| اردو خبریں | संस्कृत समाचारः मुख्य पृष्ठ | संपर्क करें | साईट मेप
You Tube
 
माननीय सदस्यगण,

ग्यारहवीं विधानसभा के इस अन्तिम बजट सत्र में आप सबका स्वागत है। सत्र के दौरान महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को आप सफलतापूर्वक पूरा करें, मेरी शुभकामनाएँ।

  1. तेजी से बदल रहे आर्थिक परिदृश्य के बावजूद हमारी अर्थव्यवस्था की बुनियाद आज भी कृषि और हमारे किसान हैं। किसानों को आधुनिक तकनीक और नए बाजार से जोड़ने के लिए मेरी सरकार निरन्तर काम कर रही है। उच्च स्तरीय गुणवत्ता के कृषि उत्पादों को नए बाजार देने के उद्देश्य से प्रदेश में कृषि निर्यात क्षेत्रों की स्थापना पर कार्य किया जा रहा है। धनिया और मैथी जैसी फसलों के लिए एक कृषि निर्यात क्षेत्र स्थापित हो रहा है, जिसका लाभ पाँच जिलों को मिलेगा। इसी प्रकार गेहूं के लिए एक अन्य कृषि निर्यात क्षेत्र स्वीकृत किया गया है, जिसका लाभ 16 जिलों के किसानों को मिलेगा। शीघ्र ही दाल, संतरे और सोयाबीन के लिए भी ऐसे ही निर्यात क्षेत्र स्थापित किये जायेंगे।

  2. रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर आधारित खेती की सीमाएं स्पष्ट नजर आने लगी हैं। दुनिया में अब खेती जैविक पध्दति की ओर लौट रही है। प्रदेश में हमारी पारम्परिक कृषि पध्दतियों को फिर से अपनाने की जो पहल शुरू हुई है उसके विस्तार के क्रम में 939 गांवों को ''जैविक ग्रामों'' में विकसित किया जा रहा है। इस योजना के उत्साहजनक परिणाम मिल रहे हैं। बीज उत्पादक सहकारी समितियों ने इस वर्ष 11 लाख 80 हजार क्विंटल सोयाबीन का प्रमाणित बीज उत्पादित किया है जो पिछले वर्ष से दो गुना है। आने वाले वर्षों में बीज उत्पादन के इस कार्यक्रम का और विस्तार किया जायेगा।

  3. किसानों को खेती, उद्यानिकी, पशुपालन और मुर्गीपालन की नई-नई जानकारी उपलब्ध कराने के लिये ''किसान बन्धु'' योजना शुरू की गई है। योजना के तहत् हर गांव के एक व्यक्ति को नई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाता है। अब तक 50 हजार किसान बंधु प्रशिक्षित होकर कृषि विस्तार कार्यक्रमों के वाहक बने हैं।

  4. हम संचार क्षेत्र की नवीनतम तकनीक से किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच सीधे संवाद के लिए सेटेलाइट प्रसारण का निरन्तर और प्रभावी उपयोग कर रहे हैं। प्रदेश के किसान सेटकाम प्रसारण के माध्यम से अपनी समस्याओं और खेती की नई तकनीकों के विषय में विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त करते हैं। यह नई तकनीक को सामान्य जन से जोड़ने की हमारी सोच का प्रतीक है।

  5. मेरी सरकार किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिये प्रयासरत है। पिछले वर्षों में हमने सिंचाई के जिस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम पर अमल प्रारंभ किया है उसके परिणामस्वरूप दसवीं पंचवर्षीय योजना में जल संसाधन विभाग और नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा चार लाख 82 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता निर्मित की जायेगी। यह नौवीं योजना से ढाई गुने से अधिक है। इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक प्रदेश में लगभग 68 हजार हेक्टेयर सिंचाई का क्षेत्र और बढ़ेगा।

  6. धनाभाव के कारण रुकी सिंचाई योजनाओं को पूरा करने का अभियान चार वर्ष पूर्व प्रारंभ किया गया था। ऐसी 352 अधूरी योजनाओं को
    पूरा कर 95 हजार 720 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

  7. निरन्तर चौथे वर्ष अल्पवर्षा के कारण प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ा है। मेरी सरकार इस कठिन और विषम स्थिति से निरन्तर जूझ रही है। परिस्थितियों का आकलन कर जुलाई-अगस्त से ही सूखे से निपटने की तैयारी शुरू कर दी गई थी। इस समय प्रदेश के 33 जिलों की 195 तहसीलें सूखाग्रस्त हैं। इससे खरीफ की फसलें तो प्रभावित हुई ही हैं, रबी फसलों की बोनी भी 71 प्रतिशत ही हो सकी है। सर्वाधिक प्रभावित गेहूँ की फसल है जो केवल 63 प्रतिशत क्षेत्र में ही बोई जा सकी है।

  8. इन कठिन स्थितियों से जूझ रहे किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले क्रियान्वित किए गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में सहकारी और वाणिज्यिक बैंकों के ॠणों की वसूली इस वर्ष स्थगित की गई है। कई क्षेत्रों में पाले की वजह से फसलों को नुकसान पहुंचा है। शीघ्र ही इसका आकलन कर समुचित राहत दी जायेगी। सूखे के कारण इन प्रभावित क्षेत्रों में खेती पर निर्भर आठ लाख 55 हजार से ज्यादा लोगों को प्रतिदिन रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। चारे के प्रदेश से बाहर जाने पर रोक लगाई गई है और पशुओं को चारे की व्यवस्था की गई है। सूखे से जूझ रहे किसानों की सहायता करना सरकार की प्राथमिकताओं
    में है।

