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मेरे प्यारे भाइयो और बहनो,
गणतंत्र दिवस के इस पावन अवसर पर मैं प्रदेश के सभी नागरिकों को बधाई देता हूँ । मेरी कामना है कि आप सब उन्नति की राह पर निरंतर आगे बढ़ते रहें जिससे हमारा गणतंत्र और अधिक सुदृढ होता जाए और संविधान ने इसी भावना से जो मूल्य हमें दिये हैंवे राष्ट्र के जीवन को स्पंदित करते रहें ।
इतिहास में ऐसे मौके विरले ही होते हैं जब पूरा एक राष्ट्र, एक समाज खुद ही अपनी नियति का निर्धारण करता हे । आज का यह महान दिन अपने विकल्प के चयन की साल गिरह है । आज ही के दिन 52 वर्ष पहले हम भारत के नागरिकों ने अपने भविष्य की राह चुनी थी । हमने तय किया थाकि किस पथ पर चलकर देश के हर नागरिक को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय मिलेगा एवं हर नागरिक को अपने विचारों की अभिव्यक्ति और अपने विश्वासों को मानने की स्वतंत्रता हागी । हमें संविधान प्रदत्त इन अधिकारों की अनुभूति यह दिवस करवाता रहता है । राष्ट्र निर्माण की इस यात्रा में हम आज कहाँ पहुँचे है ? समता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व के उन लक्ष्योंको हम कितना पा सके हैं? गणतंत्र दिवस पर ऐसे प्रश्न स्वाभाविक रूप से उभरते हैं । दरअसल इन प्रश्नों का लगातार पूछा जाना ही हमें अपने जीवन्त गणतंत्र काबोध कराता है और इस अनवरत और निर्वाध रूप से चल रही प्रक्रिया से गण और तंत्र के रिश्ते मजबूत होते हैं ।
गणतंत्र की मजबूती के लिए अत्यन्त अनिवार्य यह है कि हमारी स्वतंत्रता अक्षुण्ण रहे और हमारे देश की संप्रभुता और सार्वभौमिकता पर कोई ऑंच न आये । हाल के कुछ वर्षों से हमारे देश की सीमाओं पर संकट के बादल लगातार बने हुए हैं । पड़ोसी देश द्वारा छदम युद्व के ढंग से लगातार आतंकी गतिविधयों का संचालन किया जा रहा है । तीन वर्ष पहले कारगिल संघर्ष के दौरान देशवासियों ने जिस प्रकर की एकजुटता का प्रदर्शन किया था उसी एजुटता की आवश्यकता अभी भी है।
हमारा प्रदेश पिछले तीन वर्षों से निरन्तर सूखे और अवर्षाका संकट झेल रहा है । संकट के ऐसे मोंके, हमारे नागरिक-बोध की परीक्षा लेते हैं । इस चुनौती को प्रदेश के नागरिकों ने एक अभूतपूर्व पहल के द्वारा ऐसे अवसर में बदला है जिसकी मिसाल मुश्किल है । प्रदेश के हजारों गाँवों में लोग अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए उठ खडे हुए हैं । ऐसा पहली बार हुआ है कि समुदाय ने पहल की और शासन तंत्र उससे जुडता गया ।गणतंत्र के एक नये अध्याय ने मध्यप्रदेश में ''पानी रोको आंदोलन'' के रूप में आकार लिया । पानी रोकोका काम प्रदेश के प्राय: सभी गाँवों में हुआ।
वर्तमान शताब्दी में जल की उपलब्धता एक बहुत बडी समस्या के रूप में उभरने की संभावना है । इसलिये नागरिकों को जल के किफायती उपयोग की आदत डालनी चाहिए । वैसे, जनभागीदारी से काम करने की इस पहल के तहत पिछले साल सात लाख से ज्यादा जल संरक्षण संरचनाएँ निर्मित हुई हैं । इस अनूठे अभियान में जनता की आर्थिक भागीदारी एक चोथाई रही जो लगभग 100 करोड् रुपये की राशि की होती है । इस अभियान में जनसहयोग की शैली इतनी प्रभावी और लचीली रही कि हर वर्ग के लोग अपनी-अपनी क्षमता अनुसार अपने आप इससे जुडे । यदि कोई पैसे से योगदान नहीं कर