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इकोलॉजी के क्षेत्र में बढ़ रहे हैं कैरियर के अवसर

इकोलॉजी (पारिस्थितिकी) जीव विज्ञान की  वह शाखा है, जिसके तहत जीवों तथा उनके वातावरण के पारस्परिक संबंधों का गहन एवं विस्तृत अध्ययन किया जाता है। जीवन की अनेक जटिल समस्याओं का समाधान पारिस्थितिकी के अध्ययन द्वारा हुआ है। गौरतलब है कि मनुष्य पूरी तरह से अपने पर्यावरण पर निर्भर है। पर्यावरण में थोड़ी सी भी भिन्नता अथवा बदलाव उसके जीवन को तेजी से प्रभावित करते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि आज हर देश पर्यावरण की समस्या से जूझ रहा है। पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए इकोलॉजी का अध्ययन आवश्यक हो गया है। इसके जरिए पर्यावरण के विभिन्न आयामों तथा उनके संरक्षण की विधिवत जानकारी प्राप्त होती है। विगत कुछ वर्षों से इकोलॉजी तेजी से उभरता हुआ कैरियर साबित हो रहा है।
इकोलॉजी के प्रमुख क्षेत्र
अर्बन इकोलॉजी

अर्बन इकोलॉजी इस क्षेत्र की सबसे नई विधा है, इसमें इकोलॉजी का बड़े पैमाने पर अध्ययन किया जाता है, खासकर शहरों में रहने वाले लोगों के जनजीवन तथा प्राकृतिक परिदृश्य को इसमें भली-भांति समझा जाता है।
फॉरेस्ट इकोलॉजी

इसके अंतर्गत विभिन्न प्रजातियों के पौधों, जानवरों तथा कीड़े-मकौड़ों का अध्ययन तथा उनका वर्गीकरण किया जाता है। इसके अलावा जंगलों की भूमि तथा वहाँ के वातावरण पर मनुष्य एवं ग्लोबल वार्मिंग के असर का अध्ययन भी ंिकया जाता है।
मरीन इकोलॉजी

यह इकोलॉजी की ऐसी शाखा है, जिसके तहत जलीय जन्तुओं तथा उसमें रहने के दौरान वातावरण के असर को समझा जाता है। इसमें चिड़ियाघर एवं एक्वेरियम सेंटर में जलीय जन्तुओं के संरक्षण पर भी काम किया जाता है। 
रेस्टोरेशन इकोलॉजी

इसके तहत प्रोफेशनल्स ऐसी जगह काम करते हैं, जहाँ पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में हो। जैसे वनों की कटाई, फिर से पौधारोपण की कवायद। सामान्यतः रेस्टोरेशन इकोलॉजिस्ट किसी प्रोजेक्ट के तहत काम करते हैं।
वाइल्ड लाइफ इकोलॉजी
इसमें इकोलॉजिस्ट वन्य जीवों एवं उनकी जनसंख्या तथा उनके संरक्षण का प्रमुखता से अध्ययन करते हैं। साथ ही यह भी पता करते हैं कि वे कौन से कारण हैं, जिनसे उनकी जनसंख्या में वृद्धि हो रही है।
एनवायर्नमेंटल इकोलॉजी

इसमें एनवायर्नमेंटल इकोलॉजिस्ट (बायोलॉजिस्ट) किसी विशेष वातावरण एवं उसमें रहने वाले लोगों की शारीरिक बनावट का अध्ययन करते हैं। एनवायर्नमेंटल इकोलॉजिस्ट पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा तथा उसके असंतुलन पर होने वाले दुष्परिणामों से भी लोगों को अवगत कराते हैं।
साइंस बैकग्राउंड वाले
बना सकते हैं कैरियर

यदि कोई छात्र इकोलॉजी से संबंधित कोर्स करना चाहता है, तो स्नातक स्तर तक उसका साइंस बैकग्राउंड होना जरूरी है। इकोलॉजी के क्षेत्र में सुनहरा कैरियर बनाने के लिए  स्नातक स्तर पर बॉटनी, जूलॉजी एवं फॉरेस्ट्री संबंधी विषय बहुत सहायक साबित होते हैं। इसके बाद इकोलॉजी के मास्टर कोर्स में दाखिला मिलता है। यदि छात्र टीचिंग तथा शोध संबंधी कार्य करना चाहते हैं, तो उनके लिए मास्टर डिग्री के बाद पीएचडी करना अनिवार्य है।
क्षेत्र में ऊँची सफलता के लिये जरूरी
है प्रकृति संरक्षण के प्रति जुनून

