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गणतंत्र दिवस के इस महान अवसर पर प्रदेश के सभी नागरिकों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। हम सविधान में दिखाए गए रास्ते पर चल कर देश और प्रदेश को आगे बढायें मेरी यही कामना है। आज ही के दिन पचपन साल पहले हमने जो संविधान अंगीकार किया था , उसमें निहित भावनाओं और संकल्पों पर हम कितने खरे उतरे हैं, आज यह आत्मावलोकन करने का अवसर है। नागरिकों की मजबूती के साथ ही गण और तंत्र के रिश्ते भी मजबूत होते हैं और इन रिश्तों की मजबूती से देश और प्रदेश मजबूत होता है। प्रदेश में आम आदमी के कल्याण के लिए जो कदम उठाये गये हैं उनसे रिश्तों की यह मजबूती और सुदृढ़ होती है।

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हमारे गणतंत्र की कई खूबियां हैं जिनमें से एक विभिन्न स्तरों पर जनप्रतिनिधियों का चुना जाना भी है। हमारा प्रजातंत्र प्रतिनिधि प्रजातंत्र है, इसमें निर्वाचन एक अनिवार्य प्रक्रिया है। हमारे वैचारिक धरातल पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन आपसी वैमनस्य नहीं होना चाहिए। निर्वाचन के बाद प्रदेश को विकास के रास्ते पर ले जाना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। प्रदेश में हाल ही में नगरीय संस्थाओं के चुनाव शांतिपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुए हैं और 13 नगर निगम, 75 नगरपालिका परिषद और 217 नगर पंचायत के प्रतिनिधियों को जनता ने चुना है। इन निर्वाचित प्रतिनिधियों ने नगरीय विकास की अपनी जिम्मेदारी सम्हाल ली है। पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव की प्रक्रिया जारी है और इस माह के अंत तक यह पूरी हो जाएगी। चुने हुए पंचायत प्रतिनिधि शीघ्र ही ग्रामीण विकास के कार्यो में अपना योगदान देने लगेंगे।

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राज्य की बहुसंख्यक जनता ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। हमारी कोशिश है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी योजनाएं संचालित की जाएं जिससे वहां आर्थिक गतिविधियां बढ़ें, जीवन स्तर बेहतर हो और अधिकाधिक लोगों को रोजगार के अवसर मिलें।

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कृषि के विकास को गति मिले इस दृष्टि से किसानों को खाद और बीज के लिए सस्ती ब्याज दर पर खरीफ फसलों के लिए एक हजार 71 करोड़ रुपयों के सहकारी ॠण उपलब्ध कराए गए हैं। किसानों को राहत देने के लिए दीर्घकालीन ॠणों पर जो ब्याज दर 13 से 17 प्रतिशत थी उसे घटाकर 9 से 11 प्रतिशत किया गया है। सरकार के इस कदम से राज्य के एक लाख 35 हजार किसानों को दस करोड़ रुपयों से ज्यादा की ब्याज राहत मिलने लगी है। प्रदेश के 23 लाख से ज्यादा किसानों को क्रेडिट कार्ड प्रदाय किये गये हैं। सहकारिता से जुड़े प्रकरणों का शीघ्रता और निष्पक्षता से निराकरण के उद्देश्य से वर्षो से बंद सहकारी न्यायाधिकरण पुन: प्रारम्भ किया गया है।

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प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में इस वर्ष पांच गांवों को गोकुल ग्राम के रुप में विकसित किया जा रहा है। इन गांवों में शिक्षा , स्वास्थ्य, जल, स्वच्छता, ऊर्जा, और पर्यावरण की जरुरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही कृषि और पशुपालन जैसी गतिविधियो को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि इन गांवों में आर्थिक गतिविधियों का विकास हो और वहां लोगों को रोजगार के ज्यादा अवसर मिलें। गोकुल ग्रामों में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को तीन-तीन गायें भी प्रदान किये जाने का प्रावधान है ताकि उनकी आमदनी में वृध्दि हो और जीवन स्तर में सुधार आये।

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किसानों को और अधिक सिंचाई सुविधा मिल सके, इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये अपूर्ण सिंचाई योजनाओं को पूरा कर सिंचाई सुविधाएं बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं। निर्माणाधीन सिंचाई योजनाओं को पूरा करने के लिये विभिन्न स्रोतों से बड़े पैमाने पर संसाधन जुटाए जा रहे हैं। उम्मीद है कि इस वर्ष के अंत तक 70 हजार हेक्टेयर क्षेत्र के लिए अतिरिक्त सिंचाई क्षमता निर्मित हो जाएगी। नर्मदा नदी के जल का अधिकाधिक उपयोग करने के लिए अनेक योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं, इन पर चल रहे काम को तेजी से पूर्णत: की ओर ले जाने के प्रयास किए गए हैं।

