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माननीय सदस्यगण,

1.वर्ष 2002 के इस पहले सत्र में आप सबका स्वागत है। इस सत्र में आपको कई विधायी और बजट संबंधी महत्वपूर्ण कार्य करने हैं। आप अपने संसदीय कार्य सफलतापूर्वक कर सकें, इसके लिये मेरी शुभकामनायें।

2.मेरी सरकार ने पिछले आठ सालों में जो शासन शैली विकसित की है उसके केन्द्रीय तत्त्व के रूप में, शासन चलाने में सरकार के साथ-साथ सामान्य जन की हिस्सेदारी है। राजनीतिक-प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण और खुलेपन को कार्यपध्दति के रूप में विकसित किया गया है। हमारी मान्यता रही है कि आज के समय में लोगों को विश्वास में लिए बिना कोई लक्ष्य प्राप्त करना संभव नहीं है और यही प्रजातंत्र की मूल भावना भी है।

3.पिछले वर्षों में मेरी सरकार ने एक सुविचारित नीति के तहत प्रदेश में मानव विकास परिदृश्य को बेहतर बनाने का प्रयास किया है। हाल ही में मानव विकास के कई क्षेत्रों में जो मूल्यांकन हुआ है, उसमें उल्लेखनीय परिणाम सामने आये हैं।

4.मुझे सदन को यह बताने में खुशी हो रही है कि मध्यप्रदेश में दशकीय जनसंख्या वृध्दि दर में 2.9 फीसदी की कमी आई है। जहां 1981-91 के दशक में पुनर्गठित मध्यप्रदेश में दशकीय जनसंख्या वृध्दि दर 27.24 प्रतिशत थी, वहीं जनगणना 2001 के प्रावधिक आंकड़ों के अनुसार 1991-2001 के दशक में जनसंख्या वृध्दि दर 24.34 प्रतिशत रही। जनसंख्या वृध्दि दर में कमी का सीधा संबंध बेहतर जीवन स्तर और स्वास्थ्य सुविधाओं की अधिक कारगर पहुंच को प्रदर्शित करता है। पिछले पांच वर्षों में बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम को बेहतर ढंग से लागू करने के फलस्वरूप शिशु मृत्यु दर 99 प्रति हजार से घटकर 91 प्रति हजार हुई है। मध्यप्रदेश में सकल प्रजनन दर में भी नब्बे के दशक में 80 के दशक की अपेक्षा 1.29 की कमी आई है।

5.शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर और सकल प्रजनन दर को तेजी से कम करने के लिये एक सोची-समझी नीति पर अमल किया जा रहा है। इसके अंतर्गत सामुदायिक कार्यक्रम की रचना और उसके क्रियान्वयन के लिये प्रत्येक गाँव में ग्राम स्वास्थ्य समिति गठित की गई है। गाँवों में जनस्वास्थ्य के कार्यक्रम इस समिति की देखरेख में संचालित होंगे। समिति के सदस्यों को राज्य शासन विशेष प्रशिक्षण देगा।

6.पिछले वर्ष मध्यप्रदेश में राजीव गांधी सामुदायिक स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वस्थ जीवन सेवा गारंटी योजना प्रारंभ की गई है। इस योजना के तहत समयबध्द तरीके से गांवों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं को उपलब्ध कराया जा रहा है। इस वर्ष हर गांव में प्रशिक्षित जनस्वास्थ्य रक्षक और प्रशिक्षित दाई उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। हर बसाहट में स्वच्छ पेयजल, गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व देखभाल, पूरक पोषण आहार, बच्चों का टीकाकरण, गंदे पानी की निकासी और कचरे का निपटान, स्वास्थ्य शिक्षा और व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण के लक्ष्य रखे गये हैं। प्रदेश में अगले ग्राम संपर्क अभियान के साथ स्वच्छता अभियान प्रारंभ किया जायेगा। बुनियादी स्वास्थ्य के मुद्दे पर मध्यप्रदेश सरकार ने नई रणनीति के तहत कार्य योजना बनाई है। इस कार्य योजना में स्वास्थ्य सुविधाओं को समुदाय की सक्रिय भागीदारी से उपलब्ध कराकर सबके लिये स्वास्थ्य को अमली जामा पहनाया जायेगा।

