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प्यारे भाईयों और बहनों,

भारतीय गणतंत्र की 59वीं वर्षगांठ के शुभ अवसर पर मैं प्रदेश के नागरिकों को बधाई देता हूं। मैं उन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को प्रणाम करता हूं जिनके त्याग और बलिदान की वजह से हमें आजादी मिली और स्वतंत्र संप्रभुता सम्पन्न गणराज्य का गठन हुआ। लोकतंत्र में हमारा विश्वास और निष्ठा विश्व-विदित है।यह हमारे संविधान का प्रतिफल है।

राज्य सरकार ने अधोसंरचना के विकास, निवेश में वृद्धि, कृषि को लाभप्रद बनाने, शिक्षा और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, महिला सशक्तीकरण, सशक्त कानून व्यवस्था तथा सुशासन के सात संकल्प लिए हैं। इन संकल्पों को पूरा करने के लिए समाज की भागीदारी भी सुनिश्चित की जावेगी।

प्रदेश की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। किसानों को डी.ए.पी. उपलब्ध कराने के लिए अग्रिम भुगतान के आधार पर आयात किया गया है। बीज उत्पादन में प्रदेश अग्रणी स्थान पर है। कृषि शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए ग्वालियर में नये कृषि शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए ग्वालियर में नये कृषि महाविद्यालय की स्थापना की गई है। कृषि में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका के दृष्टिगत उनके प्रशिक्षण की विशेष व्यवस्था की गई है। सहकारी संस्थाओं द्वारा किसानों को 31 लाख से अधिक किसान क्रेडिट कार्ड वितरित किये गये हैं। अल्पकालीन ऋण ब्याज दर घटाकर 5।़की गई ।

ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के अन्तर्गत सिंचाई के लिए लगभग 15 हजार करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है तथा 10 लाख हेक्टर से अधिक अतिरिक्त सिंचाई क्षमता निर्मित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। राजघाट परियोजना की नहर निर्माण कार्य, बाण सागर बांध तथा सिंध परियोजना में मड़ी खेड़ा बांध का कार्य पूर्ण किया जा चुका हे। अब महान, वारियारपुर, माही, बावनथड़ी आदि योजनाओं को भी पूरा किया जायेगा।

बढ़ती मांग की पूर्ति के लिए विद्युत क्षमता बढ़ाने के प्रयास किये गये हैं। विगत पांच वर्षों में बिजली उत्पादन क्षमता में 3147 मेगावाट की वृद्धि की गई है। 11वीं पंचवर्षीय योजना के पूर्ण होने तक 5818 मेगावाट क्षमता वृद्धि का लक्ष्य है। ऊर्जा के अपारंपरिक स्रातों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस वर्ष कृषि उपभोक्ताओं को राहत दिलाने के लिए राज्य शासन द्वारा कृषि उपभोक्ताओं को 1187 करोड़ रूपये की टैरिफ सब्सिडी दी जा रही है। कृषक राहत योजना के अन्तर्गत कृषि उपभोक्ताओं पर बकाया बिलों की राशि के निराकरण के लिए ऊर्जा प्रभार की आधी राशि एवं सरचार्ज की पूर्ण राशि माफ की गई है। चालू वित्त वर्ष में 7019 मेगावाट की अधिकतम मांग की पूर्ति की है जो प्रदेश के इतिहास में सर्वाधिक है।

मध्यप्रदेश अब अच्छी सड़कों वाला राज्य कहलाने लगा है। प्रदेश के सभी सम्भाग मुख्यालय चार लेन सड़क मार्ग से, सम्भाग के सभी जिले दो लेन पक्के मार्ग से जोड़े जायेंगे। विगत पांच वर्षों में लोक निर्माण विभाग द्वारा लगभग 23 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण तथा उन्नयन किया गया है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत विगत पांच वर्षों में 18 हजार कि.मी. से अधिक लम्बाई की सड़कों का निर्माण कर लगभग 7000 ग्रामों को लाभान्वित किया गया।

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत इस वर्ष लगभग 37 लाख 50 हजार ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। पारिश्रमिक के रूप में लगभग 13 सौ करोड़ रूपये वितरित किये गये हैं। इन्दिरा आवास योजना के अन्तर्गत गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले 53 हजार परिवारों को आवास के लिये वित्तीय सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत 11 हजार से अधिक आवासहीन परिवारों को वित्तीय सहायता दी जा रही है। जल अभिषेक अभियान के अन्तर्गत दो हजार चार सौ करोड़ रूपये की लागत से 5 लाख से अधिक जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण किया गया है।

सरकार ने अधोसंरचना विकास के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र पर समान रूप से ध्यान दिया है। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अन्तर्गत अभी तक 82 हजार कन्याओं के विवाह कराये गये हैं। आम आदमी बीमा योजना, राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना तथा सामाजिक सुरक्षा योजना का निरंतर क्रियान्वयन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना के तहत अभी तक 14 लाख मजदूरों का पंजीयन किया गया है।

प्रदेश में वन संसाधनों के बेहतर प्रबंधन एवं वनों पर निर्भर वनवासियों की आर्थिक स्थिति में सुधार के प्रयास किये जा रहे हैं। वन अपराधों की रोकथाम के लिए वनकर्मियों को आधुनिक संचार साधनों से लैस किया गया है। वनों में अग्नि दुर्घटना को रोकने के लिए फायर एलट्र सिस्टम विकसित किया गया है।