  9. किसानों को सिंचाई के लिए प्रतिदिन तीन फेज पर औसतन छ: घंटे बिजली दी जा रही है। किसानों को लगातार बिजली मिलती रहे इस उद्देश्य से बाहरी स्रोतों से पाँच सौ मेगावाट बिजली खरीदी जा रही है। पिछले वर्षों में जिन किसानों के सिंचाई पम्पों की बिजली किन्हीं कारणों से कट गई थी, उन्हें फिर से शुरू करने के लिए राज्य शासन ने समाधान योजना लागू की है, जिसके तहत शासन योजना में शामिल किसानों की ओर से उन पर लम्बित अधिभार का भुगतान विद्युत मंडल को करेगा। बकाया राशि किस्तों में चुकाने की सुविधा भी दी गई है। कृषि उपभोक्ताओं के मीटरयुक्त कनेक्शन पर न्यूनतम प्रभार समाप्त कर दिया गया है। अब किसान जितनी बिजली उपयोग करेंगे, उतने का ही भुगतान उन्हें करना होगा। तीन माह से अधिक समय तक बिजली का प्रदाय न करने की स्थिति में किसानों के बिजली बिल जारी नहीं किये जायेंगे। इस योजना का लाभ एक लाख से ज्यादा किसानों ने उठाया है।

  10. मध्यप्रदेश की एक तिहाई से ज्यादा आबादी अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की है। मेरी सरकार ने हमेशा उन्हें अपनी नीतियों के केन्द्र में रखा है। प्रदेश में ऐसी पहल हुई है कि जिससे इन वर्गों के लिए बनाई जाने वाली नीतियों में प्रतिमान परिवर्तित हों। इस प्रतिमान परिवर्तन से इन वर्गों के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में सार्थक बदलाव आ रहे हैं।

  11. इन वर्गों की सामाजिक-आर्थिक उन्नति के लिये जरूरी है कि इनके पास खेती करने के लिये जमीन हो। इस बात को ध्यान में रखते हुए अब तक तीन लाख 34 हजार भूमिहीन परिवारों को दो लाख 75 हजार हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि उपलब्ध कराई गई है। ऐसे भूमिहीनों को जिन्हें शासकीय भूमि नहीं दी जा सकी है, एक हेक्टेयर तक भूमि खरीदने के लिये 75 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान दिया जायेगा। भूमिहीनों को मिली भूमि के सुधार और सिंचाई क्षमता विकसित करने का कार्यक्रम हाथ में लिया गया है।

  12. सामाजिक बहुलता के सिध्दान्त के अनुसार यह माना गया है कि समाज के हर क्षेत्र में यह बहुलता दिखनी चाहिए। इसी पृष्ठभूमि में देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि उद्यमियों के नए समूह राज्य सरकार की कोशिशों से बन रहे हैं। यह समूह उन वंचितों के हैं जिनकी इस क्षेत्र में उपस्थिति थी ही नहीं। अब शासकीय खरीद में इन वर्गों के उद्यमियों से 30 प्रतिशत की खरीद सुनिश्चित हुई है। अनुसूचित जनजाति विभाग ने आठ करोड़ 20 लाख रुपये की खरीद से इसकी शुरूआत भी कर दी है। इस वित्तीय वर्ष से 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की खरीद इस वर्ग के उद्यमियों से की जायेगी। यह फैसला भी किया गया है कि व्यापार और उद्यमिता की गतिविधियों को और विस्तार देने के लिये इन वर्गों के 25 हजार बेरोजगारों को अगले पांच सालों में उद्योग और व्यवसाय से जोड़ा जायेगा। आने वाले पांच वर्षों में इन उद्यमियों के लिये शहरी क्षेत्रों में व्यावसायिक स्थानों पर 18 हजार दुकानें निर्मित की जायेंगी।

  13. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति बाहुल्य प्रत्येक मजरे टोले में अप्रैल 2004 तक पेयजल की व्यवस्था की जायेगी। नगरीय क्षेत्रों में सभी शुष्क शौचालयों को जलवाहक शौचालयों में परिवर्तित कर दिया जाएगा। यह कदम उठाकर हम सामाजिक न्याय और समता के संवैधानिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबध्दता दोहरा रहे हैं।

  14. पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति अब तक उन विद्यार्थियों को मिलती थी जिनके परिवार की सालाना आमदनी 65 हजार 290 रुपये से कम थी। आय की सीमा बढ़ाकर अब एक लाख 80 हजार रुपये सालाना कर दी गई है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बच्चों की पढ़ाई पर होने वाला यह व्यय राज्य के संसाधनों से पूरा किया जायेगा। इन वर्गों की उन छात्राओं को जो कक्षा 9 में प्रवेश लेंगी एक हजार रुपये और जो कक्षा 11 में प्रवेश लेंगी उन्हें दो हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। इस वर्ग के विद्यार्थियों को विदेशों में उच्च शिक्षा के लिये दस छात्रवृत्तियां और 100 विद्यार्थियों को पी-एच.डी. करने के लिये शोधवृत्तियां भी दी जायेंगी।

  15. अन्य पिछड़े वर्गों के लगभग 15 लाख विद्यार्थियों को प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्तियां मिल रही हैं। प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालयों पर छात्रावास और 90 स्थानों पर छात्रगृह खोलने की योजना पर काम चल रहा है।

  16. ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करके ही गरीबी उन्मूलन में सफलता पाई जा सकती है। प्रदेश में स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के तहत गरीब परिवारों के स्वसहायता समूहों को संस्थागत ॠण उपलब्ध कराकर, उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने का एक ठोस कार्यक्रम चलाया जा रहा है। नवीन स्वसहायता समूहों के गठन में मध्यप्रदेश पूरे देश में सबसे आगे है। लगभग ढाई लाख समूहों से जुड़े कोई 25 लाख परिवार अपनी ताकत के बल पर एक सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।

  17. सम्पूर्ण रोजगार योजना के तहत प्रदेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के एक लाख तीन हजार से ज्यादा परिवारों को ग्रीन कार्ड दिये जा चुके हैं, साथ ही भूमि सुधार के लिये 84 लाख 61 हजार रुपये और लगभग दो लाख क्विंटल खाद्यान्न भी उपलब्ध कराया गया है।