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इंदिरा सागर बांध निर्माण के कारण छनेरा में नया हरसूद बसाया गया है। अपने मूल स्थान को छोड़ने की तकलीफें होना स्वाभाविक है, लेकिन भावी पीढ़ियों की समृध्दि और खुशहाली की विकासोन्मुखी योजनाओं का निर्माण भी जरुरी है। इस दृष्टि से विस्थापितों ने बड़ा त्याग किया है। छनेरा में स्वास्थ्य केन्द्र ,पशु चिकित्सालय, न्यायालय और जनसामान्य के लिये जरुरी अनेक सरकारी कार्यालयों ने काम करना शुरु कर दिया है। वहां जो नए स्कूल खुले है उनमें पढ़ाई-लिखाई का काम शुरु हो गया है।

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हमारी चिन्ता के केन्द्र में वे लोग भी हैं जिन्हें जरुरत के अनुरुप चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पातीं। अब राज्य में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के परिवारों को सरकारी अस्पतालों में भर्ती होने पर जांच और उपचार के लिये एक वर्ष में बीस हजार रुपये तक की नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा प्रदाय करने के लिये दीनदयाल अन्त्योदय उपचार योजना शुरु की गई है। यह सुविधा प्राप्त करने वाले पात्र परिवारों को परिचय पत्र भी जारी किये जा रहे हैं।

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अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और गरीबी रेखा के नीचे के अन्य परिवारों की महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिये भी एक योजना प्रारम्भ की गई है। इस योजना के तहत प्रसव के लिए अस्पतालों तक जाने के लिये परिवहन व्यय का भुगतान शासन द्वारा किया जा रहा है। शत प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व जांच और उपचार की सुविधा मिले, इस उद्देश्य से जननी सेवा योजना प्रारम्भ् की जा रही है।

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सभी बच्चे स्कूल जायें, इस उद्देश्य से एक विशेष अभियान संचालित कर इस वर्ष तीन लाख 16 हजार ऐसे बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिलाने में सफलता मिली है , जो पहले स्कूल नहीं जाते थे।

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स्कूल जाने वाले बच्चों को पोषणयुक्त और रुचिकर मध्यान्ह भोजन देने की योजना सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है। इस योजना से अब ग्रामीण इलाकों की शालाओं का नियमित संचालन हो रहा है , शिक्षकों की नियमित उपस्थिति होने लगी है और स्कूलों में आने वाले बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी होने के साथ ही साथ स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति में भी कमी आई है। लगभग 89 लाख बच्चें इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। मध्यान्ह भोजन से जुड़ी एक बड़ी उपलब्धि यह भी रही है कि समाज इस योजना के माध्यम से अपनी आने वाले पीढ़ियों के भविष्य के प्रति सजग हुआ है। प्रदेश के लगभग सभी हिस्सों में मध्यान्ह भोजन योजना के क्रियान्वयन में जनसहयोग उल्लेखनीय ढंग से मिला है।

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महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले अन्य वर्गों की कक्षा नौ की ऐसी सभी छात्राओं को जो अपने गांव से निकटवर्ती किसी अन्य गांव के स्कूल में पढ़ने के लिये जाती है, उन्हें नि:शुल्क साईकिलें प्रदाय की जा रही हैं। प्रदेश में इस साल 44 लाख छात्राओं को नि:शुल्क गणवेश बांटे जा रहे हैं।

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प्रदेश में न्यायिक प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इस वर्ष छोटे-मोटे अपराधों से संबंधित लगभग 77 हजार मुकदमे वापिस लेने का निर्णय लिया गया है। दिसंबर माह के अंत तक लगभग 26 हजार मामले वापिस ले लिए गए हैं। इससे न्यायालयों में लंबित मुकदमों का भार कम होगा और गंभीर अपराध वाले मुकदमों की सुनवाई तेजी से हो सकेगी। नागरिकों को न्याय के लिए दूर स्थानों तक न जाना पड़े इस दृष्टि से प्रदेश के उन स्थानों पर जहां न्यायालय नहीं हैं वहां बड़ी संख्या में इनकी स्थापना की कार्रवाई चल रही है।

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शहरी इलाकों की मलिन बस्तियों को व्यवस्थित ढंग से बसाने, साफ-सुथरा और स्वास्थ्यवर्धक वातावरण देने के लिए अयोध्या बस्ती योजना शुरु की गई है। अगले चार वर्षो में दो हजार अयोध्या बस्तियों के विकास का लक्ष्य रखा गया है। इस वर्ष नगरीय क्षेत्रों में 359 अयोध्या बस्तियों का विकास किया जायेगा। भोपाल शहर में एक स्लम अपग्रेडेशन स्कीम शुरु की गई है जिसमें शहर की 18 झुग्गी बस्तियों को सुविधायुक्त बनाये जाने का कार्यक्रम है।

