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डॉ. भाई महावीर राज्यपाल, मध्यप्रदेश का भाषण

मेरे प्यारे भाइयो और बहनों,

आप सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ। प्रगति के पथ पर आप निरन्तर आगे बढ़ें, यही मेरी कामना है। आप वह रास्ता बनायें और उस पर चलें जिससे हमारा गणतंत्र यशस्वी हो।
गणतंत्र दिवस हर नागरिक को यह पुनरावलोकन करने का अवसर देता है कि स्वतंत्रता, बंधुत्व, न्याय और समता के जो उदात्त मूल्य हमारे संविधान में निहित हैं, उनकी कितनी हिफाजत हम कर पा रहे हैं, इन मूल्यों को हमने अपने क्रियाकलापों में कितनी जगह दी है। आज का ऐतिहासिक दिन यह प्रेरणा भी देता है कि हम आज़ादी की लड़ाई की अपनी महान विरासत को पहचानें, उसे फिर से याद करें। हम याद करें उस महान लम्बे संघर्ष के प्रतीकों, आदर्शों और बलिदानों को, साथ ही इनके प्रति आस्था और प्रतिबध्दता भी मजबूती से व्यक्त करें।
यह जरूरी है कि हम नई पीढ़ी को अपनी इस महान विरासत के विषय में बतायें, उन मूल्यों से अवगत करायें जिनके लिये, लाखों लोगों ने मौत को गले लगाया। ऐसी ही एक पहचान है हमारा तिरंगा झण्डा। देश के पहले प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में कहा था कि ''जब हमारे हौसले पस्त हो जाते थे तब इस झण्डे को देखकर हमारी रगों में नया जोश भर जाता था। अनेक साथी इस झण्डे को थामे रहे और आखिरी सांस लेने के पहले किसी साथी को थमा गए।'' प्रदेश में 12 जनवरी स्वामी विवेकानन्द के जन्म दिवस से ''झण्डा ऊँचा रहे अभियान'' शुरू हुआ है जो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की शहादत के दिन 30 जनवरी तक चलेगा। जन-जन के इस अभियान के माध्यम से हम अपने सर्वोच्च राष्ट्रीय प्रतीक तिरंगे और महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को श्रध्दांजलि दे रहे हैं, उनके त्याग और बलिदानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रहे हैं।
समता मूलक समाज में यह जरूरी है कि सभी वर्गों को आगे बढ़ने के मौके बराबरी से मिलें। इसके लिये जरूरी है कि उन लोगों पर विशेष ध्यान दिया जाए जो ऐतिहासिक, सामाजिक कारणों से अपने हकों से वंचित रहे हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए पिछले एक वर्ष से दलितों के कल्याण का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रदेश में संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत् पिछले एक वर्ष में 3 लाख 34 हजार भूमिहीन परिवारों को 6 लाख 88 हजार एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि उपलब्ध कराई गई है। अब ऐसे भूमिहीनों को जिन्हें शासकीय भूमि नहीं दी जा सकी है, एक हेक्टेयर तक भूमि खरीदने के लिये 75 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान दिया जायेगा। जिन भूमिहीनों को जमीन मिली है उनकी भूमि के सुधार और सिंचाई क्षमता विकसित करने पर इस वर्ष 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब अनुसूचित वर्गों में उद्यमियों और व्यापारियों का एक नया समूह राज्य सरकार की कोशिशों से बन रहा है। अब शासकीय विभागों की खरीद में इन वर्गों की 30 प्रतिशत भागीदारी निश्चित है। शुरूआत में केवल एक ही विभाग द्वारा अपनी लगभग 20 करोड़ रुपये की खरीदी में से 8 करोड़ रुपये से ज्यादा की खरीदी अनुसूचित वर्गों के उद्यमियों से की गई है। अब प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की खरीदारी इस वर्ग के उद्यमियों से की जायेगी। व्यापार और उद्यमिता की गतिविधियों को विस्तार देने के लिये इन वर्गों के 25 हजार बेरोजगारों को अगले 5 वर्षों में उद्योग और व्यवसाय से जोड़ा जायेगा। विशेष भरती अभियान के तहत वर्ष 1994 से 2000 के बीच अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लगभग 75 हजार रिक्त पद भरे गये हैं। इस माह के अन्त तक 19 हजार 683 पद और भरे जायेंगे।
संविधान की भावना के अनुरूप पिछले वर्षों में लोगों का जीवन स्तर बेहतर करने की जो सुनियोजित रणनीति अपनाई गई उसके परिणामस्वरूप प्रदेश का मानव विकास सूचकांक 20 प्रतिशत सुधरा है। योजना आयोग द्वारा तैयार किए गए राष्ट्रीय मानव विकास प्रतिवेदन में यह तथ्य उभर कर आया है। मध्यप्रदेश में यह उपलब्धि शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण आजीविका के क्षेत्रों को प्राथमिकता देने के नीतियों के कारण हुई है। मानव विकास के महत्वपूर्ण क्षेत्र-स्वास्थ्य में, शिशु मृत्यु दर पिछले दशक में 133 से घटकर 87 हो गई है। इसी प्रकार मृत्यु दर और सकल प्रजनन दर में भी कमी आई है। यह प्रदेश में स्वास्थ्य नीतियों के बेहतर प्रबंधन के परिणामस्वरूप हुआ है। स्वास्थ्य सुविधाओं को प्रदेश में व्यापक बनाने का जो कार्यक्रम चल रहा है उसमें 42 हजार से ज्यादा प्रशिक्षित दाइयां और 31 हजार से ज्यादा जनस्वास्थ्य रक्षक ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