  18. वन और वनोपजों पर आदिवासियों के सदियों पुराने अधिकार उन्हें देने के लिये मेरी सरकार ने ऐतिहासिक व्यवस्था की। लघु वनोपजों का मालिकाना हक उन्हें सौंपा जा चुका है। तेन्दूपत्ता और अन्य लघु वनोपजों के व्यवसाय का पूरा लाभ संग्राहकों को दिया जा रहा है। लघु वनोपजों के लाभ का एक भी रुपया सरकारी खजाने में नहीं जाता। मध्यप्रदेश में संयुक्त वन प्रबंधन की रणनीति के तहत वनों के प्रबन्धन से स्थानीय लोगों को जोड़ने के अच्छे नतीजे मिले हैं। प्रमुख इमारती लकड़ी के व्यवसाय में भी ऐसी ही व्यवस्था हम शीघ्र लागू करने जा रहे हैं।

  19. निजी क्षेत्र में वानिकी विकास के लिए लोक वानिकी की योजना शुरू की गई है। अब किसान निजी स्वामित्व की भूमि पर खड़े पेड़ों की कटाई अनुमोदित कार्य योजना के अनुसार सरलता से कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। कार्य योजना बनाने में किसानों की मदद के लिए चार्टर्ड फारेस्टर बनाये गये हैं।

  20. प्रदेश में औषधीय पौधों की भरपूर सम्पदा है। इन पौधों की खेती को लाभप्रद बनाने के लिये एक व्यावसायिक योजना पर अमल किया जा रहा है। जिला स्तर पर प्राथमिक प्रसंस्करण के कदम उठाए जा रहे हैं।

  21. प्रदेश के अल्पसंख्यकों को आर्थिक समर्थन देने के लिए अब तक छ: करोड़ 76 लाख रुपये के ॠण उपलब्ध कराये गये हैं। इसका लाभ दो हजार 385 परिवारों को मिल रहा है।

  22. प्रदेश में मदरसा शिक्षा के आधुनिकीकरण के लिये दो हजार 200 मदरसा शिक्षकों को आधुनिक विषय पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया गया है। मौलवियों, आलिमों के लिये यूनानी मेडिसिन का एक ढाई वर्षीय डिप्लोमा पाठयक्रम शुरू किया जा रहा है। मुस्लिम समुदाय के प्रतिभावान विद्यार्थियों के लिये, भोपाल में एक उत्कृष्टता संस्थान की स्थापना के लिए गरीब नवाज़ फाउण्डेशन को एक करोड़ रुपये अनुदान देने का निर्णय लिया गया है।

  23. मेरी सरकार की जो योजनाएं, कार्यक्रम और नीतियां हैं उनमें महिलाओं और बच्चों का महत्वपूर्ण स्थान है। जब तक इनकी स्थिति समाज में बेहतर नहीं होगी तब तक हम उन्नत समाज की कल्पना भी नहीं कर सकते।

  24. प्रदेश में स्व-सहायता समूह एक आंदोलन बन चुका है। दस लाख से ज्यादा महिलाएं अपने परिवारों को बेहतर जीवन स्तर देने के लिए रोज़गार के क्षेत्रों से इन समूहों के माध्यम से जुड़ी हैं। यह इसलिए संभव हुआ है कि मध्यप्रदेश में महिलाओं को आगे आने के मौके मिले हैं।

  25. महिलाओं के हित में सामाजिक सुरक्षा पेंशन का दायरा बढ़ाया गया है। अब 18 वर्ष से अधिक आयु की विधवाओं और परित्यक्ताओं को सामाजिक सुरक्षा पेंशन की पात्रता हो गई है। पहले 50 वर्ष की आयु सीमा का जो बंधन था, वह समाप्त कर दिया गया है।

  26. प्रदेश के सात संभागीय मुख्यालयों जबलपुर, इन्दौर, उज्जैन, ग्वालियर, भोपाल, रीवा और सागर में पारिवारिक विवादों के शीघ्र निराकरण के लिए कुटुम्ब न्यायालयों की स्थापना की गई है।

  27. महिला साक्षरता के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने देश भर में सबसे ज्यादा वृध्दि हासिल की है, इसके बावजूद 50 प्रतिशत महिलाओं को साक्षर बनाने की चुनौती अभी भी हमारे सामने है। महिला पढ़ना-बढ़ना आंदोलन के द्वारा महिला साक्षरता का लक्ष्य प्राप्त करने की कोशिशें जारी हैं। एक लाख 82 हजार महिला पढ़ना-बढ़ना समितियों के माध्यम से लाखों महिलायें साक्षरता आंदोलन से जुड़ी हैं। साक्षर हुई महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से उनकी पढ़ना-बढ़ना समितियों को स्व-सहायता समूहों मेें परिवर्तित किया जा रहा है।

  28. महिलाओं और बच्चों के समग्र स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में समेकित बाल विकास योजना का इस वर्ष विस्तार कर दो हजार 351 नई आंगनबाड़ियाँ प्रारम्भ की गई हैं। इनमें से एक हजार 707 ग्रामीण क्षेत्रों में, 328 शहरी क्षेत्रों और 316 अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में हैं। अब समेकित बाल विकास परियोजना का यह कार्यक्रम पूरे प्रदेश में लागू है और इसके अंतर्गत कुल 49 हजार 784 आंगनबाड़ियाँ संचालित की जा रही हैं। प्रदेश में लगभग एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में वृध्दि की गई है। वर्ष 1993 में प्रदेश के बच्चों में गंभीर कुपोषण का स्तर आठ प्रतिशत था जो हमारे निरन्तर प्रयासों से घटकर अब 2.92 प्रतिशत रह गया है।

