रदेश को आदर्श जैविक कृषि प्रदेश बनाया जायेगा। कृषक कल्याण आयोग को और अधिक प्रभावी बनाया जायेगा तथा कृषि आधारित खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जायेगा। राज्यपाल ने कहा कि गरीबों को सस्ता अनाज उपलब्ध कराने की दृष्टि से सरकार ने मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना लागू की थी । खाद्यान्न की बढ़ती महंगाई के विरूद्ध यह प्रभावशाली रक्षा कवच सिद्ध हुई। इस योजना को और मजबूत बनाया जायेगा। डा. जाखड़ ने नगरीकरण की रफ्तार से नगर प्रबंधन को एक बड़ी चुनौती निरूपित करते हुए कहा कि प्रदेश में शहरों का सुव्यवस्थित विकास सुनिश्चित किया जायेगा। उपनगरों के सुनियोजित विकास को प्रोत्साहित किया जायेगा तथा शहरी मलिन बस्तियों का विकास और पुर्नस्थापन भी प्राथमिकता से किया जायेगा।

राज्यपाल डा. जाखड़ ने कहा कि सरकार ने पांच साल पूर्व किये गये अधिकांश संकल्पों तथा समय-समय पर की गई अन्य घोषणाओं को भी पूरा किया है। आने वाले पांच वर्षों में सरकार अपने संकल्पों और स्वप्नों को साकार करने की गति में और तेजी लायेगी। जनसंकल्प- 2008 के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सरकार ने पहले दिन से ही कार्य शुरू करते हुए शासकीय योजनाओं की पहुंच और प्रभाव को बढ़ाने के लिए विभिन्न समुदायों का सक्रिय योगदान प्राप्त करने का निर्णय लिया है। डा. जाखड़ ने कहा कि सरकार योजनाओं के पैकेज बनाकर उन्हें लोगों तक पहुंचाने की जगह आमजन को खुद योजनाएं बनाने का अवसर देने में भरोसा करती है। विभिन्न पंचायतों और महापंचायतों में पिछले दिनों आमजन ने सिद्ध किया कि उसके पास समस्याओं का समाधान भी है। उसके सुझाव और प्रस्ताव ज्यादा हकीकी और जमीनी होते हैं। उन्होंने कहा कि इस जनप्रज्ञा का उपयोग स्वर्णिम मध्यप्रदेश बनाने में आगे भी किया जायेगा। सरकार 'आईडियाज फार सी.एम.' नामक एक ऑनलाईन नवाचार आरंभ कर रही है। इसके माध्यम से विकास एवं सुशासन के लिए जनसुझाव प्राप्त कर उन्हें क्रियान्वित करने की व्यवस्था की गई है।

राज्यपाल डा बलराम जाखड़ ने बताया कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था के स्तर एवं परिमाण में प्रसार कर शैक्षणिक स्तर को ऊंचा उठाने के प्रयास किये जायेंगे। शिक्षा पर राजकीय व्यय के अनुपात को बढ़ाया जायेगा । प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में हर पांच किलोमीटर की दूरी पर आवश्यकतानुसार हाई स्कूल खोले जायेंगे। उच्च शिक्षा तथा तकनीकी शिक्षा को और अधिक रोजगारोंमुखी बनाया जायेगा। प्रदेश में शिक्षा, योग्यता एवं क्षमता के आधार पर युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए सरकार कृत संकल्प है। पिछले दिनों प्रदेश के युवा खिलाड़ियों ने रिकार्ड संख्या में पुरस्कार जीत कर सरकार के प्रयासों की प्रभावशीलता साबित की। खेलों में मध्यप्रदेश की स्वर्णिम आभा को चमकाने के प्रयास पूरी शिद्दत से जारी रखे जायेंगे। डा. जाखड़ ने बताया कि अनुसूचित जाति,जनजाति तथा पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए सरकार सदैव प्रतिबद्ध रही है। अब इन वर्गों के सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए भी कदम उठाये जायेंगे। अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम-2006 के अंतर्गत वनवासियों को उनका अधिकार प्रदान करने वाला देश का पहला राज्य मध्यप्रदेश है। राज्यपाल ने बताया कि वन संरक्षण, वन उपज आधारित कुटीर उद्योगों के माध्यम से वनवासी युवकों को रोजगार के नये अवसर भी उपलब्ध कराये जायेंगे।

राज्यपाल डा. जाखड़ ने अभिभाषण में बताया कि सरकार ने महिला सशक्तिकरण का संकल्प लिया है। इस क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों में प्रदेश को बड़ी सफलता मिली है लेकिन अभी भी प्रतिबद्ध परिश्रम की आवश्यकता है। मातृ और शिशु दर को कम करने तथा कुपोषण को मिटाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाये जायेंगे। प्रदेश में महिलाओं को स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण, जेण्डर बजटिंग, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना , गांव की बेटी योजना, शासकीय सेवाओं में महिला प्रतिनिधित्व में वृद्धि और लाड़ली लक्ष्मी योजनाओं को लागू कर सरकार ने देश के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस श्रृंखला में आगे भी और अधिक बेहतर उपाय किये जायेंगे। स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं के बारे में राज्यपाल ने बताया कि प्रदेश में चिकित्सकों एवं पेरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता बढ़ाने के साथ स्वास्थ्य संस्थाओं में उपलब्ध सुविधाओं को भी सुदृढ़ किया जायेगा। भारतीय चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के प्रभावी प्रयास किये जायेंगे और मेडीकल कालेज तथा पेरामेडिकल संस्थाओं की स्थापना को प्रोत्साहित किया जोयगा।