7. जनगणना 2001 के ऑंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि विगत दशक में प्रदेश में साक्षरता के स्तर में करीब 20 प्रतिशत की वृध्दि अंकित की गई है। साक्षरता दर जो वर्ष 1991 में मात्र 44.67 प्रतिशत थी, अब बढ़कर 64.11 प्रतिशत हो गई है। पुरुषों की साक्षरता दर जहाँ 1991 में 58.54 प्रतिशत थी वह वर्ष 2001 में बढ़कर 76.80 प्रतिशत हो गई। राज्य की पुरुष साक्षरता दर राष्ट्रीय दर से अधिक हो गई है। साथ ही इस अवधि में पुनर्गठित मध्यप्रदेश में महिला साक्षरता के क्षेत्र में 21 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृध्दि हुई है। वर्ष 1991 में महिला साक्षरता दर जो 29.35 प्रतिशत थी, बढ़कर वर्ष 2001 में 50.28 प्रतिशत हो गई। आज प्रदेश के सोलह जिलों में महिला साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत 54 प्रतिशत से अधिक है। नरसिंहपुर, दतिया, भोपाल, रायसेन और इंदौर इन पाँच जिलों में यह उपलब्धि 60 प्रतिशत से अधिक है। महिला साक्षरता में प्रदेश की उपलब्धि को भारत सरकार ने दशकीय उपलब्धि पुरस्कार से सम्मानित किया है।

8. मध्यप्रदेश की साक्षरता के क्षेत्र में उपलब्धि अनेक राज्यों से बेहतर रही है। मध्यप्रदेश साक्षरता की दृष्टि से आंध्रप्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान, उत्तरप्रदेश और बिहार से आगे है। यह सफलता मेरी सरकार की शिक्षा के प्रति प्रतिबध्दता के कारण ही संभव हो सकी है। प्रदेश की विशिष्ट स्थितियों को ध्यान में रखकर राजीव गांधी शिक्षा मिशन द्वारा शिक्षा गारन्टी योजना और पढ़ना-बढ़ना आंदोलन जैसे विशेष प्रयासों के कारण ही यह अभूतपूर्व वृध्दि हासिल हुई है, क्योंकि इनके द्वारा दूरस्थ इलाकों में रहने वाले वंचित लोगों तक शिक्षा की सुविधा का विस्तार संभव हो सका। सरकार की प्रतिबध्दता और समुदाय की जीवन्त भागीदारी ने मिलकर पढ़ने-लिखने के परिदृश्य को उजला बनाया है।

9.शिक्षा के विषय में मेरी सरकार की सोच स्पष्ट रही है। हमने पहले एक किलोमीटर के दायरे में प्राथमिक शिक्षा सुविधा प्रदाय की। तीन किलोमीटर के दायरे में मिडिल स्कूल की सुविधा सुनिश्चित करने के लिये इस वर्ष सात हजार से ज्यादा मिडिल स्कूल खोले गये हैं, इनमें से बारह सौ से ज्यादा स्कूल अनुसूचित जनजाति बहुल इलाकों में हैं। अब पाँच किलोमीटर के दायरे में हाईस्कूल खोलने के लिये सर्वेक्षण कार्य पूरा हो चुका है और नये वित्तीय वर्ष में हाईस्कूल प्रारंभ करने की कार्रवाई की जायेगी।

10.शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के लिये वर्तमान व्यावसायिक शिक्षा के स्वरूप में बदलाव जरूरी है। इस विषय पर विचार करने के लिये इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एच.पी. दीक्षित की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक समिति बनाई गई है। इस समिति की अनुशंसाओं के आधार पर मौजूदा व्यावसायिक शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन किये जायेंगे।

11. नये शिक्षण सत्र में प्रत्येक जिला मुख्यालय पर एक शासकीय विद्यालय को उत्कृष्टता विद्यालय के रूप में विकसित किया जायेगा।

12. राज्य में जीवन विज्ञान और संबध्द विषयों में उच्चस्तरीय शिक्षा और अनुसंधान के लिये राष्ट्रीय स्तर का एक संस्थान स्थापित किया जायेगा। संस्थान की स्थापना के लिये जाने-माने वैज्ञानिक और विज्ञान प्रशासक डॉ. आर.ए. मशेलकर की अध्यक्षता में गठित समिति शीघ्र ही अपना प्रतिवेदन देगी।

13. रीवा में 76 करोड़ रुपये की लागत से बना 800 बिस्तरों का एक आधुनिक अस्पताल संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय प्रारंभ हो गया है। इससे इस क्षेत्र के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होने लगी है। साथ ही रीवा मेडीकल कॉलेज में अब 60 के स्थान पर 150 विद्यार्थी पढ़ सकेंगे।