  29. प्रदेश में सामुदायिक स्वास्थ्य की स्थिति को और बेहतर बनाने के लिये, राजीव गाँधी सामुदायिक स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत स्वस्थ जीवन सेवा गारन्टी योजना क्रियान्वित की जा रही है। इस योजना में समयबध्द तरीके से गाँवों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं को उपलब्ध कराया जा रहा है। बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए अब प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 46 हजार से ज्यादा प्रशिक्षित दाईयाँ और 32 हजार से ज्यादा जनस्वास्थ्य रक्षक सक्रिय हैं।

  30. बच्चों को बीमारियों से बचाने के उद्देश्य से टीकाकरण कार्यक्रम सघनता से चलाया जा रहा है। एक वर्ष तक के बच्चों के टीकाकरण की दर जो वर्ष 1998 में तीस प्रतिशत थी, वह वर्ष 2001 में बढ़कर 66.7 प्रतिशत हो गई है। हमारे ऐसे ही प्रयासों से स्वास्थ्य को लेकर पूरे प्रदेश में सजगता का एक माहौल बन रहा है। इसका सीधा प्रभाव मृत्यु दर, सकल प्रजनन दर और शिशु मृत्यु दर में आयी कमी में देखा जा सकता है। हर बसाहट में स्वच्छ पेयजल, गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व देखभाल, पूरक पोषण आहार, बच्चों का टीकाकरण, गंदे पानी की निकासी, कचरे का निपटान, स्वास्थ्य शिक्षा और व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण का कार्य किया जा रहा है।

  31. इस वर्ष स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाने के लिये 175 नये उप स्वास्थ्य केन्द्र शुरू किये जायेंगे। बीस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में और श्योपुर, नीमच व डिण्डौरी के अस्पतालों का उन्नयन जिला अस्पतालों के रूप में होगा। नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से संवेदनशील धार, मण्डला और शिवपुरी जिलों में नियोनेटोलाजी इकाइयाँ स्थापित कर वहां उपकरण और दवाएँ उपलब्ध कराई गई हैं।

  32. मरीजों को जीवनरक्षक दवायें अस्पतालों में मिलने के उनके अधिकार को स्वीकार करते हुये मेरी सरकार ने नई औषधि नीति लागू की है। इस नई नीति में दवाओं के उपार्जन, भण्डारण और वितरण की व्यवस्था में सुधार किया गया है। सभी प्रकार के अस्पतालों के लिये दवायें और अन्य चिकित्सा सामग्री खरीदने के लिये राज्य औषधि निगम गठित किया जा रहा है।

  33. हमारा मानना है कि एक शिक्षित समाज ही जागरूक समाज होता है। इस दिशा में प्रदेश में व्यापक प्रयास हुये हैं जिनके नतीजे स्पष्ट दिख रहे हैं। साक्षरता बढ़ाने के क्षेत्र में हमारी विशिष्ट उपलब्धियाँ रही हैं। एक सजग समाज बनाने के लिये शिक्षा के क्षेत्र में हमारे काम निरन्तर चल रहे हैं।

  34. मध्यप्रदेश में वर्ष 1994 में राजीव गाँधी शिक्षा मिशन की स्थापना की गई थी। मिशन द्वारा अनेक नवाचारी कार्यक्रम जैसे शिक्षा गारन्टी योजना और साक्षरता के लिये पढ़ना-बढ़ना आंदोलन चलाये गये।
    इसी श्रृंखला की अगली कड़ी 'जन शिक्षा अधिनियम' है। शिक्षा के
    क्षेत्र में जनभागीदारी की संरचनाओं को मजबूत करने और गुणवत्ता के लिये अधिकार दिलाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कानून के द्वारा जहाँ एक ओर अच्छी शिक्षा के लिये समुदाय को जवाबदेह बनाया गया है वहीं शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षता सुधारने के प्रावधान भी हैं।

  35. जन शिक्षा अधिनियम में प्रारंभिक शिक्षा की जिम्मेदारी संयुक्त रूप से राज्य सरकार, स्थानीय संस्थाओं, पालकों, शिक्षकों और समाज को दी गई है। इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि हर बच्चा स्कूल जाये और अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार उसे मिले। अधिनियम के अंतर्गत शाला शिक्षा कोष, जिला शिक्षा कोष और राज्य शिक्षा कोष के प्रावधान हैं। यह सभी कोष विभिन्न स्तरों पर स्कूलों के लिये अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था करेंगे। पूरे देश में अपने तरह का यह एकमात्र कानून है जिसके माध्यम से पालक शिक्षक संघ को स्कूल स्तर पर, जिला योजना समिति को जिला स्तर पर और विधानसभा को राज्य स्तर पर बच्चों की अकादमिक उपलब्धियों के विषय में समय-समय पर जानकारी दी जायेगी। विधानसभा क्षेत्रवार तैयार की गई जन शिक्षा रिपोर्ट प्रतिवर्ष विधानसभा में प्रस्तुत की जायेगी।

  36. मेरी सरकार यह जानती है कि हमारा भविष्य प्रदेश के स्कूलों में ही आकार लेता है। प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य के लिये हमारी प्रतिबध्दता सर्वविदित है। राजीव गांधी शिक्षा मिशन द्वारा वर्ष 1998 में हर बसाहट से एक किलोमीटर के दायरे में स्कूल की सुविधा उपलब्ध कराकर प्राथमिक शिक्षा का लोकव्यापीकरण किया गया। अब मिडिल स्कूल तक की शिक्षा के लोकव्यापीकरण के लिये समयबध्द प्रयास किये जा रहे हैं। प्रत्येक बसाहट से तीन किलोमीटर के दायरे में मिडिल स्कूल उपलब्ध हो सकें, इस उद्देश्य से नये स्कूल खोले जा रहे हैं। गत वर्ष सात हजार 575 मिडिल स्कूल खोले गये तथा इस वर्ष तीन हजार 700 और मिडिल स्कूल शुरू कर प्रारंभिक शिक्षा की उपलब्धता का लोकव्यापीकरण किया जायेगा। गत वर्ष पाँच किलोमीटर के दायरे में चार सौ हाईस्कूल और 70 हायर सेकेण्डरी स्कूल खोले गए हैं। यह कार्य योजना प्रदेश के हर बच्चे को हर स्तर की स्कूली शिक्षा देने के लक्ष्य को लेकर चल रही है।