सकता था तो उसने श्रमदान किया, किसी ने अपना ट्रेक्टर लगाया तो किसी ने डीजल दिया । कई लोगों ने तो अपनी बैलगाडी ही लगाकर मिटटी ढोने का काम किया । इस तरह की जनभागीदारी से बनी रचनाएँ आज 95 करोड् घनमीटर पानी रोकने में सक्षम हो गई हैं । इस भौतिक उपलब्धि से भी बडी एक उपलब्धि है- वह है बंधुत्व का वह आदर्श जिसको हमारा संविधान अपने में समाहित किए है, वही प्रदेश के जनजीवन में उतर रहा है । अब पानी रोको अभियान के संस्थागत स्वरूप देने के लिए ग्राम स्वराज के तहत ''पानी रोको समतियाँ'' गठित हे रही हैं । प्रदेश के सभी गाँवों में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शुरू किए गए इस कार्यक्रम को ''राजीव गांधी जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन'' का द्वितीय चरण कहा जायगा।
जल आपूर्ति के साथ ही बिजली की उपलब्धता और नियमित आपूर्ति भी एक महत्वपर्ण मसला है । सवा साल पहले छत्तीसगढ राज्य के गठन के कारण विद्युत संयत्र दोनों राज्यों में बँट गये । फलस्वरूप मध्यप्रदेश में बिजली की कमी महसूस की जाने लगी है । सरकर ने शुरू से ही यह कोशिश की है कि कृषि को प्राथमिकता के क्षेत्र में रखकर बिजली उपलब्ध करायी जाय, किन्तु उद्योगों को भी उनकी मांग के अनुसार बिजली मिलती रहे । यह बात सही है कि बिजली की उपलब्धता और आपूर्ति के मामले में पहले जैसी सुविधाजनक स्थिति नहीं है फिर भी हमारे प्रदेश में प्रबुद्व नागरिकों के सहयोग से कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए यथासंभव आवश्यकतानुसार बिजली प्रदाय की जा रही है । इस मामले में नागरिको से मेरा आग्रह है कि वे घरेलू उपयोग के लिए बिजली का खर्च किफायत से करें, जिससे कूषि और उद्योगों को उनकी मांग के अनुसार बिजली मिल सके।
बंधुत्व की इस भावना को अब दूसरे क्षेत्रों में भी लाया जा रहा है । संविधान निर्माता बाबा साहब अम्बेडकर के जन्म दिन 14 अप्रैल से इस वर्ष का जो ग्राम संपर्क कार्यक्रम शुरू होगा उसमें जनभागीदारी से प्रदेश के 52 हजार गाँवों में साफ-सफाई का एक व्यापक कार्यक्रम 'संपूर्ण स्वच्छता अभियान' चलेगा । प्रदेश के नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहल है । मुझे पूरी उम्मीद है कि यह कार्यक्रम भी पानी रोको अभियान जैसा ही सफल होगा ।
राज्य की यह जिम्मेदारी है कि कोई नागरिक चाहे वह किसी वर्ग का हो, स्वास्थ्य, शिक्षा, न्याय और अपने फैसले खुद करने जैसे मूल अधिकारों से वंचित न हो । अधिकार देने से ज्यादा महत्वपूर्ण है : वंचितों द्वारा इन अधिकारों का उपयोग किया जा सके ऐसी व्यवस्था।
संविधान की मूल भावना के अनुरूप शिक्षा का बुनियादी अधिकार भी सभी कोएक समान रूप से मिले, इसके लिए मध्यप्रदश में एक सुविचारित रणनीति अपनाई गई हैे । वर्तमान जनगणना के ऑकड़े-प्रदेश को इस क्षेत्र में जो सफलता मिली है-उसकी कहानी कहते हैं। निरक्षरों की संख्या कम करने में मध्यप्रदेश देश में सबसे आगे रहा है । वर्ष 1991 और वर्ष 2001 के बीच साक्षरता स्तर में 20 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्वि हासिल करके मध्यप्रदेश साक्षरता स्तर में अब राष्ट्रीय स्तर के समकक्ष हो गया है । महिला निरक्षरों की संख्या में कमी करने में भी मध्यप्रदेश अग्रणी रहा है । देश की हर पांच साक्षर होने वाली महिलाओं में से एक मध्यप्रदेश की है । समुदाय आधारित ''पढना-बढना आंदोलन''और'' शिक्षा गारन्टी योजना'' के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप यह उपलब्धि हासिल की जा सकी है । 