शिक्षा के लोकव्यापीकरण के अभियान के अंतर्गत प्रत्येक बसाहट के तीन किलोमीटर की परिधि में मिडिल स्कूल खोलने की एक बड़ी योजना पर पिछले वर्ष कार्य प्रारंभ हो चुका है। अब तक 7 हजार 575 नए मिडिल स्कूल खोले जा चुके हैं, जल्दी ही 37 सौ स्कूल और खोले जाएंगे।
महिला साक्षरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय वृध्दि के बावजूद हमारे सामने 50 प्रतिशत महिलाओं को साक्षर बनाने की चुनौती मौजूद है। महिला पढ़ना-बढ़ना आन्दोलन के द्वारा महिला साक्षरता का लक्ष्य प्राप्त करने के प्रयास निरन्तर जारी हैं। एक लाख 82 हजार महिला पढ़ना-बढ़ना समितियों का गठन किया गया है, इन समितियों के माध्यम से 35 लाख महिलाएँ साक्षरता आन्दोलन से जुड़ी हैं।
स्कूल जाने योग्य बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराने के अपने संवैधानिक दायित्व को पूरा करने के लिये ''मध्यप्रदेश जन शिक्षा अधिनियम 2002'' लागू किया गया है। इस कानून में गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराने के विशेष प्रावधान किये गए हैं। पालक शिक्षक संघ को स्कूल प्रबंधन के लिए जवाबदार बनाकर समुदाय को शिक्षा के इस बड़े काम में भागीदार बनाया गया है।
बेहतर शासन के लिये किये गये सर्वाधिक नए प्रयोगों को लागू करने में मध्यप्रदेश सभी राज्यों में आगे रहा है। इन प्रयोगों को योजना आयोग और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा संयुक्त रूप से चिन्हित किया गया है। प्रदेश की चार योजनाओं :- शिक्षा गारन्टी योजना, राजीव गांधी जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन, सामुदायिक सहकारिता से अस्पताल प्रबंधन सुधारने की रोगी कल्याण समिति योजना और सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग कर नागरिक सेवाओं के लिये ज्ञानदूत योजना को देश के 20 सर्वाधिक उत्कृष्ट प्रयोगों में गिना गया है। योजना आयोग ने यह आकलन पहली बार किया है ताकि इन सफल और श्रेष्ठ प्रयोगों को अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सके।
वन और मनुष्य के जो पारम्परिक सहसंबंध हैं वे प्रदेश में संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के काम से और मजबूत हो रहे हैं। प्रदेश में 13 हजार से ज्यादा ऐसी समितियों के माध्यम से 54 हजार वर्ग किलोमीटर वनों की सुरक्षा लोग कर रहे हैं। प्रदेश में वनोपज के लाभ का बड़ा हिस्सा स्थानीय लोगों को देने की व्यवस्था की गई है। लघु वनोपजों का मालिकाना हक स्थानीय नागरिकों को दिया गया है।
प्रदेश में जनभागीदारी के क्षेत्र में एक नया आयाम जुड़ा है। पहली बार, प्रदेश में महिलाओं के एक लाख से ज्यादा स्वसहायता समूह रोजगार के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। यह इसलिए संभव हुआ है कि मध्यप्रदेश में महिलाओं को आगे आने का मौका मिला है। इस समय प्रदेश में ढाई लाख से ज्यादा स्वसहायता  समूह बन चुके हैं। इनमें से डेढ़ लाख समूह उन परिवारों के हैं जो गरीबी रेखा के नीचे हैं। कुल चालीस करोड़ रुपये की बचत इन समूहों ने की है। यह जनसामान्य की ऊजार् र्र् र् की और उसके ताकतवर बनने की पहचान है।
प्रदेश निरन्तर तीन वर्षों से सूखे से जूझ रहा है। इस वर्ष 195 तहसीलें सूखे से प्रभावित हुई हैैं। इन क्षेत्रों में प्रभावित लोगों के लिए रोजगार और पेयजल की व्यवस्था की गई है। वर्तमान में 58 हजार से अधिक कार्यों में लगभग आठ लाख 50 हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिये 17 करोड़ 70 लाख रुपये जिलों को दिए गए हैं। जरूरत के अनुसार रोजगार के और भी काम शुरू करने की व्यवस्था की गई है। प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं को चारा उपलब्ध कराया जा रहा है।
प्रदेश में अच्छी गुणवत्ता की फसलों को नया अन्तर्राष्ट्रीय बाजार मिले इस दृष्टि से विशेष कृषि निर्यात क्षेत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इन निर्यात क्षेत्रों की स्थापना से आलू, प्याज, लहसून, धनिया, मेथी और गेहूं के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में वृध्दि होगी। प्रदेश में किसानों को खेती, उद्यानिकी, पशुपालन और मुर्गीपालन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी देने के लिए किसान बंधु योजना शुरू की गई है। योजना के तहत प्रत्येक ग्राम सभा के एक व्यक्ति को नई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाता है। अब तक 50 हजार किसान बंधु प्रशिक्षित होकर कृषि विस्तार कार्यक्रमों के वाहकों के रूप में कार्य कर रहे हैं।
आज के समय में संवैधानिक मूल्यों पर जो खतरे हैं वे साम्प्रदायिक सद्भाव और आपसी भाईचारे पर ही आक्रमण करते हैं। संविधान की इस सालगिरह के मौके पर आइये हम सब मिलकर तय करें कि ये शाश्वत मूल्य किस तरह सुरक्षित रहें। हमें लगातार इस मुहिम में सजग रहना होगा कि साम्प्रदायिक सद्भाव की हमारी उस पहचान पर कोई आंच न आने पाए जिसे पिछले वर्षों में प्रदेश के नागरिकों ने कायम किया है।
आप सबको एक बार पुन: शुभकामनाएं।
जय हिन्द !