  37. अगले शिक्षा सत्र से प्रदेश में कक्षा एक से पांच तक पढ़ रहे सभी शासकीय और शिक्षा गारन्टी योजना के स्कूली विद्यार्थियों को नि:शुल्क पाठयपुस्तकें उपलब्ध कराई जायेंगी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और सभी वर्गों की बालिकाओं को कक्षा आठ तक नि:शुल्क पाठयपुस्तकों की यह सुविधा मिलेगी।

  38. गाँव के बच्चों को कम्प्यूटर संचालन का ज्ञान कराने और कम्प्यूटर समर्थित शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश के स्कूलों में हेडस्टार्ट योजना लागू की गई है। इस वर्ष नये शिक्षण सत्र से हेडस्टार्ट योजना का विस्तार दो हजार 70 स्कूलों में कर दिया जायेगा।

  39. गणतंत्र दिवस से प्रदेश के हर गांव में पुस्तकालयों की स्थापना का एक बड़ा कार्यक्रम शुरू हुआ है। इन ग्रामीण पुस्तकालयों के संचालन की जवाबदारी पढ़ना-बढ़ना संघ के माध्यम से समुदाय को सौंपी गई है। ये पुस्तकालय शाला भवन अथवा समुदाय द्वारा दिये गए भवन में स्थापित किए गए हैं। ग्रामीण पुस्तकालयों के माध्यम से जहाँ नवसाक्षरों को ज्ञान के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे वहीं ये पुस्तकालय अन्य लोगों को साक्षरता आन्दोलन से जोड़ेंगे।

  40. राजीव गांधी शिक्षा मिशन ने प्रदेश में पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण की एक योजना 'ज्ञान' प्रारम्भ की है। इस योजना के माध्यम से सभी जिला और राज्य पुस्तकालयों में इलेक्ट्रानिक विषयवस्तु और इन्टरनेट सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। अब तक 31 जिलों में यह योजना लागू हो चुकी है। सार्वजनिक पुस्तकालयों की व्यवस्था निरंतर खराब हो रही थी, ज्ञान योजना के लागू होने से इन्हें 21वीं सदी की जरूरतों के अनुकूल बनाया जा सकेगा। नए समय में ज्ञान केन्द्रित समाज की जरूरतों के अनुरूप यह पहल उल्लेखनीय है।

  41. प्रदेश के सभी महाविद्यालयों में गठित जनभागीदारी समितियों के माध्यम से समुदाय को उच्च शिक्षा की जरूरतों से जोड़ा गया है। इन समितियों ने लगभग सात करोड़ रुपये जुटाकर महाविद्यालयों की अधोसंरचना को मजबूत किया है।

  42. तकनीकी शिक्षा में उत्कृष्टता पाने के लिए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वाविद्यालय में सूचना एवं प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केन्द्र की स्थापना की गई है। उच्च शिक्षा के नए विषय बायो टेक्नोलॉजी और बायो मेडिकल इंजीनियरिंग के नए डिग्री कोर्स शुरू किए जा रहे हैं।

  43. प्रत्येक जिले में एक उत्कृष्टता विद्यालय और प्रत्येक संभाग में एक महाविद्यालय उत्कृष्टता संस्थान के रूप में विकसित किया गया है।

  44. प्रदेश में सरकार और निजी क्षेत्र के बीच में सहयोग का जो सिलसिला शुरू हुआ है, उसका विस्तार शिक्षा के क्षेत्र में भी हुआ है। एक सौ 34 महाविद्यालयों में निजी क्षेत्र के सहयोग से कम्प्यूटर शिक्षा दी जा रही है। इंदौर में दो और भोपाल में एक डेन्टल कालेज और उज्जैन में एक मेडिकल कालेज निजी क्षेत्र में शुरू हुए हैं। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शीघ्र ही अशासकीय विश्वाविद्यालय विधेयक सदन के समक्ष प्रस्तुत होगा। इस पहल से उच्च शिक्षा में शिक्षण स्तर और शोध कार्य को नये आयाम मिलेंगे।

  45. चिकित्सा क्षेत्र की अनुषांगिक सेवाओं की पूर्ति के लिए पेरा मेडिकल काउन्सिल का गठन किया गया है, जो प्रदेश में पेरा मेडिकल क्षेत्र की शिक्षा का नियंत्रण करेगी।

  46. प्रदेश के सभी पांच शासकीय मेडिकल कालेज और उनसे संबध्द अस्पतालों को जो स्वायत्तता दी गई है उसके परिणामस्वरूप इन संस्थाओं की अधोसंरचना में उल्लेखनीय सुधार आया है और छात्रों को अच्छी अध्ययन सुविधायें मिल रही हैं।

  47. प्रदेश में उद्यानिकी के बढ़ते महत्व को देखते हुये मंदसौर में उद्यानिकी महाविद्यालय की स्थापना की गई है।

  48. प्रदेश में सड़कों के निर्माण और सुधार की तीन हजार करोड़ रुपये की कार्य योजना पर तेजी से अमल चल रहा है। लोक निर्माण विभाग इस वित्तीय वर्ष के अन्त तक पाँच हजार 280 किलोमीटर सड़कों का निर्माण व सुधार कार्य पूरा करेगा। प्रधानमंत्री सड़क योजना में सात सौ किलोमीटर लम्बी 163 सड़कें बन चुकी हैं। लगभग दो हजार किलोमीटर लम्बे उच्च घनत्व वाले 14 राज्य राज मार्गों का बाण्ड कम बी.ओ.टी. योजना के अंतर्गत पुनर्निर्माण किया जा रहा है। नौ मार्गों के कार्यादेश दिए जा चुके हैं। एशियन विकास बैंक से 900 करोड़ रुपये का ॠण 25 प्रमुख मार्गों के लिये स्वीकृत हुआ है।