14. प्रदेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के प्रतिभाशाली बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में अन्य वर्गों के समान ही अवसर मिलें, इस उद्देश्य से सभी जिला मुख्यालयों पर उत्कृष्टता शिक्षा केन्द्र शुरू किये गये हैं। इन केन्द्रों में 9वीं से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क आवास और अन्य सुविधाओं के साथ-साथ पाँच सौ रुपये प्रतिमाह की दर से शिष्यवृत्ति, सौ रुपये प्रतिमाह पौष्टिक आहारवृत्ति और विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

15. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के 11वीं और 12वीं कक्षाओं के छात्रावासों में रहने वाले छात्र-छात्राओं की मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति की राशि में राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से छात्रों के लिये सौ रुपये और छात्राओं के लिये एक सौ दस रुपये प्रतिमाह की एकमुश्त वृध्दि की है।

16. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के जो विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिये दिल्ली में रहकर पढ़ना चाहते हैं, उन्हें नि:शुल्क आवास, मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति और अन्य आवश्यक सुविधायें उपलब्ध कराई जा रही हैं।

17. प्रदेश के उन जिलों में जहाँ अनुसूचित जाति की महिलाओं की साक्षरता दर कम है वहाँ सौ कन्या आश्रमों की स्थापना की कार्रवाई चल रही है ताकि इस वर्ग की लड़कियों को शिक्षा सुलभ हो सके।

18. राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वााविद्यालय के अंतर्गत तकनीकी शिक्षा और सूचना प्रबंधन प्रणाली स्थापित की जा रही है। इस प्रणाली के माध्यम से सभी तकनीकी शिक्षण संस्थाओं को नेटवर्क से जोड़ा जायेगा। आगामी शिक्षण सत्र से इंजीनियरिंग महाविद्यालयों में विद्यार्थियों के प्रवेश की काउंसिलिंग इसी नेटवर्क से की जायेगी। ऑन लाइन काउंसिलिंग की इस नई व्यवस्था से अब छात्र-छात्राओं को प्रवेश के लिये भोपाल नहीं आना पड़ेगा।

19. पिछले कुछ समय से देश की आर्थिक व्यवस्था मंदी के दौर से गुजर रही है। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के रुझान चिन्ता पैदा कर रहे हैं। राष्ट्रीय विकास दर धीमी हो रही है। कठिन आर्थिक हालात के बावजूद मध्यप्रदेश का वित्तीय प्रबन्धन बेहतर है। वर्ष दो हजार तक मध्यप्रदेश देश के पाँच सबसे कम राज्यों में रहा। 1994-2000 की अवधि में पुनर्गठित मध्यप्रदेश में वार्षिक विकास दर में 5.55 प्रतिशत और प्रति व्यक्ति आय में 3.43 प्रतिशत की वार्षिक वृध्दि दर्ज की गई। छह वर्षों तक निरन्तर मध्यप्रदेश द्वारा इतनी विकास दर पहले कभी हासिल नहीं की गई। वर्ष 2000 के सूखे से पहले तक मध्यप्रदेश देश के सर्वाधिक तेजी से विकास करते राज्यों में शामिल था। वर्ष 2001 में भी सामान्य से कम वर्षा के कारण विकास दर प्रभावित हुई है। मुझे पूरा विश्वााास है कि सामान्य मानसून की स्थिति में मध्यप्रदेश फिर से अपनी तीव्र विकास गति को प्राप्त कर लेगा।

20. नब्बे के दशक में शासन संचालन का व्यय भार लगातार बढ़ा है। मुख्य रूप से शासकीय कर्मचारियों, अधिकारियों के वेतन भत्तों में इस दौरान 14.22 फीसदी प्रतिवर्ष की वृध्दि हुई है, जबकि शासन के राजस्व में वृध्दि की दर 11.50 प्रतिशत रही है। वर्तमान में राज्य शासन की कुल राजस्व प्राप्तियों का 63.85 प्रतिशत वेतन, भत्तों और पेंशन पर खर्च हो रहा है। इस परिस्थिति में कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन भत्तों आदि पर हो रहे व्यय को नियंत्रित करना जरूरी हो गया है। इससे प्रदेश की वित्तीय स्थिति को मध्यम से लंबी अवधि में सुदृढ़ किया जा सकेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि सरकारी अमला इन परिस्थितियों को समझकर सहयोगात्मक रवैया अपनायेगा। मैं यहां यह उल्लेख भी करना चाहूंगा कि मध्यप्रदेश शासन ने न केवल पांचवें वेतन आयोग का लाभ अपने कर्मचारियों को दिया है बल्कि समय-समय पर मूल्यवृध्दि के अनुरूप महंगाई भत्ता भी दिया है।