26 हजार शिक्षा गरन्टी स्कूलों के गुरूजियों और पढना-बढना आंदोलन के दो लाख 19 हजार गुरूजियों की प्रतिबद्वता के कारण मध्यप्रदेश में साक्षरता अभियान में तेजी लाई जा सकी । इन प्रयासों के माध्यम से दूरस्थ इलाकों में रहने वाले शिक्षा से वंचित लोगों तक शिक्षा और साक्षरता की सुविधा उपलब्ध कराई गई । महिला साक्षरता को बढ़ावा देना इन प्रयासों के केन्द्र में रहा है।
अनुसूचित जातियों और जनजातियों के प्रतिभाशाली बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में अन्य वर्गों के समान ही अवसर मिलें, इस उद्देश्य से सभी जिला मुख्यालयों पर उत्कृष्टता शिक्षा केन्द्र शुरू किए गए हैं। इन केन्द्रों में 9 वीं से 12 वीं तक के अनुसूचित वर्ग के छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क आवास और अन्य सुविधाओं के साथ-साथ 500 रुपये प्रतिमाह की दर से शिष्यवृत्ति, 100 रुपये प्रतिमाह की दर से पौष्टिक आहार वृत्ति, विशेषज्ञों द्वारा विशेष कोचिंग एवं कम्प्यूटर प्रशिक्षण की सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं।
अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के 11 वीं और 12 वीं कक्षाओं के छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को मिलने वाली मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति की राशि में छात्रों के लिए 100 रुपये और छात्राओं के लिये 110 प्रतिमाह की एकमुश्त वृध्दि की गई है।
मध्यप्रदेश के अनुसूचित जातियों और जनजातियों के जो विद्यार्थी दिल्ली में रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं उन्हें नि:शुल्क आवास, मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति और अन्य आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने की योजना शुरू हुई है। इन वर्गो के जो बच्चे सैनिक स्कूल रीवा में प्रवेश लेते हैं उनकी पढ़ाई और छात्रावास पर होने वाला व्यय राज्य सरकार उठा रही है।
प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में हुए नवाचारों में ''डिजीटल डिवाइड'' को भरने की कोशिश भी शामिल है। कम्प्यूटर शिक्षा और कम्प्यूटर के माध्यम से शिक्षा का विस्तार दूरदराज के देहाती इलाकों में भी किया गया है। कम्प्यूटर-आधारित शिक्षा के कार्यक्रम ''हेडस्टार्ट'' को अब समूचे प्रदेश में लागू करने की योजना पर काम चल रहा है।
सामान्य जन को सूचना प्रौद्योगिकी से जोड़कर सशक्त बनाने के लिए आयोजित ''ज्ञानदूत'' जैसे कार्यक्रमों को पूरे प्रदेश में लागू करने का काम प्रारंभ हो गया है। धार जिले में ज्ञानदूत योजना के जो परिणाम मिले हैं उनसे प्रेरणा लेकर अन्य जिलों में भी ऐसे कार्यक्रम शुरू हो रहे हैं। ई-वाचनालय के लिए हिन्दी भाषा में साफ्टवेयर विकसित किया गया है। बालाघाट जिले में ई-वाचनालयों की शुरूआत हो चुकी है। इस पहल से समाप्त सी हो चली वाचनालय संस्कृति को नये स्वरूप में पुनर्जीवन मिलेगा।