  49. पूरे देश में बिजली की मांग और आपूर्ति में बढ़ते अंतर और राज्य विद्युत मंडलों की बिगड़ती वित्तीय स्थिति को देखते हुये, बिजली क्षेत्र में सुधार के कार्यक्रम अपरिहार्य हो गये हैं। मध्यप्रदेश में इसी परिप्रेक्ष्य में नीतिगत बदलाव किये गये हैं।

  50. केन्द्र सरकार से हुए करारनामे के अनुरूप मध्यप्रदेश में ऊर्जा सुधार कार्यक्रम लागू किया जा रहा है। सुधार कार्यक्रम में पारेषण और वितरण हानियों को कम करने, सभी विद्युत उपभोक्ताओं के यहाँ मीटर लगाने, एनर्जी ऑडिट करने और सभी उपभोक्ताओं के लिये विद्युत शुल्क, कम से कम लागत मूल्य पर लाने को शामिल किया गया है। एशियाई विकास बैंक से 960 करोड़ रुपये का ॠण विद्युत पारेषण और वितरण प्रणाली को सुधारने के लिये प्राप्त किया गया है।

  51. पुनर्गठित मध्यप्रदेश में मार्च 1994 से अब तक बिजली उत्पादन की क्षमता में 747 मेगावाट की वृध्दि हुई है। स वृध्दि में इस वर्ष स्थापित 50 मेगावाट क्षमता की बाण सागर परियोजना भी शामिल है। इस वर्ष सितम्बर से 250 मेगावाट बिजली इंदिरा सागर परियोजना से मिलना शुरू हो जायेगी। अगले वर्ष के अंत तक इंदिरा सागर परियोजना से एक हजार मेगावाट बिजली मिलने लगेगी। अगले वर्ष सरदार सरोवर परियोजना से भी मध्यप्रदेश को 150 मेगावाट बिजली मिलने लगेगी, जो दो वर्ष में बढ़कर 826 मेगावाट तक पहुंच जायेगी। राज्य सरकार ने बिरसिंहपुर में 500 मेगावाट और अमरकंटक में 210 मेगावाट के ताप विद्युत संयंत्र स्थापित करने का भी निर्णय लिया है। पाँच सौ 20 मेगावाट की ओंकारेश्वार परियोजना पर भी काम शुरू हो चुका है। प्रदेश में पारेषण और वितरण हानियां धीरे-धीरे कम हो रही हैं, वहीं बिजली उत्पादन के संयंत्रों की स्थापना पर तेजी से काम चल रहा है। इन उपायों से बिजली के संकट का दीर्घकालिक निदान संभव हो सकेगा।

  52. मध्यप्रदेश में उद्योगों की स्थापना के लिये बाधा रहित वातावरण निर्मित किया गया है। उद्योगों के लिये बेहतर अधोसंरचना सुविधाएँ उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्रशासनिक औपचारिकताओं को पूरा करने के लिये नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। प्रदेश के संसाधनों और क्षमताओं का सही उपयोग कर उद्योग और सेवा क्षेत्र में रोजगार के अवसर उत्पन्न करने के लिये नई आर्थिक विकास नीति को समयबध्द तरीके से लागू किया जा रहा है।

  53. राज्य सरकार द्वारा विशेष आर्थिक प्रक्षेत्र को विकसित करने के लिये नीति निर्धारित की गई है। इन्दौर में एक हजार 38 हेक्टेयर भूमि, विशेष आर्थिक प्रक्षेत्र के लिये चिह्नित की गई है। विशेष आर्थिक प्रक्षेत्र में स्थापित होने वाली इकाइयों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की अधोसंरचना सुविधायें दी जायेंगी। भारत सरकार द्वारा विशेष आर्थिक प्रक्षेत्रों को ''डीम्ड विदेशी क्षेत्र'' माना गया है। इस कारण इन प्रक्षेत्रों में स्थापित उद्योगों को वे सब लाभ भी मिलेंगे जो घरेलू क्षेत्र की इकाइयों को नहीं मिल पाते। प्रारंभिक चरण में इंदौर के निर्यात संवर्धन पार्क के 78 हेक्टेयर क्षेत्र को विशेष आर्थिक प्रक्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। यह विशेष प्रक्षेत्र, प्रदेश में आर्थिक विकास का केन्द्र बन सकेगा।

  54. मध्यप्रदेश की सूचना प्रौद्योगिकी नीति देश के अन्य राज्यों में अपनाई गई नीति से अलग हटकर है। मध्यप्रदेश में सूचना प्रौद्योगिकी नीति का लक्ष्य आम लोगों तक सूचना क्रान्ति के लाभों को पहुँचाना है। राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी से गांव में रहने वाले लोगों को अधिकार सम्पन्न बनाने के प्रयास किये गये हैं। नीति का दूसरा महत्वपूर्ण लक्ष्य शासन को पारदर्शी बनाना और लोगों की जानकारी प्राप्त करने की जरूरतों को पूरा करना है। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में रोज़गार के अवसरों से ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोग भी लाभान्वित हो सकें इस दिशा में भी प्रयास किये गये हैं।

  55. पारदर्शी, संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन देने के लिए प्रदेश में सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग प्रारम्भ किया गया है। ई-शासन को व्यवस्था देने में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शुमार किया जाता है। आम लोगों से सीधे सरोकार रखने वाले विभागों में ई-शासन प्रथम चरण में कायम किया गया है। जमीन से संबंधित दस्तावेजों का कम्प्यूटरीकरण पूरा किया जा चुका है। अब किसानों को खसरे की नकल कम्प्यूटर के मार्फत मिलने लगी है। पिछले वर्ष प्रारम्भ की गई ड्राइविंग लायसेंस और वाहनों के पंजीयन की कम्प्यूटर व्यवस्था सफलतापूर्वक चल रही है।