21. प्रदेश के वित्तीय प्रबन्धन को अधिक सक्षम और युक्ति-युक्त बनाने के लिए वित्त विभाग के कार्यों को विकेन्द्रित किया गया है। यह भी निर्णय लिया गया है कि प्रत्येक योजना की आयोजना अवधि समाप्त होने पर समीक्षा कर उसे जारी रखने या समाप्त करने के बारे में निर्णय लिया जाये। वर्तमान व्यवस्था में एक बार किसी योजना के प्रारम्भ होने पर उसके पुनरीक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है।

22. मध्यप्रदेश में सड़कों के विकास को उच्च प्राथमिकता दी गई है। करीब 10 हजार किलोमीटर सड़कों के निर्माण और सुधार के लिये वित्तीय व्यवस्थाएं की जा चुकी हैं। बाण्ड सह बी ओ टी योजना के तहत एक हजार करोड़ रुपये के निवेश से अधिक यातायात घनत्व वाले एक हजार 960 किलोमीटर लंबे मार्गों का पुनर्निर्माण किया जा रहा है। सात मार्गों के निर्माण के आदेश जारी किये जा चुके हैं। मण्डी निधि से एक हजार 825 किलोमीटर लंबे मार्गों का उन्नयन करने की कार्रवाई की जा रही है। नाबार्ड से प्राप्त पांच सौ करोड़ रुपये की राशि से सड़कों एवं पुलों का निर्माण किया जा रहा है। केंद्रीय सड़क निधि से इस वर्ष पचास करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय कर 813 किलोमीटर सड़कों का उन्नयन किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने आयोजना के अंतर्गत 954 किलोमीटर लंबे मार्गों का निर्माण आगामी वर्ष में करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा सात बड़े पुल और 123 मध्यम पुलों का निर्माण भी प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री-ग्राम-सड़क- योजना के तहत 717 करोड़ रुपये से लगभग छह हजार किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण का कार्य हाथ में लिया गया है। सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के विशेष प्रबंध किये गये हैं।

23. मैं यहां नवीं पंचवर्षीय योजना के तहत हासिल की गई उपलब्धियों का जिक्र करना चाहूंगा। लोक निर्माण विभाग द्वारा आयोजना के तहत 548 करोड़ रुपये के निवेश से प्रदेश में नवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान एक हजार 576 किलोमीटर सड़कों, 66 बड़े पुलों और 192 मध्यम पुलों का निर्माण पूरा किया जा रहा है। इसके अलावा 285 गांवों को मार्गों से जोड़ा गया।

24. विभिन्न कारणों से बिजली की मांग और आपूर्ति में अंतर बने रहने से प्रदेशवासियों को परेशानी हो रही है। बिजली के इस संकट से निपटने के लिये बहुआयामी कार्यक्रम लागू किया गया है। मध्यप्रदेश में विद्युत उत्पादन संयंत्रों की स्थापना, पारेषण और वितरण प्रणाली को मजबूत करने, बिजली का अपव्यय रोकने के साथ-साथ राज्य विद्युत मंडल को वित्तीय रूप से सक्षम बनाने की दिशा में प्रयास किये जा रहे हैं।

25. पिछले आठ वर्षों में मध्यप्रदेश में 817 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता निर्मित की गई है। पिछले तीन वर्षों में हुई कम वर्षा के कारण जल विद्युत के उत्पादन में काफी कमी हुई है। इसके अलावा राज्य पुनर्गठन के कारण भी बिजली की उपलब्धता में उल्लेखनीय कमी आई है। 425 मेगावॉट क्षमता वाली बाणसागर परियोजना के तहत् 355 मेगावॉट क्षमता स्थापित की जा चुकी है। नवम्बर, 2001 तक इस इकाई से सौ करोड़ यूनिट बिजली पैदा की गई है। 60 मेगावॉट की मड़ीखेड़ा जल विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य प्रारंभ किया जा चुका है। नेशनल हाइड्रो पावर कार्पोरेशन के सहयोग से एक हजार मेगावॉट की इंदिरा सागर परियोजना का कार्य किया जा रहा है। इस परियोजना से 250 मेगावॉट बिजली वर्ष 2003 में और 750 मेगावॉट बिजली वर्ष 2004 में मिलनी प्रारंभ हो जाएगी। आगामी दो वर्षों में सरदार सरोवर परियोजना से भी मध्यप्रदेश को 826 मेगावॉट बिजली मिलनी शुरू हो जाएगी। इसके अलावा केन्द्रीय क्षेत्र के तहत स्थापित हो रहे विद्युत संयंत्रों से भी मध्यप्रदेश को बिजली मिलेगी। मुझे पूरा विश्वााास है कि प्रदेश में शीघ्र ही बिजली की कमी दूर हो जाएगी।

