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नमामि देवि नर्मदे-नर्मदा सेवा यात्रा
मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी को मिलेगा जीवित इकाई का दर्जा
बीस हजार करोड़ रुपये से होगा देश भर की नदियों का कायाकल्प

मंडला, नर्मदा नदी मध्यप्रदेश की जीवन रेखा है। प्रदेश में अब नर्मदा नदी को जीवित इकाई मानते हुए इसको नुकसान पहुंचाने वाले को जीवित इकाई के अनुरूप ही दंडित किया जायेगा। इस संबंध में विधान सभा में विधेयक पारित किया जायेगा। यह बात मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मंडला जिले में ‘नमामि देवि नर्मदे- नर्मदा सेवा यात्रा’ के दौरान जनसंवाद में कही। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश की नदियों को वर्ष 2019-20 तक स्वच्छ बनाने के लिये केंद्र सरकार ने बजट में 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो जरूरत पड़ने पर एक लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाये जा सकते हैं।

गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नर्मदा सेवा यात्रा के लिए मुख्यमंत्री की जितनी भी प्रशंसा की जाए, कम है। उन्होंने कहा भारत-विश्व में चले अभियानों में यह मील का पत्थर साबित होगी। ऐसा जन-अभियान भारत में पहले कभी नहीं चला। इसमें नर्मदा संरक्षण-संवर्धन के साथ सामाजिक सरोकारों को भी साथ लिया है। संविधान निर्माताओं ने भी पर्यावरण संरक्षण हर व्यक्ति के लिए आवश्यक बताया है। देश-दुनिया की नजरें नर्मदा यात्रा पर है, इससे सकारात्मक संदेश जाएगा।
नर्मदा सूखी तो सूख जाएगीमध्यप्रदेश की जिंदगी

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने चेताया कि यदि नर्मदा की धारा सूखी तो मध्यप्रदेश में जीवन अवरुद्ध हो जाएगा। श्री सिंह ने कहा कि नर्मदा यात्रा की शुरुआत घटती जलधारा को प्राचीन वैभव लौटाने के लिए की गई है। उन्होंने कहा कि नर्मदा सतपुड़ा-विंध्याचल के जंगलों के मानसूनों में अवशोषित जल से प्रवाहमान है। इसकी धारा को अविरल बनाये रखने के लिए आगामी 2 जुलाई को नर्मदा के दोनों तटों पर 11-11 सौ किलोमीटर लंबाई में और चौड़ाई में एक किलोमीटर तक सघन वनों के लिए पौध-रोपण होगा। सीवेज का पानी नर्मदा में ना मिले, इसके लिए 18 शहरों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाये जायेंगे, जिनका पानी सिंचाई के काम आएगा। तटीय स्वच्छता के लिए हर घर में शौचालय बनेगा। तटों पर विसर्जन कुण्ड, मुक्तिधाम और चेंजिंग रूप बनेंगे। अब कोई शव नर्मदा में नहीं प्रवाहित होगा। नशामुक्ति अभियान में एक अप्रैल से नर्मदा से पाँच किलोमीटर तक शराब की दुकानें प्रतिबंधित कर दी गई हैं।
अचार-गुठली संग्रहण दरसौ रुपये प्रति किलो

श्री चौहान ने कहा कि संग्राहकों से अब महुआ फूल, गुल्ली 30 रुपये और अचार गुठली 100 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से शासन खरीदेगा। श्री सिंह ने कहा कि प्रदेश के बड़े शहरों में पेयजल आपूर्ति और 30 प्रतिशत सिंचाई नर्मदा जल से होती है। श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में बेटी जन्म से विवाह तक की चिंता सरकार करती है।