  56. वाणिज्यिक कर विभाग और कोषालयों को पूरी तरह से कम्प्यूटरीकृत करने की परियोजनाएं भी क्रियान्वयन के अंतिम चरण में है, ये शीघ्र ही काम करने लगेंगी। आम जन को जरूरी जानकारियां देने के लिए ज्ञानदूत परियोजना का पूरे प्रदेश में विस्तार का कार्यक्रम जारी है। अब तक 18 जिलों में ज्ञानदूत सूचनालय प्रारम्भ किये जा चुके हैं।

  57. ग्रामीण क्षेत्रों में जो बुनियादी सुविधायें उपलब्ध हैं उनकी सम्पूर्ण जानकारी भी कम्प्यूटरीकृत की गई है। यह जानकारी इन सुविधाओं के प्रबंधन और संचालन के लिए शीर्ष स्तर पर समीक्षा के काम आती है। अब जन सामान्य के लिए यह जानकारी ''ग्राम सम्पर्क'' नेटवर्क पर उपलब्ध है। अब नागरिक अपने गांव की शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी
    और अधोसंरचना के कार्यक्रमों से सीधे जुड़ गये हैं और इन कार्यक्रमों के संचालन के विषय में संबंधित अधिकारियों से सीधे सम्पर्क कर सकते हैं।

  58. चालू वित्तीय वर्ष दसवीं पंचवर्षीय योजना का पहला साल है। प्रदेश के लिये दसवीं पंचवर्षीय योजना का आकार कुल 25 हजार 737 करोड़ रुपये का तय किया गया है।

  59. दसवीं योजना के क्रियान्वयन के लिये योजना आयोग ने जो रणनीति बनाई है उसमें विकेन्द्रीकरण को प्रमुख भूमिका दी गई है। योजना की क्रियान्वयन रणनीति में लोगों को शक्ति सम्पन्न बनाने, विकास कार्यों में उनकी भागीदारी बढ़ाकर कार्यक्षमता को सुधारने के मार्गदर्शी सिध्दांत तय किये गये हैं। शासन प्रणाली में खुलापन का मुद्दा भी योजना की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मध्यप्रदेश में पंचायत राज, नगरपालिक राज और ग्राम स्वराज के माध्यम से सुदृढ़ विकेन्द्रीकृत व्यवस्था पहले से ही कायम है। प्रदेश में जनभागीदारी आधारित विकास का मॉडल पहले से ही अपनाया जा रहा है।

  60. राज्य में विकास और समाज के सरोकारों से जुड़ी सभी संस्थाओं को मेरी सरकार ने उनका वास्तविक प्रतिनिधि स्वरूप दिया है। पंचायतों, नगरपालिकाओं, सहकारी संस्थाओं, मण्डी समितियों और सिंचाई संथाओं के चुनाव निर्धारित समय पर हुए हैं। प्राकृतिक संसाधनों जैसे जंगल, मिट्टी और पानी के प्रबन्धन और संवर्धन का काम स्थानीय लोगों की समितियां कर रही हैं।

  61. हम चाहते हैं कि आगामी पंचायत चुनावों में प्रदेश के हर गांव में पंचायत हो। ऐसा होने से हमारा प्रजातंत्र और अधिक सहभागी रूप लेगा और गांव का हर नागरिक प्रजातांत्रिक व्यवस्था से सीधे जुड़ सकेगा।

  62. प्रदेश में ग्राम स्वराज के माध्यम से गांव के 40 लाख लोगों की निर्णय लेने और विकास की प्रक्रिया में सीधी भागीदारी संभव हुई है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय, कृषि और ग्रामीण विकास जैसे अहम मुद्दों पर अब गांव के लोग खुद फैसले करते हैं।

  63. 15 लाख हेक्टेयर कमाण्ड क्षेत्र की नहरों के रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी किसानों की संथाएं सफलतापूर्वक कर रही हैं। लोगों की भागीदारी से 35 लाख हेक्टेयर में संचालित जलग्रहण क्षेत्र विकास का यह देश में सबसे बड़ा कार्यक्रम है। राजीव गांधी जलग्रहण प्रबंधन मिशन के तहत सात हजार 978 गांवों में 17 लाख हेक्टेयर भूमि में जलग्रहण क्षेत्र उपचार का काम पूरा किया जा चुका है।

  64. दो वर्ष पूर्व प्रारंभ हुए पानी रोको अभियान को जो अभूतपूर्व सफलता मिली थी उसे अब संस्थागत रूप दे दिया गया है। हर गांव में पानी रोको समितियों का गठन किया गया है। इन दो वर्षों में 15 लाख से अधिक जल संग्रहण संरचनाएं जनभागीदारी से निर्मित हुई हैं।

  65. वनों में रहने वाले लोग अब वनों की सुरक्षा और विकास का काम कर रहे हैं। संयुक्त वन प्रबंधन की अवधारणा के तहत प्रदेश में 13 हजार से ज्यादा वन समितियां, 52 लाख हैक्टेयर वन क्षेत्र की देखरेख कर रही हैं।

  66. ग्रामीण समाज को सस्ता, सुलभ और शीघ्र न्याय दिलाने के लिये प्रदेश के 41 जिलों में एक हजार 530 ग्राम न्यायालयों की स्थापना हो चुकी है। ग्राम सुरक्षा समितियों और नगर सुरक्षा समितियों के माध्यम से आम लोगों को स्थानीय कानून और व्यवस्था नियंत्रण से जोड़ा गया है। साम्प्रदायिक सौहार्द्र कायम रखने में इन समितियों ने अपनी भूमिका निभाई है।