26. रबी मौसम में सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। सिंचाई के लिए लगभग दो हजार मेगावॉट अतिरिक्त बिजली की जरूरत होती है। इस जरूरत को नगरीय क्षेत्रों के विद्युत प्रदाय में कटौती और एनटीपीसी से अतिरिक्त विद्युत खरीदकर पूरा किया जा रहा है। किसानों को सिंचाई के लिए तीन फेज पर प्रतिदिन छह घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में अबाध रूप से रात को एक फेज पर बिजली दी जा रही है। शत-प्रतिशत राजस्व वसूली वाले फीडरों से ग्रामीण क्षेत्रों में 3 फेज पर प्रतिदिन 11 घंटे विद्युत प्रदाय किया जा रहा है।

27. पारेषण और वितरण प्रणाली को एशियाई विकास बैंक से 960 करोड़ रुपये प्राप्त कर सुदृढ़ किया जायेगा। बिजली ऑडिट की व्यवस्था की गई है जिससे बिजली की चोरी पर नियंत्रण हो सकेगा।

28. गैर परम्परागत ऊर्जा के प्रमुख स्रोत कोल बेड मीथेन के दोहन के लिये देश में सात क्षेत्रों की पहचान की गई है। इनमें से सोहागपुर पूर्व, सोहागपुर पश्चिम और पेंच कन्हान क्षेत्र मध्यप्रदेश में हैं। सोहागपुर पूर्व और सोहागपुर पश्चिम में ऊर्जा के इस संसाधन का दोहन शीघ्र ही प्रारंभ हो रहा है। इससे प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और राज्य सरकार को रॉयल्टी के रूप में अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा।

29. मेरी सरकार विकेन्द्रीकरण को और कारगर बनाने के लिये सतत प्रयासरत है। वर्ष 2002-03 से जिला योजना नियोजन प्रणाली लागू की जा रही है। इस प्रणाली से जिले में निर्धारित प्राथमिकताओं के अनुरूप विकास कार्यों के लिये वित्तीय संसाधन मिल सकेंगे। आगामी वार्षिक योजना में चार हजार 825 करोड़ रुपये का व्यय प्रस्तावित है, जिसमें से जिले की योजनाओं पर एक हजार 571 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे। जिला स्तर पर योजनाएं तैयार करने के उद्देश्य से अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया है।

30. प्रदेश में कृषि की उत्पादकता बढ़ाने में सिंचाई एक महत्वपूर्ण कारक है। वित्तीय सीमाओं के बावजूद नवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान प्रदेश में करीब एक लाख 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में शासकीय साधनों से सिंचाई की क्षमता विकसित की गई है। वर्तमान में प्रदेश में 23 वृहद, 10 मध्यम तथा 452 लघु सिंचाई योजनाओं का कार्य हो रहा है। आगामी वित्तीय वर्ष से प्रारंभ हो रही दसवीं पंचवर्षीय योजना में पाँच हजार 341 करोड़ रुपये के निवेश से 4 लाख 82 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता निर्मित की जायेगी। अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने के लिये विशेष प्रयास जारी हैं। आगामी वित्तीय वर्ष में जल संसाधन विभाग और नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा करीब 94 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मुहैया कराई जायेगी। वर्ष 2000 से किसानों की चुनी हुई समितियों को सिंचाई प्रणालियों के संचालन और देखरेख की जिम्मेदारी दी गई है। मुझे इस बात का संतोष है कि सहभागिता सिंचाई प्रबन्धन की इस पहल के अच्छे नतीजे मिल रहे हैं। सिंचाई क्षमता और उपयोग के अंतर को कम करने, किसानों को पानी के उपयोग के समान अवसर देने और नहरों के बेहतर रख-रखाव की दिशा में प्रगति हो रही है।

31. राज्य शासन ने नर्मदा घाटी की सभी वृहद सिंचाई और जल विद्युत परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने का फैसला लिया है। सिंचाई परियोजनाओं को वाह्य स्रोतों से वित्तीय संसाधन प्राप्त कर पूरा करने और विद्युत परियोजनाओं का वाणिज्यिक सिध्दांत के आधार पर निर्माण करने की नीति लागू की गई है। जापान बैंक ऑफ इन्टरनेशनल कोऑपरेशन ने ॠण देने पर विचार करने के लिए जो कार्यक्रम बनाया है उसमें बरगी व्यपवर्तन योजना को शामिल किया गया है। ग्यारह सौ करोड़ रुपये लागत की इस योजना के पूरा होने से दो लाख 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी।