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मेरे प्यारे भाईयों और बहनों,

गणतंत्र दिवस की इस मंगल बेला पर सबसे पहले मैं उन शहीदों को नमन करता हूं जिनके बलिदान से आज का यह दिन हमें नसीब हुआ है। मैं सभी प्रदेशवासियों को आज के दिन की हादिर्क बधाई देता हूं। आज का दिन हमारे इतिहास का एक यादगार दिन है। 26 जनवरी 1928 के दिन भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्ता सम्पन्न देश बनाने का संकल्प हमारे नेताओं ने लिया था जो 56 साल पहले 26 जनवरी,1950 को पूरा हुआ जब हमने अपना संविधान अंगीकार कर भारत को प्रभुत्ता सम्पन्न गणतंत्र घोषित किया।

हमारे संविधान में हमारे महान नेताओं के वे सभी आदर्श प्रतिबिंबित है जिनसे आजादी की लड़ाई के दौरान उन्हें प्रेरणा मिली। उनके आदर्श थे स्वतंत्रता, समानता, धर्मनिरपेक्षता, मौलिक अधिकारों की रक्षा, समाज के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग की प्रगति। हर साल आज का यह दिन हमें मौका देता है कि हम समीक्षा करें और यह समझने की कोशिश करें कि हमारे संविधान में निहित उन महान मूल्यों की प्राप्ति के लिए हमारी कोशिश कितनी कामयाब और सार्थक रही हैं। आज के दिन का महत्व इसी आत्म मूल्यांकन में है।

आज हमारा देश एक महत्वपूर्ण आथिर्क शक्ति के रूप में उभर रहा है। हमारी औद्योगिक कान्ति, कृषि व्यवस्थाओं में दूरगामी बदलाव, युवा पीढ़ी की रचनात्मक उर्जा, शिक्षा के क्षेत्र में नये प्रतिमान जैसे अनेक विषय हैं जिन पर हमें गर्व है। आज हमारी महिलाएं सामाजिक प्रगति की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हंै। उनका सशक्तिकरण हमारा महत्वपूर्ण उद्देश्य है। लोकतंत्र में हमारा विश्वास और निष्ठा विश्व विदित है। यह सब हमारे संविधान की प्रेरणा का प्रतिफल है। पर अभी सफर लम्बा है। रास्ते में अभी भी कई कठिनाइयां और समस्यायें हैं। हमारा संकल्प यह होना चाहिए कि आज के दिन हम इन कठिनाइयों और दिक्कतों को दूर करने के लिए अपने को समपिर्त करें।

हमारा मध्यप्रदेश भी देश की प्रगति में हिस्सेदार है। मध्यप्रदेश का जीवन और समाज बहुरंगी है, अनेक विविधताओं से परिपूर्ण है। इस विविधीय और बहुरंगी समाज में अनुसूचित जाति, जनजाति और कमजोर वर्ग बड़ी संख्या में है। मध्यप्रदेश पर प्रकृति की असीम कृपा रही है। प्रदेश में वन, खनिज, भूमि, जलसंपदा और अन्य प्राकृतिक संसाधानों की भरमार है। प्रदेश के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, और पिछड़े वर्ग तथा अल्पसंख्यक समाज को लाभान्वित करना शासन का मुख्य लक्ष्य है। भेदभावरहित, भष्टाचार-मुक्त और नतीजे देने वाला प्रशासन राज्य की सवोर्च्च प्राथमिकता है। हमारा प्रयास यह है कि मध्यप्रदेश में हम एक ऐसा प्रशासनतंत्र विकसित करें जो आम जनता के साथ निरन्तर संवाद और संपर्क कायम रखे, जो मानवीय संवदेनाओं से भरपूर हो तथा जो समाज के हर वर्ग के लोगों का विश्वास हासिल कर सके।

आज भी हमारे प्रदेश में आथिर्क प्रगति का मुख्य आधार कृषि है। किसानों का जीवन खुशहाल बनाने के लिए राज्य शासन कटिबद्ध है। राज्य शासन इस सच्चाई से वाकिफ है कि कृषि को नया रूप देना आज की बुनियादी जरूरत है। इसलिए खेती किसानी में पारम्परिक व्यवस्थाओं के साथ आधुनिक प्रयोगों को भी तरजीह दी जा रही है। हमने बागवानी तथा फूड प्राससिंग का नया विभाग गठित किया है ताकि बागवानी को प्रोत्साहित किया जा सके। प्रदेश को जैविक कृषि में देश का सवोर्त्तम राज्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

सिंचाई सुविधाओं का विस्तार एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है। राज्य शासन का प्रयास है कि अगले तीन वषोर्ं में राज्य में सिंचाई की सुविधा 38 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत हो सके, जिससे अगले तीन वषोर्ं में आठ लाख हेक्टर में अतिरिक्त सिंचाई की सम्भावना हो सके। किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने सिंचाई पम्पों के करीब 1741.00 करोड़ रूपये के विद्युत श्रृण माफ किए हैं। प्रदेश का जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्यकम देश का सबसे बड़ा कार्यकम है जिसके तहत 24 लाख हेक्टर क्षेत्र में कार्य हुआ है।

शिक्षा और स्वास्थ्य जीवन की बुनियादी जरूरतें हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाओं को लेकर राज्य शासन का यह संकल्प है कि प्रदेश के दूरदराज इलाकों तक ये सुविधाएं लोगों को आसानी से सुलभ रहें। प्रदेश सरकार की यह चिन्ता है कि सभी बच्चे स्कूल जाएं और कोई बच्चा बीच में पढाई नहीं छोडे। लड़कियों की शिक्षा पर हम ज्यादा जोर दे रहे हैं। बालिकाओं को निशुल्क पोशाक, साइकिलें और किताबें दी जा रही हैं। उच्च शिक्षा की व्यवस्थाओं को भी सुधारने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