  67. मध्यप्रदेश ने यह साबित किया है कि लोगों को अगर विकास से जुड़े फैसले और कार्यक्रम लागू करने के मौके मिलें तो वे शासकीय तंत्र से बेहतर काम कर सकने में समर्थ हैं। मध्यप्रदेश के लोगों की यह सफलता एक उभरते आत्मनिर्भर समाज की ओर संकेत है।

  68. मध्यप्रदेश में हुये विकास कार्यक्रमों के सफलतम उदाहरणों के पीछे यहाँ के लोगों की रचनात्मक शक्ति ही है। शिक्षा के क्षेत्र में कामनवेल्थ का पुरस्कार, समुदाय के सहयोग से संचालित शिक्षा गारन्टी योजना को मिला है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में जनभागीदारी से संचालित रोगी कल्याण समिति कार्यक्रम को ग्लोबल डेवलपमेंट नेटवर्क अवार्ड मिला है। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में स्टाकहोम चेलेन्ज अवार्ड ज्ञानदूत परियोजना को मिला है और पिछले दशक में महिला साक्षरता के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि के लिये भारत सरकार का ''दशकीय महिला साक्षरता पुरस्कार'' भी प्रदेश को दिया गया है।

  69. शिक्षा गारन्टी योजना राष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा चुकी है। जलग्रहण विकास की मिशन पध्दति को अन्य प्रदेशों ने अपनाया है। मध्यप्रदेश की चार योजनाओं शिक्षा गारंटी योजना, राजीव गांधी जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन, सामुदायिक सहभागिता से अस्पताल प्रबंधन सुधारने की रोगी कल्याण योजना और सूचना प्रौद्योगिकी का नागरिक सेवाओं के लिये उपयोग की ज्ञानदूत योजना को, योजना आयोग और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने अपने आकलन में देश के बीस सर्वाधिक उत्कृष्ट प्रयोगों में गिना है।

  70. प्रभावी रूप से स्वशासन के लिये किये गये नये प्रयोगों को क्रियान्वित करने में मध्यप्रदेश सभी राज्यों में आगे रहा है। योजना आयोग ने इन प्रयोगों का आकलन गरीबी उन्मूलन में प्रासंगिकता, अधिकतम लोगों को लाभ, धनराशि के उपयोग, उत्पादकता बढ़ने की संभावना, सामुदायिक भागीदारी के स्तर पर हस्तक्षेप की निरंतरता और विभिन्न परिस्थितियों में अन्यत्र लागू किये जाने की संभावना के आधार पर किया है।

  71. प्रदेश में लोगों को जो ताकत मिली है, उसके कारण गाँव-गाँव में सामाजिक-आर्थिक बदलाव की खामोश क्रांति की लहर चल रही है। मेरी सरकार इसी प्रक्रिया का प्रतिनिधित्व करती है।

  72. मेरी सरकार प्रदेश में साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाले लोगों से सदैव सख्ती से निपटती रही है। प्रशासन तंत्र को यह स्पष्ट निर्देश दिये गये हैं कि साम्प्रदायिक वैमनस्य से निपटना हमारी पहली प्राथमिकता है। प्रदेश में सद्भाव की जो लम्बी परम्परा है, हम उसकी हर हाल में हिफाजत करेंगे।

  73. हमने पिछले दिनों प्रदेश में ''झंडा ऊँचा रहे हमारा'' अभियान के माध्यम से अपने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, अपने राष्ट्रीय प्रतीकों और अपनी विरासत को याद किया। हमारा यह कार्यक्रम एक कर्मकांड नहीं है बल्कि इसके माध्यम से हम अपने उन मूल्यों के प्रति आस्था दुहराना चाहते हैं जिनके आधार पर हमने आजादी की लड़ाई लड़ी थी। यह लड़ाई महज एक विदेशी सत्ता को उखाड़ फेंकने की नहीं थी बल्कि उन मूल्यों के लिये भी थी, जिनके आधार पर हम आज़ाद भारत बनाना चाहते थे। ये लड़ाई उस प्रतिगामी सोच के विरुध्द भी थी जो भारत को पिछली सदियों में ले जा रहा था।

  74. हमें लगता है कि उस प्रतिगामी विचार ने फिर सिर उठाना शुरू किया है। संविधान के सर्वमान्य मूल्यों जैसे पंथनिरपेक्षता, उसमें निहित भारतीयता और राष्ट्रीयता की परिभाषाओं पर भ्रम पैदा किया जा रहा है।

  75. यह दौर हमें अपनी आज़ादी की लड़ाई की विरासत से फिर से जुड़ने को प्रेरित करता है। हमें, सबको समेटने वाली सदियों पुरानी भारतीय संस्कृति में अपनी पहचान पाने को प्रेरित करता है, अनेकता में एकता की जीवन पध्दति पर विश्वाास व्यक्त करने को कहता है। हमें, अपनी पहचान की विविध वर्णी सच्चाई में आस्था व्यक्त करने की ओर ले जाता है।

  76. हम अपने तमाम फर्कों के बावजूद भारतीय इसलिये हैं कि हमने अपने संविधान में विविधता का सम्मान किया है। हम भारतीय इसलिये हैं कि हमारे हक समान हैं। मेरी सरकार इस बहुलतावादी, बहुस्तरीय, बहुवर्णी पहचान को ही भारतीयता की पहचान मानती है। हम नफ़रतों के खिलाफ प्रदेश में एक साथ खड़े हैं। सद्भाव और सहिष्णुता की परम्परा, हमारी पहचान है और हम इसे हर कीमत पर बचायेंगे।

  77. मेरी सरकार के सामने मध्यप्रदेश के भविष्य की जो परिकल्पना रही है, वह एक स्वस्थ, साक्षर और सम्पन्न समाज की है। हम एक ऐसा समाज बनाने की प्रक्रिया में हैं जहाँ लोग अपने अधिकार मजबूती से मांगें और जिम्मेदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करें।

  78. आप जनहित में अपने विधायी उत्तरदायित्वों को पूरा करें, मेरी शुभकामनाएँ।

जय हिन्द!