राज्यपाल डा. जाखड़ ने कहा कि राज्य में निवेश का जीवंत वातावरण बनाया गया है। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों ने आज प्रदेश में औद्योगिक निवेश के लिए नई चुनौतियां पैदा की हैं। इसलिए बड़े उद्योग और अप्रवासी भारतीयों के निवेश को बढ़ाने के लिए अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। सरकार ने इन बातों को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण, लघु एवं कुटीर उद्योगों के लिए बाजारों की नेटवर्किंग में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। डा. जाखड़ ने बताया कि बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय कार्य कर मील के कई पत्थर स्थापित किये गये हैं। अब आने वाले पांच वर्षों में प्रदेश को बिजली उत्पादन की दृष्टि से आत्म-निर्भर बनाया जायेगा और बिजली वितरण को और अधिक प्रभावी बनाने के प्रयास किये जायेंगे। सौर तथा अन्य अपारम्परिक ऊर्जा स्रोतों का विस्तार और संवर्धन भी किया जायेगा।

राज्यपाल डा. जाखड़ ने प्रदेश स्तर पर बुलाई गई विभिन्न वर्गों की पंचायतों के माध्यम से उनकी समस्यायें जानने और उन समस्याओं के समाधान ढूंढने की सरकार की शैली तथा कल्याणकारी योजनाओं को जनता की मान्यता मिलने का जिक्र करते हुए कहा कि सड़क,पानी, बिजली जैसे अधोसंरचनात्मक क्षेत्रों में किये गये कार्यों को निर्विंघ्न जारी रखने की चाहत है। सरकार को मिले जनादेश से यह भी प्रमाणित होता है कि विकास की सच्चाई को दुष्प्रचार का कोई पर्दा ढांक नहीं सकता। इस जनादेश ने यह भी साबित किया है कि जनमत मात्र चुनाव प्रबंधन से नहीं मिलता, वह सर्वहारा के उन सेवकों के पक्ष में है जो जाति,वर्ग,धर्म, क्षेत्र के आधार पर समाज को विभाजित करने की जगह 'सर्वे भवन्तु सुखिन:' के दार्शनिक आदर्श को हासिल करने के लिए कटिबद्ध रहते हैं। राज्यपाल ने बताया कि एक विकसित मध्यप्रदेश की परिकल्पना को मूर्त रूप देने के लिए सरकार ने सुशासन, अधोसंरचना विकास, कृषि को लाभ का धंधा बनाने, निवेश, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य तथा सशक्त कानून व्यवस्था को अपनी प्राथमिकता बनाया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यकों और समाज के कमजोर वर्गों का उत्थान तथा संतुलित क्षेत्रीय विकास इन सात संकल्पों में समाहित है। डा. जाखड़ ने जानकारी दी कि इस दिशा में सुनियोजित कार्य करने के लिए कार्य-दल गठित किये गये हैं। इन कार्य-दलों में ख्याति प्राप्त विषय विशेषज्ञों, बुद्धिजीवियों और अशासकीय संगठनों को विशेष स्थान दिया गया है। ये कार्यदल स्थाई होंगे और इनकी अनुशंसाओं को गंभीरतापूर्वक क्रियान्वित किया जायेगा।

राज्यपाल डा.जाखड़ ने जन-आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए वित्तीय प्रबंधन को हमेशा विशेष वरीयता दिये जाने का जिक्र करते हुए सदन को बताया कि आने वाले समय में सरकार की प्राथमिकता लोक कल्याणकारी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने की होगी। सिर्फ कर भार बढ़ाने की जगह कर अपवंचन रोकने तथा कराधान की प्रक्रिया और वसूली का ढांचा बदल कर आय बढ़ाने के उपाय भी किये जायेंगे। प्रदेश में कर सुधारों को लागू किया जायेगा। करेत्तर आय के संसाधनों का भी समुचित दोहन किया जाएगा। पंचायत राज संस्थाओं के औपचारिक तथा सामाजिक आडिट के तंत्रों और वित्तीय व्यवस्था को मजबूत बनाया जायेगा। पर्यटन एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का जिक्र करते हुए राज्यपाल डा. जाखड़ ने बताया कि प्रदेश में इन गतिविधियों के विस्तार के लिए निजी क्षेत्र का सहयोग लिया जायेगा। लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए पहले भी प्रदेश में ऐतिहासिक पहल की गई थी, आगे भी इन्हें समर्थन देने की एक नियमित प्रणाली कायम की जायेगी। प्रदेश के तीर्थों और धार्मिक मेलों को सुव्यवस्थित करने की पहल भी की जायेगी।

राज्यपाल डा. बलराम जाखड़ ने अभिभाषण के अंत में देश पर हो रहे आतंकी आक्रमणों का जिक्र करते हुए बताया कि प्रदेश में पुलिस की विशिष्ट संरचना की जा रही है। इसके अंतर्गत प्रदेश पुलिस को आधुनिक स्वरूप दिया जायेगा। सामुदायिक पुलिसिंग पर भी जोर दिया जायेगा ताकि जनता की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके। विगत समय प्रदेश को दस्यु उन्मूलन में प्रशंसनीय सफलता मिली। सरकार प्रदेश में ऐसा वातावरण निरंतन बनाये रखेगी ताकि प्रत्येक नागरिक सुरक्षित महसूस कर सके। सरकार को मिले जनादेश को चुनौतीपूर्ण उत्तरदायित्व निरूपित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह जिम्मेदारी एक स्वर्णिम मध्यप्रदेश के निर्माण, एक नये मध्यप्रदेश को गढ़ने की है। यह दायित्व असाधारण है क्योंकि यह पल-पल कठोर परिश्रम की मांग करता है। न केवल उनसे जो सरकार में हैं बल्कि प्रदेश के हर एक नागरिक से। राज्यपाल ने कहा कि सबको कंधे से कंधा मिलाकर एक नये मध्यप्रदेश की इबारत लिखनी है।