मध्यप्रदेश में तेन्दुपत्ता व्यवसाय से होने वाली पूरी आय तेन्दूपत्ता संग्राहकों को दी जाती है। लघु वनोपजों पर ग्राम सभाओं का मालिकाना हक़ है। इस वर्ष प्रदेश के 15 लाख तेन्दूपत्ता संग्राहकों को 48 करोड़ रुपये का बोनस दिया जा रहा है। यह बोनस 1999 में तेन्दूपत्ता व्यवसाय से हुई शुध्द आय 96 करोड़ रुपये का 50 प्रतिशत है। शेष 30 प्रतिशत राशि गाँवों में मूलभूत सुविधाओं के विकास और 20 प्रतिशत राशि वनों के विकास के लिए निवेशित की जायेगी।
गत जुलाई माह स्र प्रदेश में स्वस्थ जीवन सेवा गारन्टी योजना प्रारंभ की गई है। इसके तहत गाँवों में स्वास्थ्य के लिए बुनियादी सुविधाएँ निश्चित समय-सीमा में उपलब्ध कराने के लक्ष्य रखे गये हैं। राजीव गांधी सामुदायिक स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित इस कार्यक्रम में ग्राम स्वास्थ्य समितियों की अहम भूमिका है। प्रदेश के हर गाँव में प्रशिक्षित जनस्वास्थ्य रक्षक और प्रशिक्षित दाई इस वर्ष के अतं तक उपलब्ध करा दी जायेगी। गाँव स्तर पर स्वास्थ्य की बुनियादी जरूरतों जैसे पीने का साफ पानी, स्वच्छता, टीकाकरण , पोषण आहार और स्वास्थ्य शिक्षा देने के लिए कार्य योजना क्रियान्वित की जा रही है।
पिछले गणतंत्र दिवस से प्रदेश में महात्मा गांधी के आदर्शों के अनुरूप ग्राम स्वराज स्थापित किया गया। प्रत्येक गाँव की पृथक ग्राम सभा और उसके अन्तर्गत विभिन्न कल्याणकारी और विकास कार्यक्रमों को संचालित करने के लिए आठ समितियों का गठन किया गया है। ग्राम स्वराज प्रतिनिधि-प्रजातंत्र की जगह प्रत्यक्ष प्रजातंत्र कायम करने का माध्यम बना है। प्रदेश में ग्राम स्वराज की समितियों के जरिए करीब 40 लाख लोग विकास के फैसलों में सीधे भागीदार बने हैं। गणतंत्र के प्रति यही हमारी सच्ची प्रतिबध्दता दर्शाता है।
अच्छी सड़कें और बिजली आर्थिक विकास के लिए अनिवार्य हैं। सड़कों के सुधार का एक बड़ा कार्यक्रम प्रदेश में क्रियान्वित किया जा रहा है। सड़कों के विकास के लिये वित्तीय संसाधन सुनिश्चित किए जा चुके हैं, आने वाले दो वर्षों में प्रदेश में लगभग 10 हजार किलोमीटर लम्बे मार्गों का निर्माण व सुधार पूरा हो जायेगा।
प्रदेश में बिजली की कमी से निपटने के लिए बहुआयामी ऊजाÇ सुधार कार्यक्रम लागू किया गया है। इसमें बिजली चोरी रोकने, पारेषण और वितरण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने और नए बिजली संयंत्र कायम करने पर तेजी से प्रगति हो रही है। अगले दो वर्षों में प्रदेश बिजली संकट से उबर जाएगा।
प्रदेश की कानून और व्यवस्था की विशेष स्थितियों से निपटने के लिए पुलिस को अधिक सक्षम और साधन सम्पन्न बनाया जा रहा है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विशेष कदम उठाये गए हैं।
प्रदेश में साम्प्रदायिक ताकतों को पूरी तरह से हाशिए पर ला दिया गया है और वे शक्तिहीन हैं। इस वजह से प्रदेश में शांति और सौहार्द का माहैल कायम है। समाज के विभिन्न वर्गों में आपसी सद्भाव और सम्मान का एक ऐसा वातावरण बना हुआ है जिससे विकास गतिमान होता है और समृध्दि आती है।
आज का यह अवसर उन पवित्र संकल्पों को दोहराने का है जो हमारे संविधान का मूल आधार हैं। आइये संविधान में निहित मूल्यों के प्रति हम सब अपनी आस्था व्यक्त करें और प्रदेश को प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ाएं।
जय हिन्द । भारत माता की जय।