इस क्षेत्र में ऊँची सफलता पाने के लिए जरूरी है कि प्रोफेशनल्स प्रकृति से प्रेम करना सीखें और प्रकृति के संरक्षण के लिए उनके दिल में दर्द हो। कार्यक्षेत्र व्यापक होने के कारण इकोलॉजी के जिस क्षेत्र में कैरियर बनाना चाहते हैं, उसकी विस्तृत जानकारी जरूरी है। किसी भी चीज को आँकने का कौशल तथा कार्यशैली प्रोफेशनल्स को औरों से अलग करती है। इसके अलावा समस्या के त्वरित निर्धारण का गुण, कम्प्यूटर तथा मैथ्स की अच्छी जानकारी, प्रेजेंटेशन तथा राइटिंग स्किल, कार्य के प्रति अनुशासन एवं टीम वर्क आदि का गुण प्रोफेशनल्स को लंबी रेस का घोड़ा बना सकता है।
तेजी से बढ़ रही है
इकोलॉजिस्टों की माँग

पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने एवं उसमें मौजूद जीवों तथा संसाधनों में संतुलन बनाए रखने की प्रक्रिया से लगभग सभी देश जूझ रहे हैं। इसके लिए वे लगातार अभियान चलाकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं। इन सब कवायदों के चलते देश में इकोलॉजिस्टों की माँग तेजी से बढ़ी है। इसके अलावा स्नातक स्तर पर पर्यावरण एक अनिवार्य विषय घोषित हो जाने से भी फैकल्टी के रूप में योग्य लोगों की बहुत आवश्यकता है। एनजीओ, विश्व बैंक के प्रोजेक्ट तथा सरकारी विभागों में इकोलॉजिस्टों की काफी माँग है।
किताबी तथा प्रायोगिक दोनों
तरह की जानकारी जरूरी
एक इकोलॉजिस्ट की पहली ड्यूटी पारिस्थितिकी तंत्र में विभिन्न प्रजातियों को खोजना तथा वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक सूचनाएँ एकत्र करना है। इन प्रोफेशनल्स का ज्यादा समय रिसर्च, आँकड़ों का अध्ययन करने तथा रिपोर्ट तैयार करने में बीतता है। यह ऐसा क्षेत्र है, जो छात्रों से किताबी तथा प्रायोगिक दोनों तरह की जानकारी माँगता है। इसका विषय क्षेत्र बहुत व्यापक होने के कारण अभ्यर्थी उन्हीं क्षेत्रों की ओर कदम बढ़ाएँ, जिनमें उनकी अधिक रुचि हो तथा जिसमें वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें।
सरकारी तथा निजी दोनों क्षेत्रों
में हैं समान अवसर

आजकल इकोलॉजिस्टों के काम का दायरा काफी बढ़ गया है। वे बड़े-बड़े भूखंडों के मालिकों, उद्योगपतियों तथा वॉटर कम्पनियों से जुड़कर उन्हें सलाह देने का काम भी कर रहे हैं। कई सरकारी और गैर सरकारी एजेंसियों, एनजीओ, फर्म तथा विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इकोलॉजिस्टों को विभिन्न पदों पर काम मिलता है। मुख्य रूप से प्रोफेशनल्स को रिसर्च सेंटर जैसे  एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट, सीएसआईआर, एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट, एनवायर्नमेंटल अफेयर डिपार्टमेंट, फॉरेस्ट्री डिपार्टमेंट, नेशनल पार्क, म्यूजियम और एक्वेरियम सेंटर में रोज़गार के सुनहरे अवसर मिलते हैं। इसके अलावा कई प्राइवेट संस्थान प्रकृति संरक्षण के क्षेत्र में आगे आए हैं और वे भी इकोलॉजिस्ट्स को अपने यहाँ अच्छे वेतन पर नियुक्त कर रहे हैं।
शुरुआत में 20 से 40 हजार प्रतिमाह मिलती है सैलरी

इस क्षेत्र में सेलरी की रूपरेखा संस्थान, प्रोफेशनल्स की योग्यता एवं कार्यशैली पर निर्भर करती है। वैसे इसमें शुरुआती दौर में कोई संस्थान ज्वॉइन करने पर 15 से 20 हजार रुपए प्रतिमाह मिलते हैं। अनुभव बढ़ने के साथ ही सेलरी भी बढ़ती जाती है, जबकि किसी विश्वविद्यालय अथवा कॉलेज में टीचिंग के कार्य के दौरान उन्हें 40-50 हजार रुपए प्रतिमाह मिल जाते हैं। यदि स्वतंत्र रूप से अथवा विदेश में नौकरी कर रहे हैं तो आमदनी की कोई निश्चित सीमा नहीं होती है।
इकोलॉजी और एनवायर्नमेंटल स्टडीज
में कोर्स कराने वाले प्रमुख संस्थान
गवर्मेंट होलकर साइंस कॉलेज, इंदौर।
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल।
जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर।
महात्मा गाँधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, चित्रकूट (सतना)।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली।
इंस्टीट्यूट ऑफ इकोलॉजी एंड एनवायर्नमेंटल स्टडीज, नई दिल्ली।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इकोलॉजी, जयपुर।
फर्गुसन कॉलेज, पुणे।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंस), बेंगलुरू।
सरदार पटेल महाविद्यालय, नागपुर।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज, बेंगलुरू।
भारती विद्यापीठ यूनिवर्सिटी, पुणे।
मती मीना भंडारी
(लेखिका सुप्रसिद्ध कैरियर काउंसलर हैं