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सिर पर मैला ढ़ोने की कुप्रथा को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हुई है, इससे हजारों लोगों को मानवीय गरिमा के साथ रहने का अवसर मिला है। अक्टूबर 2004 में राज्य के सभी नगरीय क्षेत्रों में शुष्क शौचालयों को जलवाहित शौचालयों में परिवर्तित कर दिया गया है।

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प्रदेश में सड़कों का विकास पिछले कई वर्षो से उपेक्षित रहा है, जिसके कारण राज्य का आर्थिक विकास भी प्रभावित हुआ है। अब नई सड़कों के निर्माण और पुरानी सड़कों का संधारण प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। प्रदेश में लगभग 11 हजार किलोमीटर से ज्यादा सड़कों का निर्माण तेजी से चल रहा है। आने वाले समय में आवागमन और परिवहन की बेहतर सुविधाएं प्रदेश के नागरिकों को मिल सकेंगी।

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मध्यप्रदेश में पर्यटन की दृष्टि से एक विकसित राज्य होने की सभी क्षमताएं हैं लेकिन पर्यटन की अधोसंरचना न होने के कारण प्रदेश में पर्यटकों की आवा-जाही कम है। अब पर्यटन के क्षेत्र को प्राथमिकता में लाकर उसे एक नया चेहरा देने का प्रयास है। महत्वपूर्ण पर्यटक स्थलों को अच्छी सड़कों से जोड़ने की योजना बनाई गई है। शीघ्र ही जबलपुर वायु सेवा के नक्शे पर होगा। विभिन्न पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों के लिए नई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

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राज्य में बिजली आपूर्ति की स्थिति को सुधारने के प्रयास किये जा रहे हैं। उपभोक्ताओं तक अधिक बिजली पहुंचाने की कोशिशों में सफलता मिली है। विभिन्न क्षेत्रों की आपूर्ति प्राथमिकताएं निर्धारित कर और राज्य के बाहर से बिजली खरीद कर खरीफ और रबी फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को छ: घंटे बिजली दी गई है। आने वाले समय में परीक्षा के समय छात्रों को पढ़ाई के लिए नियमित रुप से बिजली का प्रदाय किया जायेगा, ताकि उनके अध्ययन में व्यवधान न आए *

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हम ऐसे प्रयास कर रहे हैं जिससे वर्ष 2007 तक प्रदेश विद्युत उत्पादन और आपूर्ति के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जाए। इंदिरा सागर, सरदार सरोवर, बाण सागर, मड़ीखेड़ा आदि योजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है, इन योजनाओं से क्रमिक रुप से विद्युत आपूर्ति होने लगेगी। इनके अलावा विरसिंहपुर ताप विद्युतगृह विस्तार योजना, अमरकंटक, ओंकारेश्वर, महेश्वर, गैस आधारित परियोजना और केन्द्रीय कोटे से लगभग 3800 मेगावाट बिजली भी वर्ष 2007 तक मिलने लगेगी।

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प्रदेश में विकास की जरुरतों को पूरा करने के लिए कई कदम उठाये गये हैं। एक और जहां अनुत्पादक व्यय को नियंत्रित किया गया है और प्रशासन में मितव्ययता की व्यापक पहल की गई है वहीं राजस्व वसूली में वृध्दि अर्जित कर प्रदेश की वित्तीय स्थिति को संतुलित बनाये रखने में सफलता मिली है। इस वित्तीय वर्ष के अक्टूबर तक की अवधि में कर राजस्व संग्रहण में पिछले वर्ष की अपेक्षा 21 प्रतिशत की वृध्दि दर्ज हुई है। वनों से प्राप्त होने वाले राजस्व में 30 प्रतिशत और खनिज राजस्व प्राप्तियों में 14 प्रतिशत की वृध्दि हुई है।

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प्रदेश में कानून और व्यवस्था की स्थिति सामान्य रही है। साम्प्रदायिक और सामाजिक सौहार्द्र का वातावरण निरन्तर बना रहा है। इस वर्ष प्रदेश के नागरिकों ने दीपावली और ईद के त्यौहार जो एक साथ आए थे , साथ- साथ् मिलकर मनाए हैं। राज्य के विभिन्न धर्मालंबी और पंथों के लोग प्रदेश के विकास के लिए प्रतिबध्द हैं, और सरकार इन प्रयासों में उनके साथ है।

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हमारे प्रदेश में विकास की असीमित संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं को मूर्तरूप देने के लिये सभी को एकजुटता के साथ प्रयत्न करना चाहिए। गणतंत्र दिवस के इस पावन अवसर पर मैं सभी नागरिकों, खासकर युवकों का आह्वान करता हूं कि वे प्रदेश के विकास में अपनी सक्रिय सहभागिता निभायें ताकि मध्यप्रदेश, देश के अग्रणी विकसित राज्यों में शामिल हो सके।
धन्यवाद।
जयहिन्द।