महिला और बाल विकास की ओर राज्य शासन विशेष ध्यान दे रहा है। पूरे प्रदेश में 50 हजार आंगनबाड़ी केन्द चल रहे हैं जिससे 53 लाख से अधिक महिलाएं और बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। शिशुओं के कुपोषण की दर 55.24 प्रतिशत से घटकर 50.32 प्रतिशत हो गई है। शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में राज्य शासन का प्रयास जारी है।

प्रदेश में ग्रामीण विकास योजनाओं पर समयबद्ध अमल किया जा रहा है और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। ग्रामीण रोजगार योजनाओं के तहत लाखों लोगों को रोजगार दिया जा रहा है। स्वर्ण जयंती रोजगार योजना के तहत प्रदेश में ढाई लाख से अधिक सेल्फ-हेल्प ग्रुप गठित किये गये हैं। इनमें लगभग आधे ग्रुप महिलाओं के हैं। प्रदेश के सात आदिवासी बहुल जिलों में मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका योजना का प्रथम चरण सफलतापूर्वक लागू किया गया है। नि:शक्तजनों के प्रति राज्य शासन की जिम्मेदारियां को पूरा करने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।

वनों के बेहतर प्रबंधन के लिए नई वन नीति 2005 बनाई गई है। केन्द शासन ने वनग्रामों के विकास के लिए लगभग 83 करोड की राशि मंजूर की है। बारहवें वित्तीय आयोग से अगले पांच सालों में प्रतिवर्ष 23 करोड़ रूपये की राशि जंगलों के सुधार के लिए प्राप्त होगी।

मध्यप्रदेश में पर्यटन की असीमित सम्भावनायें हैं। यहां अनेकानेक आकर्षक ऐतिहासिक स्थान हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक इको पर्यटन बोर्ड का गठन किया गया है। ऐसी योजनाएं बनाई जा रही हैं कि देश और विदेश के सैलानी मध्यप्रदेश के सौन्दर्य और इसके अद्भुत सांस्कृतिक विरासत की ओर आकषिर्त हांे।

आथिर्क विकास के लिए तीन अपरिहार्य आवश्यकताएं हैं- उर्जा, परिवहन और संचार। प्रदेश में इन आधारभूत आवश्यकताओं के विकास के लिए सघन प्रयास किये जा रहे हैं। सड़कों का निर्माण उच्च प्राथमिकता पर किया जा रहा है। प्रदेश में तीन हजार से अधिक गांवों को सड़कों से जोड़ा गया है। प्रदेश में अगले तीन वषोर्ं में 40 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण तथा 2100 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। सूचना प्रौद्योगिकी विकास की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इसका उपयोग सरकार और आम आदमी के बीच सम्पर्क बनाने के लिए किया जाएगा।

प्रदेश में उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए उद्योग संवर्द्धन नीति एवं कार्य योजना 2004 लागू की गई है। लघु उद्योगों को पुनर्जीवित करने के लिए उद्योग मित्र योजना के अंतर्गत कोशिशें जारी हैं।

कुशल प्रबंधन से प्रदेश की वित्तीय स्थिति को बेहतर किया जा सका है। इससे विकास को गति मिली है तथा कल्याण कायोर्ं में निवेश बढ़ा है। हमारी उपलब्ध्यिां कठोर वित्तीय अनुशासन के पालन से मिली हैं। कर राजस्व से इस साल हमारी आय में 15 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। बेहतर वित्तीय स्थिति के चलते राज्य सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक से एक भी दिन का ओवरड्रापट नहीं लिया है।

मध्यप्रदेश सांस्कृतिक रूप से एक समृद्ध प्रदेश है। मध्यप्रदेश के विभिन्न अंचलों के खान-पान, वेशभूषा, बोलियां, उनकी सांस्कृतिक परम्पराएं विविधता में एकता का भान कराती हैं। सांची के बौद्ध स्तूप, भोपाल की ताजुल मस्जिद, उज्जैन और ओंकारेश्वर के ज्योतिलिंग मंदिर हमारी धामिर्क विरासत के प्रतीक हैं। इस विरासत की सुरक्षा के लिए उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, अमरकंटक, ओरछा, मैहर और चित्रकूट को पवित्र नगर घोषित करने का निर्णय लिया गया है।

भीमबैटका के प्रागैतिहासिक शैलचित्र और बाघ के भित्तिचित्र हमारी आदिम सभ्यता के सतत प्रवाह के साक्षी रहे हैं।

प्रदेश में आज पूरी तरह से शांति का वातावरण है। प्रदेशवासियों के बीच भाईचारा और सौहार्द है। यह शांति प्रदेश के विकास को गति देती है। मध्यप्रदेश का आमजन संविधान में निहित आर्दशों से प्रेरित है और उसकी सकियता के फलस्वरूप मध्यप्रदेश शासन आश्वस्त है कि विकास में हर वर्ग सहभागी है। गण और तंत्र के इस मजबूत रिश्ते से हमें आने वाला कल उम्मीदों से भरा नजर आ रहा है। प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह संविधान की सुरक्षा और देश की अखण्डता के लिए जागरूक रहे और किसी भी प्रकार के विघटनकारी तत्वों को समाज में न पनपने दें। यह प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि हमारे गणतंत्र को मजबूत करें और देशभक्ति का जज्बा बनाये रखे।

जय हिन्द।