स्वास्थ्य कार्यक्रमों के सफल कार्यान्वयन के कारण प्रदेश में मातृ मृत्यु दर में कमी हुई है। आदिवासी विकासखंडों में चलित औषधालय प्रारम्भ किए गये। इसका विस्तार सभी अनुसूचित जाति बाहुल्य विकासखंडों तक किया जा रहा है। इस वर्ष जननी सुरक्षा योजना के अन्तर्गत साढ़े आठ लाख गर्भवती महिलायें लाभान्वित हुई हैं। मध्यप्रदेश बीमारी सहायता निधि के अंतर्गत चिन्हित गंभीर बीमारी से पीड़ित गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले 5 हजार 286 लोगों को लाभान्वित किया गया है।

सरकार द्वारा स्कूल शिक्षा को उच्च प्राथमिकता दी गई है। 3500 विद्यालयों का उन्नयन किया गया। बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए शासकीय स्कूल में अध्ययन करने वाली बालिकाओं को लगभग ढाई लाख नि:शुल्क सायकिलें दी गई हैं। अब 12 वीं तक अध्ययनरत छात्राओं को भी इस योजना में शामिल किया गया है। शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है।

बालक-बालिकाओं के जन्म का संतुलित अनुपात बनाये रखने की दिशा में सरकार ने लोगों को जागरूक बनाने के लिए कारगर कदम उठाये हैं। लाड़ली लक्ष्मी योजना सर्वाधिक लोकप्रिय योजना है। बालिका को 21 वर्ष की उम्र में एक लाख से अधिक की राशि प्राप्त होगी। इस योजना में अभी तक डेढ़ लाख कन्याएं लाभान्वित हुई हैं। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में बच्चों को कुपोषण से मुक्त कराने के लिए प्रोजेक्ट शक्तिमान संचालित है।

उच्च शिक्षा में गुणवत्ता लाने की दृष्टि से प्रदेश के समस्त महाविद्यालयों में एक समान पाठ्यक्रम तथा स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर सेमेस्टर पद्धति लागू की गई है। प्रदेश में संस्कृत भाषा के विकास एवं उत्थान के लिए महर्षि पाणिनी संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना भी की गई है। तकनीकी संस्थाओं तथा उनके पाठ्यक्रमों में छात्रों की संख्या में वृद्धि हुई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति योजना के अन्तर्गत विगत पांच वर्षों में लगभग 50 हजार ग्रामीण बसाहटों में और 39 हजार ग्रामीण शालाओं में पेयजल की पूर्ति की गई है। फ्लोराईड प्रभावित बसाहटों में वैकल्पिक माध्यम से शुद्ध पेयजल प्रदाय की योजना को प्राथमिकता दी जा रही है।

सरकार ने प्रदेश के सम्यक विकास के लिये योजनायें बनायी हैं। क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने की दिशा में किये गये प्रयासों के तहत बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण, विंध्य विकास प्राधिकारण एवं महाकौशल विकास प्राधिकरण का गठन किया है। प्रदेश में औद्योगिक निवेश का अनुकूल वातावरण बनाया गया है। नगरों के समेकित विकास की योजनाओं को प्राथमिकता पर क्रियान्वित किया है।

राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति के शैक्षणिक विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किये हैं। छात्र-छात्राओं की शिष्यवृत्ति एवं छात्रवृत्ति में वृद्धि की गई। पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति हेतु राज्य शासन ने विद्यार्थियों के माता-पिता/ अभिभावकों की आय सीमा एक लाख अस्सी हजार रूपये से बढ़ाकर 3 लाख रूपये की है। अनुसूचति जाति के शिक्षित बेरोजगार युवकों के लिए रोजगार गारंटी प्रशिक्षण योजना प्रारंभ की गई है।

प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जनजातियों के विकास और उनके हित संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। आदिवासियों को वन अधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत हक दिलाने में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। भारत सरकार ने मध्यप्रदेश में की गई कार्रवाई को आदर्श मानते हुए अन्य राज्यों को अनुसरण करने का सुझाव दिया है। आदिवासी क्षेत्र में नवीन शैक्षणिक संस्थायें प्रारंभ करने की कार्रवाई की जा रही है। विशेष पिछड़ी जनजातियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, कृषि विकास, प्रशिक्षण तथा रोजगार की योजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

राज्य शासन द्वारा पिछड़े वर्ग के युवक-युवतियों में उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्वरोजगार प्रशिक्षण योजना लागू की गई है। इस वर्ग के छात्र'छात्राओं को पी.ई.टी./पी.एम.टी. तथा अन्य तकनीकी परीक्षाओं के लिए कोचिंग की व्यवस्था संभाग स्तर पर की गई है।

मध्यप्रदेश अपनी शांति और सौहार्द्र के लिए जाना जाता है। विभिन्न धर्मों के त्यौहार शांति और सद्भाव से मनाये गए। कानून एवं व्यवस्था को सुदृढ़ रखने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल, संसाधन और प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जा रही है। गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर मैं सभी नागरिकों का प्रदेश की नवनिर्माण में सक्रिय योगदान करने का आव्हान करता हूं।

जय हिन्द