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मुगाबे के खिलाफ सेना की कार्रवाई को जिम्बाब्वे की हाईकोर्ट ने वैध बताया

जिम्बाब्वे में पिछले दिनों सेना की कार्रवाई के बाद 15 नवंबर को मुगाबे, उनकी पत्नी ग्रेसी मुगाबे और कुछ करीबी मंत्रियों को नजरबंद कर दिया गया था और इसके बाद 21 नवंबर को मुगाबे को इस्तीफा देना पड़ा और अब जिम्बाब्वे की एक हाईकोर्ट ने रॉबर्ट मुगाबे के खिलाफ की गई सेना की कार्रवाई को वैध करार दिया है। हाईकोर्ट के जज जॉर्ज चिवेशे ने कहा कि सेना ने मुगाबे के आसपास के लोगों को उच्च पदों को हथियाने से रोकने के लिये पूरी तरह से संवैधानिक और कानून सम्मत कार्रवाई की। जज ने 6 नवंबर को उपराष्ट्रपति इमर्सन मनंगावा को हटाने के लिए मुगाबे की कार्रवाई को गैरकानूनी करार दिया।
मुगाबे को मिलेगा पूरा
वेतन और अन्य सुविधायें

सेना के दखल के बाद राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने वाले रॉबर्ट मुगाबे को सेवानिवृत्ति के बाद की हर सुविधा दी जाएगी। उन्हें एकमुश्त 64.55 करोड़ रुपया भी दिया जाएगा। राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के लिए मुगाबे को राजी करने के लिए सेना के साथ मध्यस्थता करने वाले एक सूत्र ने बताया कि उन्हें लगभग 32.26 करोड़ रुपये का एकमुश्त भुगतान किया जाएगा, जबकि बाकी रकम किश्तों में दी जाएगी। समझौते के तहत उन्हें मासिक वेतन, चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा, निजी संपत्ति का संरक्षण भी दिया जाएगा। इसके साथ ही उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई भी नहीं की जाएगी।
मनंगावा ने मुगाबे को
बताया था अपना मेंटर

राष्ट्रपति बनने के बाद मनंगावा ने अपने भाषण में रॉबर्ट मुगाबे के प्रति पूरा सम्मान व्यक्त किया। उन्हें अपना पिता, संरक्षक, गुरु व बराबरी के साथ काम करने वाला बताया। मनंगावा ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिये काम करने का वादा किया।