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भारत- रूस रक्षा संबंध लगातार आगे बढ़ते रहेंग

केंद्रीय रक्षा, वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने पिछले दिनों अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा पर आयोजित छठवें मॉस्को सम्मेलन में भाग लिया और समापन सत्र को संबोधित किया। रक्षा मंत्री अरुण जेटली की रूसी रक्षा मंत्री श्री सर्गई शोइगु के साथ गर्मजोशी पूर्ण एवं सकारात्मक बातचीत हुई। रूसी रक्षा मंत्री के साथ अपनी बातचीत के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए श्री जेटली ने कहा कि ‘भारत पारंपरिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा पर मॉस्को सम्मेलन में भाग लेता रहा है। इस वर्ष फैसला किया गया था कि भारत के रक्षा मंत्री सम्मेलन में भाग लेंगे। सम्मेलन के दौरान रूसी रक्षा मंत्री के साथ द्विपक्षीय रूप से भी बातचीत बहुत ही सार्थक रही है।’श्री जेटली ने कहा कि ‘भारत और रूस के बीच राजनयिक संबंध अपने 70वें वर्ष में है। यह ऐसा संबंध है जो केवल दोनों देशों की सरकारों के बीच के संबंध से कहीं और अधिक है। रूस भारत का एक सच्चा और भरोसेमंद मित्र रहा है, जैसा कि भारत के लोग हमेशा मानते भी रहे हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा के स्तर पर भी दोनों देशों के बीच काफी अधिक सहयोग रहा है। यह सहयोग ही है जो संयुक्त सैन्य अभ्यासों, प्रशिक्षण सहयोग और उपकरणों की आपूर्ति तक विस्तारित होता है जो भारत, रूस से खरीदता है। हमारी भारत में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने की भविष्य की योजनाएं हैं और ये ही रूसी रक्षा मंत्री के साथ हमारी द्विपक्षीय बैठक के लिए चर्चा के विषय हैं और मुझे पूरा भरोसा है कि हमारे संबंध का वर्तमान में जो स्तर है, वह लगातार और आगे बढ़ता रहेगा। उत्तर कोरिया से सशर्त बातचीत को तैयारअमेरिका, उत्तर कोरिया मसले को बातचीत के जरिए निपटाने के लिए तैयार है, बशर्ते प्योंगयांग अपने परमाणु हथियार और मिसाइल विकास कार्यक्रम को छोड़ें। चीन ने अमेरिका के नरम हुए रुख का स्वागत किया, लेकिन दक्षिण कोरिया में एंटी मिसाइल सिस्टम थाड की तैनाती को लेकर उसकी चिंता बरकरार है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के बाद से चीन कोरियाई प्रायद्वीप विवाद में संबद्ध पक्षों को बातचीत की टेबल पर लाने की लगातार कोशिश कर रहा है। वह उत्तर कोरिया को परमाणु बम और मिसाइलों के परीक्षण की राह छोड़ने के लिये भी कह रहा है।